अब धर्म परिवर्तन पर कड़ी निगरानी! Chhattisgarh में Freedom of Religion Bill 2026 पेश, कानून बना तो क्या होगा बदलाव?

छत्तीसगढ़ विधानसभा में पेश Freedom of Religion Bill 2026 धर्मांतरण से जुड़े नियमों को सख्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है. कानून बनने पर जबरन, लालच या दबाव से धर्म परिवर्तन पर रोक के साथ नई प्रक्रिया और कड़ी सज़ा लागू की गई हैं.

Edited By :  समी सिद्दीकी
Updated On :

Freedom of Religion Bill, 2026: छत्तीसगढ़ सरकार ने गुरुवार को राज्य विधानसभा में एक नया बिल पेश किया, जिसका मकस फोर्स, प्रलोभन, धोखाधड़ी या गलत जानकारी के जरिए होने वाले धर्म परिवर्तन को रोकना है. उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, जो गृह विभाग भी संभालते हैं, उन्होंने सदन में छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता बिल, 2026 पेश किया है.

प्रस्तावित कानून का मकसद ऐसे धर्म परिवर्तन पर रोक लगाना है, जो जबरदस्ती, लालच, अनुचित दबाव या झूठे प्रस्तुतीकरण के जरिए कराए जाते हैं. इस बिल को पिछले हफ्ते राज्य कैबिनेट ने मंजूरी दी थी. कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद विजय शर्मा ने पत्रकारों से बातचीत में बताया था कि यह विधेयक 1968 से लागू प्रावधानों को और विस्तार देता है और इसमें लालच के नए-नए तरीकों को शामिल किया गया है.

बिल पर विजय शर्मा ने क्या कहा?

उन्होंने कहा कि प्रलोभन कई तरह के हो सकते हैं, जैसे डिजिटल माध्यम या आर्थिक फायदे के जरिए, वहीं धमकियां भी शारीरिक या अप्रत्यक्ष रूप में दी जा सकती हैं. उपमुख्यमंत्री के मुताबिक, इस बिल के तहत एक ऐसा व्यवस्थित कानूनी ढांचा तैयार किया गया है, जिससे लोगों की संवैधानिक स्वतंत्रता प्रभावित न हो और साथ ही सामाजिक तनाव जैसी स्थितियों को भी रोका जा सके.

फिलहाल राज्य में क्या कोई कानून लागू है?

वर्तमान में राज्य में छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 1968 लागू है. यह कानून मध्य प्रदेश से लिया गया था, जब साल 2000 में छत्तीसगढ़ को अलग राज्य बनाया गया था.

छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता बिल, 2026 के कानून बनने के बाद क्या होगा?

  • छत्तीसगढ़ में प्रस्तावित धर्म स्वतंत्रता विधेयक, 2026 लागू होने के बाद धर्म परिवर्तन से जुड़े नियमों में कई अहम बदलाव देखने को मिल सकते हैं. इस कानून का मुख्य उद्देश्य बल, प्रलोभन, दबाव, गलत जानकारी या कपटपूर्ण तरीकों से कराए जाने वाले धर्म परिवर्तन पर रोक लगाना है.
  • प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे पहले से तय प्रक्रिया का पालन करना होगा. इसके तहत संबंधित व्यक्ति को जिला मजिस्ट्रेट या सक्षम प्राधिकारी को पहले से सूचना देनी होगी.
  • इसके साथ ही प्रस्तावित धर्म परिवर्तन की जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाएगी, ताकि 30 दिनों के भीतर कोई भी व्यक्ति इस पर आपत्ति दर्ज करा सके.
  • बिल में धर्म परिवर्तन से जुड़े कई पहलुओं को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है. इसमें लालच, उत्पीड़न, गलत प्रस्तुतीकरण, सामूहिक धर्म परिवर्तन को शामिल किया गया है.
  • इसके साथ ही इसमें डिजिटल माध्यम के जरिए किए जाने वाले धर्म परिवर्तन को भी शामिल किया गया है. यानी अगर सोशल मीडिया के माध्यम से किसी को धर्म बदलने के लिए लालच दिया जाता है, तो उसे भी अपराध माना जाएगा.
  • यदि कोई व्यक्ति गैरकानूनी तरीके से धर्म परिवर्तन कराता है, तो उसे 7 से 10 साल तक की जेल और कम से कम 5 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है.
  • वहीं, अगर पीड़ित नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित है, तो सजा और अधिक सख्त होगी. ऐसे मामलों में 10 से 20 साल तक की जेल और कम से कम 10 लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान किया गया है.
  • सामूहिक धर्म परिवर्तन के मामलों में और भी कठोर सजा का प्रावधान किया गया है. इसके तहत दोषी को 10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है, साथ ही कम से कम 25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है.
  • बिल के तहत आने वाले सभी अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती होंगे. ऐसे मामलों की सुनवाई विशेष न्यायालय में की जाएगी, ताकि मामलों का त्वरित निपटारा हो सके.

क्या घर घारवापसी पर कोई पड़ेगा असर?

वहीं, इस बिल में यह भी साफ किया गया है कि ‘घर वापसी’ जैसे अभियानों पर इसका असर नहीं पड़ेगा. यदि कोई व्यक्ति अपने पैतृक धर्म या पहले की आस्था में वापस लौटता है, तो उसे इस कानून के तहत धर्म परिवर्तन नहीं माना जाएगा.

Similar News