Assam में कहां चूक गई कांग्रेस, BJP ने ऐसे दोनों हाथों से लूट ली चुनावी महफिल, एक्सपर्ट ने बताई जमीनी स्थित

2026 में असम की राजनीति में कांग्रेस के भीतर की फूट, नेतृत्व को लेकर असमंजस और ज़मीनी स्तर से जुड़ाव की कमी ने पार्टी को कमज़ोर कर दिया. विशेषज्ञों के अनुसार, BJP ने अपने मज़बूत संगठन और स्पष्ट नेतृत्व के ज़रिए चुनावी मैदान में एक मज़बूत स्थिति बना ली.

( Image Source:  Bora himanta and bordoloi facebook )
By :  धीरेंद्र कुमार मिश्रा
Updated On : 7 April 2026 7:09 PM IST

असम विधानसभा चुनाव का प्रचार 7 मार्च को समाप्त हो गया. इस बीच असम की राजनीति फिलहाल एक ऐसे मोड़ पर खड़ी हुई, जहां विपक्षी राजनीति खासकर कांग्रेस संगठनात्मक और नेतृत्व संकट से जूझती नजर आई. ऐसा इसलिए कि चुनाव शंखनाद से ठीक पहले बीजेपी कांग्रेस के दो अहम नेता भूपेन बोरा और प्रोद्योत बोरदोलोई को बीजेपी में ले आई. दूसरी ओर असम बीजेपी के चाणक्य व सीएम हिमंता बिस्वा सरमा की मजबूत पकड़ ने राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया. कांग्रेस के भीतर हालिया टूट और रणनीतिक असंतुलन ने इस सवाल को और बड़ा कर दिया है कि क्या बीजेपी चुनाव में कांग्रेस की इस कमजोरी का फायदा उठा पाएगी?

असम के वरिष्ठ पत्रकार अरुण ज्योति का कहना है कि अगर कांग्रेस अपने भीतर के मतभेदों को समय रहते नहीं सुलझा लेती, तो इसका सीधा असर आगामी विधानसभा चुनावों के नतीजों पर नहीं पड़ता, बल्कि बीजेपी को मजबूती से टक्कर देने की स्थिति में आ गई थी. वैसा नहीं हुआ, बीजेपी ने कांग्रेस के दो जमीनी नेताओं को अपने पाले में बदलकर माहौल को अपने पक्ष में करने की भरपूर कोशिश की. असम चुनाव में कांग्रेस की यह कमजोरी बीजेपी के लिए बड़ा राजनीतिक अवसर बन सकती है. हालांकि, नतीजा क्या होगा, इसका खुलासा तो 4 मई को ही होगा.

1. कांग्रेस में बिखराव की असली वजह क्या?

असम कांग्रेस के भीतर पूरे चुनाव प्रचार के दौरान संगठनात्मक एकता की कमी और नेतृत्व को लेकर असमंजस देखने को मिला है. हालात तब और कमजोर हुए जब पार्टी के दो अहम चेहरे भूपेन बोरा और प्रोद्योत बोरदोलोई बीजेपी के साथ जुड़ गए. ये दोनों नेता लंबे समय तक कांग्रेस के “संगठनात्मक पिलर” माने जाते थे, लेकिन रणनीतिक मतभेद और नेतृत्व चयन को लेकर असंतोष ने स्थिति को बिगाड़ दिया. इससे पार्टी की जमीनी पकड़ पर सीधा असर पड़ा है.

2. क्या गौरव गोगोई को चेहरा बनाना रणनीतिक भूल?

कांग्रेस ने असम में गौरव गोगोई को प्रमुख चेहरा बनाने की कोशिश की, लेकिन यह फैसला हर धड़े को एक साथ जोड़ने में सफल नहीं हो पाया. कई पुराने नेता इस बदलाव को “साइडलाइनिंग” के रूप में देखने लगे. यही असंतोष धीरे-धीरे अंदरूनी दूरी में बदल गया और संगठनात्मक टूट की स्थिति बनती चली गई, जिसे कांग्रेस नहीं संभाल पाई. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यही वह बिंदु था, जहां कांग्रेस एकजुट रणनीति कमजोर पड़ गई.

3. बोरा और बोरदोलोई की राजनीति क्यों अहम?

भूपेन बोरा की राजनीति आक्रामक और जनआंदोलन आधारित रही है, जहां उनका फोकस नैरेटिव सेट करने और सरकार पर सीधा हमला करने पर रहा है. वहीं बोरदोलोई प्रशासनिक अनुभव और संतुलित राजनीति के लिए जाने जाते हैं. एक तरफ तेज राजनीतिक बयानबाजी, तो दूसरी तरफ संस्थागत अनुभव - ये दोनों मिलकर कांग्रेस की रणनीतिक ताकत बन सकते थे, लेकिन तालमेल की कमी ने उसे कमजोर कर दिया.

4. बीजेपी को फायदा कैसे?

भारतीय जनता पार्टी को इस पूरे घटनाक्रम का सीधा राजनीतिक लाभ मिल रहा है क्योंकि उसका संगठनात्मक ढांचा अधिक अनुशासित और केंद्रीकृत है. मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की आक्रामक और निर्णायक नेतृत्व शैली ने बीजेपी को राज्य में मजबूत स्थिति में रखा है. कांग्रेस के भीतर नेतृत्व भ्रम और गठबंधन प्रबंधन की कमजोरी ने मतदाताओं में अस्थिरता की धारणा पैदा की है, जिसका फायदा सत्तापक्ष को मिल सकता है.

5. असम का चुनाव किसके के पक्ष में ?

अगर मौजूदा राजनीतिक रुझान असर मतदान के दिन भी दिखा, तो असम में बीजेपी को बढ़त मिलने की संभावना है. बीजेपी पहले से ही एक स्थिर और एकीकृत चुनावी मशीनरी के साथ मैदान में है. हालांकि, असम की राजनीति हमेशा जमीनी मुद्दों और क्षेत्रीय समीकरणों पर निर्भर करती है, इसलिए अंतिम परिणाम पूरी तरह निश्चित नहीं कहा जा सकता.

6. कौन हैं भूपेन बोरा और प्रद्योत बोरदोलोई?

असम की राजनीति में भूपेन बोरा और प्रद्युत बोरदोलोई दो ऐसे नाम हैं जो लंबे समय से संगठन और नेतृत्व दोनों स्तर पर चर्चा में रहे हैं. भूपेन बोरा छात्र राजनीति से निकलकर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष तक पहुंचे और सरकार विरोधी आक्रामक राजनीति के लिए जाने जाते हैं. वहीं, प्रद्युत बोरदोलोई प्रशासनिक अनुभव और संतुलित राजनीतिक शैली के कारण कांग्रेस के अनुभवी चेहरों में शामिल रहे हैं. उनकी पहचान एक स्थिर और नीति-आधारित नेता की रही है.

असम के पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष भूपेन कुमार बोराह (Bhupen Kumar Borah) 2026 के असम विधानसभा चुनाव में बिहपुरिया (Bihpuria) विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं. उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा देकर बीजेपी में शामिल होने के बाद इस सीट से अपनी उम्मीदवारी दर्ज की है.

इसी तरह पूर्व सांसद प्रद्योत बोरदोलोई (Pradyut Bordoloi) को बीजेपी ने 2026 के असम विधानसभा चुनाव के लिए दिसपुर (Dispur) सीट से अपना उम्मीदवार घोषित किया है. उन्होंने हाल ही में कांग्रेस से इस्तीफा देकर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की उपस्थिति में बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की थी.

7. बीजेपी ने कैसे उठाया फायदा?

बीजेपी ने मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में मजबूत संगठन, स्थिर सरकार और विकास एजेंडे को चुनावी हथियार बनाया. इसके साथ ही विपक्ष की अस्थिरता को अप्रत्यक्ष रूप से उजागर कर मतदाताओं के बीच यह संदेश दिया गया कि एकजुट नेतृत्व ही स्थिर सरकार दे सकता है. यही रणनीति बीजेपी के लिए राजनीतिक बढ़त का कारण बनी.

8. कांग्रेस जमीनी नेताओं को क्यों नहीं रोक पाई?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कांग्रेस अपने प्रभावशाली नेताओं को संभाल पाने में असफल रही? अंदरूनी मतभेद, नेतृत्व को लेकर असमंजस और संगठनात्मक तालमेल की कमी ने स्थिति को कमजोर किया. अगर भूपेन बोरा और प्रोद्योत बोरदोलोई जैसे नेताओं को बेहतर समन्वय और स्पष्ट भूमिका मिलती, तो वे पार्टी के लिए ताकत बन सकते थे, न कि विवाद का कारण.

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