दिवाली के 15 दिन बाद एक बार फिर देश में रोशनी और आस्था का अनोखा नजारा देखने को मिलता है. इस दिन खासतौर पर उत्तर प्रदेश के वाराणसी में गंगा के घाट लाखों दीयों से जगमगा उठते हैं. शाम होते ही ऐसा लगता है, जैसे धरती पर ही देवलोक उतर आया हो. इसी पर्व को देव दीपावली कहा जाता है.

मान्यता है कि इस दिन देवी-देवता खुद धरती पर उतरकर भगवान शिव की नगरी काशी में दीपोत्सव मनाते हैं. इस मौके पर गंगा स्नान से लेकर दीपदान और पूजा-पाठ तक कई परंपराएं निभाई जाती हैं. लेकिन आखिर देव दीपावली क्यों मनाई जाती है? इस साल यह पर्व किस तारीख को पड़ेगा और इसके पीछे कौन सी पौराणिक कथा है? आइए जानते हैं.

कब मनाई जाएगी देव दीपावली 2026?

हिंदू पंचांग के अनुसार, देव दीपावली हर साल कार्तिक महीने की पूर्णिमा को मनाई जाती है. साल 2026 में यह पर्व 24 नवंबर, मंगलवार को मनाया जाएगा. इस दिन कार्तिक पूर्णिमा भी है. वाराणसी में प्रदोष काल के दौरान दीपदान का समय शाम 5:08 बजे से 7:47 बजे तक रहेगा. इस दौरान गंगा के किनारे दीप जलाने की परंपरा है.

आखिर क्यों मनाई जाती है देव दीपावली?

देव दीपावली मनाने के पीछे भगवान शिव और त्रिपुरासुर से जुड़ी पौराणिक कथा प्रचलित है. मान्यता के अनुसार, त्रिपुरासुर नाम के राक्षस ने अपनी शक्तियों के बल पर तीनों लोकों में आतंक मचा रखा था. उसके अत्याचारों से देवी-देवता भी परेशान हो गए थे. तब सभी ने भगवान शिव से मदद मांगी. देवताओं की पुकार सुनकर महादेव ने त्रिपुरासुर का वध कर दिया. इस जीत के बाद सभी देवी-देवता बेहद प्रसन्न हुए और उन्होंने काशी पहुंचकर गंगा के किनारे दीप जलाए. इसी विजय और खुशी को देव दीपावली के रूप में मनाने की परंपरा शुरू हुई. इसी वजह से इस पर्व को त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहा जाता है.

वाराणसी में कैसे मनाई जाती है देव दीपावली?

देव दीपावली का सबसे खास नजारा वाराणसी में देखने को मिलता है. यहां रविदास घाट से लेकर राजघाट तक गंगा के किनारे बसे घाटों को दीयों से सजाया जाता है. शाम ढलते ही लाखों दीपकों की रोशनी से पूरा गंगा तट चमक उठता है. गंगा आरती, मंत्रोच्चार और घंटियों की आवाज से माहौल भक्तिमय हो जाता है. इस खूबसूरत नजारे को देखने के लिए देश-विदेश से बड़ी संख्या में लोग काशी पहुंचते हैं.

देव दीपावली पर कौन-कौन सी परंपराएं निभाई जाती हैं?

इस दिन सुबह पवित्र नदियों में स्नान करने की परंपरा है. शाम को घरों, मंदिरों और घाटों पर दीप जलाए जाते हैं. गंगा में दीपदान करना भी बेहद शुभ माना जाता है. कई श्रद्धालु नाव से गंगा की सैर करते हुए रोशनी से जगमगाते घाटों का नजारा देखते हैं. मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से दीपदान और पूजा करने से पुण्य की प्राप्ति होती है.