कब है मोक्षदा एकदशी, इस दिन व्रत रखने से दूर होते हैं पाप, जानें पूजा विधि, महत्व और नियम

हिंदू धर्म में मोक्षदा एकादशी को विशेष महत्व दिया गया है. इस दिन व्रत रखने और भक्ति भाव से पूजा करने से व्यक्ति के पाप क्षय होते हैं और आत्मा को शांति तथा मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग खुलता है. यह एकादशी खासकर उन भक्तों के लिए महत्वपूर्ण है जो अपने जीवन में आध्यात्मिक उन्नति और मानसिक शांति की कामना करते हैं.;

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By :  State Mirror Astro
Updated On : 30 Nov 2025 6:30 AM IST

हिदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व होता है. हर माह दो बार एकादशी का व्रत रखा जाता है जिसमें एक कृष्ण और दूसरा शुक्ल पक्ष में रखा जाता है. हिंदू पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोक्षदा एकदशी के नाम से जाना जाता है. मोक्षदा एकादशी के दिन गीता जयंती भी मनाई जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस एक एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा करने और व्रत रखने से पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है.

इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ-साथ श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ करना विशेष फलदायी होता है. मान्यता है कि इस दिन व्रत करने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है. इस दिन अर्जुन को भगवान श्रीकृष्ण ने श्रीमद्भगवद्गीता का उपदेश दिया था, जिससे इसे गीता जयंती के रूप में भी मनाया जाता है.

कब है मोक्षदा एकादशी?

हिंदू पंचांग के अनुसार 30 नवंबर को रात 09 बजकर 29 मिनट से मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत होगी. जिसका समापन 01 दिसंबर को शाम 07 बजकर 01 मिनट पर होगा. ऐसे में उदया तिथि के अनुसार मोक्षदा एकादशी 01 दिसंबर को रखी जाएगी.

एकादशी का महत्व

सनातन धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व होता है. मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली एकादशी तिथि को मोक्षदा एकादशी के नाम से जाना जाता है. शास्त्रों के अनुसार, इस एकादशी व्रत को करने से व्यक्ति के पाप खत्म होते हैं और वैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है. इससे अलावा पितरों की मुक्ति के लिए मोक्षदा एकादशी भी बहुत ही महत्वपूर्ण होती है. इस एकादशी पर व्रत और तर्पण करने से पितरों को मुक्ति मिलती है. और जीवन में सकारात्मकता आती है. मोक्षदा एकादशी पर गीता का पाठ करने का महत्व होता है. ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को करने से मनुष्य को वही फल प्राप्त होता है जो अश्वमेध यज्ञ करने से मिलता है. मोक्षदा एकादशी पर दान, भक्ति और संयम के साथ इस एकादशी का पालन करने से व्यक्ति को वैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है.

पूजा विधि

इस वर्ष 01 दिसंबर को मोक्षदा एकादशी का व्रत रखा जाएगा. इस दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए. पूजा स्थल पर भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें. दीपक जलाकर भगवान को चंदन, पुष्प, धूप, नैवेद्य और तुलसी दल अर्पित करें. पूजा के दौरान "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करें. श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ करना इस दिन विशेष लाभकारी होता है. पूजा के बाद भगवान विष्णु की आरती करें और भजन-कीर्तन करते हुए रात्रि जागरण करें. फिर अगले दिन गरीबों को वस्त्र, भोजन और धन का दान देकर व्रत का समापन करें.

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