क्या होती है शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या, कब और कैसे लगती है और जानिए इसका प्रभाव
शनि एक राशि में करीब ढाई वर्षों तक रहते हैं इस तरह से पूरी 12 राशियों का एक चक्कर लगाने में शनि को 30 वर्ष का समय लग जाता है. इस तरह के शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या हर व्यक्ति के जीवन में 2 से 3 बार अवश्य सामना करना पड़ता है.
ज्योतिष में हर एक ग्रह का अपना खास महत्व होता है. जो अपने कारकत्व के आधार पर शुभ-अशुभ फल प्रदान करता है. आज हम ग्रहों में न्यायाधीश और कर्मफलदाता शनि के बारे में बताएंगे. ज्योतिष में शनिदेव को आयु, दुख, रोग, पीड़ा, विज्ञान, लोहा, खनिज तेल, कर्मचारी, सेवक और जेल आदि का कारक माना जाता है. शनि सभी ग्रहों में सबसे मंद गति से चलने वाले ग्रह हैं क्योंकि यह किसी एक राशि में सबसे ज्यादा समय तक रहते हैं. शनि ढाई साल के बाद ही राशि बदलते हैं. शनिदेव को मकर और कुंभ राशि का स्वामी ग्रह माना जाता है. शनि तुला राशि में उच्च और मेष राशि में नीच के होते हैं. शनिदेव व्यक्ति को कर्मों के आधार पर ही फल प्रदान करते हैं.
शनि का नाम आते ही लोग के मन में घबराहट पैदा होने लगती है. क्योंकि सभी ग्रहों में शनि ही एक मात्र ऐसे ग्रह हैं जिनकी साढ़ेसाती और ढैय्या लगती है. शनि साढ़ेसाती और ढैय्या का नाम सुनने ही लोगों के मन में डर बैठ जाता है. ज्योतिष में शनि को एक क्रूर ग्रह माना जाता है लेकिन शनि हमेशा ही नकारात्मक फल नहीं देते हैं बल्कि शुभ फल भी प्रदान करते हैं. जिन जातकों की कुंडली में शनि उच्च के होकर विराजमान होते हैं उस व्यक्ति को रंक से राजा बनाने में तनिक भी देर नहीं करते है.
शनि की साढ़ेसाती क्या होती है ?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, किसी जातक के ऊपर शनि की साढ़ेसाती तब शुरू होती है, जब शनि जातक के जन्म राशि से बारहवें, पहले या फिर दूसरे भाव में गोचर करते हैं. शनि की साढ़ेसाती लगभग साढ़ेसात सालों तक चलती है. इस कारण से इसे साढ़ेसाती कहा जाता है. शनि की साढ़ेसाती के ढाई-ढाई साल के तीन चरण होते हैं जिनका अपना अलग-अलग प्रभाव होता है.
शनि साढ़ेसाती के 3 चरण
- पहला चरण- चंद्र राशि से बारहवें भाव में शनि का गोचर
- दूसरा चरण- चंद्र राशि पर शनि का गोचर
- तीसरा चरण- चंद्र राशि से दूसरे भाव में शनि गोचर
शनि साढ़ेसाती का प्रभाव
जातक के जीवन में शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव होने से कई महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिलते हैं. शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव ज्यादतर नकारात्मक ही होता है. शनि की साढ़ेसाती होने से व्यक्ति के करियर में उतार-चढ़ाव, धन की कमी, पैसों की तंगी का सामना करना पड़ता है. अगर किसी जातक की कुंडली में शनि अशुभ स्थिति में हो तो व्यक्ति को कई तरह की परेशानियों से गुजरना पड़ता है. शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव होने से नौकरी-कारोबार में कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. सेहत में लगातार गिरावट होने लगती है.
शनि की ढैय्या
शनि की ढैय्या ढाई वर्षो तक रहती है. वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब शनि ग्रह चंद्र राशि से चौथे या फिर आठवे भाव में गोचर करते हैं तो इसे शनि की ढैय्या कहा जाता है. शनि की ढैय्या से व्यक्ति को कई तरह की मानसिक, शारीरिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है.