मौनी अमावस्या पर क्या है मौन व्रत रखने का महत्व ? जानिए धार्मिक और आध्यात्मिक लाभ

हिंदू धर्म में मौनी अमावस्या को आत्मशुद्धि और साधना का विशेष दिन माना जाता है. इस दिन मौन व्रत रखने की परंपरा सदियों से चली आ रही है, जिसका उद्देश्य केवल बोलने से रुकना नहीं, बल्कि मन, विचार और इंद्रियों पर संयम स्थापित करना होता है. मान्यता है कि मौनी अमावस्या पर मौन धारण करने से व्यक्ति भीतर की ऊर्जा को जागृत कर पाता है और आत्मचिंतन की ओर अग्रसर होता है.;

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By :  State Mirror Astro
Updated On : 18 Jan 2026 6:30 AM IST

हिंदू धर्म में माघ महीने में आने वाली मौनी अमावस्या का विशेष महत्व होता है. मौनी अमावस्या का पर गंगास्नान, पूजा-पाठ, तप और दान का खास महत्व होता है. धर्म शास्त्रों में मौनी अमावस्या के दिन मौन व्रत रखते हुए गंगा स्नान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है. इस वर्ष 18 जनवरी 2026 को मौनी अमावस्या का पर्व पूरे देशभर में मनाया जाएगा.

माह महीने की अमावस्या तिथि का महत्व न सिर्फ स्नान, दान और पूजा तक सीमित है बल्कि यह मौन, संयम और आत्मचिंतन से जुड़ा हुआ है. इस तिथि पर मन, वाणी और कर्म तीनों को शुद्धि करने के विशेष अवसर माना जाता है. आइए जानते हैं हिंदू धर्म में मौनी अमावस्या का क्या है धार्मिक महत्व.

मौनी अमावस्या तिथि 2026

वैदिक पंचांग के अनुसार, माघ महीने की अमावस्या तिथि 18 जनवरी 2026 को सुबह 12 बजकर 3 मिनट से आरंभ होगी जिसका समापन 19 जनवरी को सुबह 01 बजकर 21 मिनट होगा. ऐसे में मौनी अमावस्या का पर्व 18 जनवरी को मनाई जाएगी.

धार्मिक महत्व

हिंदू धर्म में माघ के महीने में पड़ने वाला अमावस्या का खास महत्व होता है मौनी अमावस्या पर लोग बड़ी संख्या में गंगा स्नान करते हैं और विशेष रूप से प्रयागराज के संगम तट पर लाखों लोग मौन अमावस्या पर पवित्र डुबकी लगाते हैं. शास्त्रों में वर्णन है कि इस दिन पवित्र नदी विशेष रूप से गंगा, यमुना और संगम में स्नान का अत्यंत पुण्यदायी फल बताया गया है. मौनी अमावस्या पर स्नान करने से व्यक्ति के जन्म-जन्मांतर के पाप खत्म हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है. इसे अलावा अमावस्या तिथि पर पितृ तर्पण और दान-पुण्य के लिए भी यह तिथि विशेष फलदायी मानी गई है. इस दिन अन्न, वस्त्र, तिल, घी और धन का दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है.

मौनी अमावस्या पर मौन का महत्व

मौनी अमावस्या पर मौन रहकर पूजा-पाठ, तप, स्नान और दान करने का महत्व होता है. वैदिक काल से ही ऋषि-मुनि मौन रहकर तप और साधना किया करते थे. वेद-पुराणों में मौन को आत्मज्ञान का मार्ग बताया गया है. मान्यता है कि भगवान मनु ने मौनी अमावस्या के दिन मौन व्रत रखकर सृष्टि की रक्षा का संकल्प लिया था, इसी कारण यह तिथि मौनी अमावस्या कहलायी.

आध्यात्मिक और मानसिक लाभ

धार्मिक मान्यता है कि मौन व्रत रखने से वाणी दोष शांत होते हैं. मौनी अमावस्या पर मौन धारण करने से व्यक्ति के मन के विकार, क्रोध, अहंकार और अशांति का शमन होता है. मौन व्रत रखने से मानसिक तनाव कम होता है, एकाग्रता बढ़ती है और निर्णय क्षमता में वृद्धि होती है.

मौनी अमावस्या पर क्या करें

  • मौनी अमावस्या पर सुबह जल्दी उठकर पवित्र नदी में स्नान करें और मौन व्रत का संकल्प लें.
  • पितरों का स्मरण कर तर्पण करें और जरूरतमंदों को दान दें.
  • मौनी अमावस्या पर पीपल के पेड़ की पूजा और परिक्रमा करें.
  • मौनी अमावस्या के दिन स्नान करने से बाद तिल, कंबल, अनाज और धन का दान करें.
  • मौनी अमावस्या पर घर के मुख्य द्वार पर और दक्षिण दिशा में सरसों के तेल का दीपक जलाएं.

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