पितृपक्ष शुरू हो चुके हैं और ऐसे में श्राद्ध से जुड़ी परंपराओं को लेकर लोगों के मन में कई सवाल भी आते हैं. इनमें एक सवाल यह भी है कि अगर पितरों के लिए निकाला गया भोजन कौवा न खाए, तो क्या श्राद्ध अधूरा माना जाता है? धार्मिक मान्यताओं में कौवे को पितरों से जोड़ा गया है, इसलिए उसके भोजन ग्रहण करने को खास महत्व दिया जाता है, लेकिन कौवे का न आना अपने आप में श्राद्ध अधूरा होने का निश्चित संकेत नहीं माना जाता है. 

ऐसी स्थिति में परेशान होने के बजाय श्राद्ध की बाकी विधियां श्रद्धा से पूरी करनी चाहिए. मान्यताओं के अनुसार, कौवे के लिए निकाला गया भोजन गाय को खिलाया जा सकता है. इसके अलावा कुत्ते, चींटियों और दूसरे पक्षियों के लिए भी भोजन रखा जा सकता है.

क्यों खिलाया जाता है कौवे को भोजन?

श्राद्ध के दिन जब पितरों के लिए भोजन तैयार किया जाता है, तो उसमें से थोड़ा हिस्सा कौवे के लिए भी अलग रखा जाता है. इसके पीछे धार्मिक मान्यता जुड़ी है. हिंदू परंपरा में कौवे को पूर्वजों से जोड़कर देखा जाता है और इसे यमराज का दूत भी माना गया है. ऐसी मान्यता है कि जब कौवा श्रद्धा से रखा भोजन ग्रहण करता है, तो इसे पितरों तक अर्पण पहुंचने का संकेत समझा जाता है. 

कौवा खाना न खाने का मतलब क्या?

श्राद्ध का भोजन रखने के बाद अगर काफी देर तक कोई कौवा नजर न आए, तो इसे लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है. कौवे का भोजन न करना यह साबित नहीं करता कि श्राद्ध अधूरा रह गया. आजकल पहले की तरह कौवे आसानी से घरों की छतों पर दिखाई नहीं देते, इसलिए कई बार उनके न आने की वजह बिल्कुल सामान्य हो सकती है. ऐसे में मन में किसी अनहोनी का डर रखने के बजाय श्रद्धा से श्राद्ध कर्म पूरा करना चाहिए.

कौवा खाना न खाए तो क्या करें?

श्राद्ध का भोजन रखने के बाद अगर कौवा आसपास दिखाई न दे, तो परेशान होने की जरूरत नहीं है. ऐसी स्थिति में कौवे के लिए निकाला गया हिस्सा गाय को खिलाया जा सकता है. धार्मिक मान्यताओं में गाय को भोजन कराना शुभ माना गया है.

इसके साथ ही भोजन का थोड़ा-सा हिस्सा कुत्ते, चींटियों और दूसरे पक्षियों के लिए भी रखा जा सकता है. इसे पंचबलि की परंपरा से जोड़कर देखा जाता है. यानी कौवा न आए, तब भी श्रद्धा से निकाला गया अन्न दूसरे जीवों तक पहुंचाकर भोजन अर्पित करने की परंपरा निभाई जा सकती है.

कहां-कहां रख सकते हैं खाना?

अगर काफी इंतजार के बाद भी आसपास कोई कौवा या दूसरा जीव दिखाई न दे, तो भी परेशान होने की जरूरत नहीं है. ऐसे में भोजन को किसी मंदिर, पेड़ के नीचे या किसी साफ और पवित्र जगह पर श्रद्धा से रखा जा सकता है. श्राद्ध में सबसे अहम भावना और सम्मान को माना जाता है, इसलिए कौवे के न आने की वजह से मन में किसी तरह की चिंता रखने के बजाय श्रद्धा के साथ अपने पितरों का स्मरण करना चाहिए.

नोट: ये बातें धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं. स्टेट मिरर हिंदी इसकी पूर्ण सत्यता या प्रमाणिकता का दावा नहीं करता है.