क्यों है उमर अब्दुल्ला की शादी नजायज, क्या निधि राजदान का इस्लाम अपनाना जरूरी? कायदे कानून
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की पत्रकार निधि राजदान से शादी चर्चा में है. इस शादी को लेकर मौलाना शाहबुद्दीन रजवी ने इस्लामी नियमों का हवाला देते हुए सवाल उठाए हैं. उमर ने सोशल मीडिया पर अपनी नई जिंदगी की शुरुआत की जानकारी दी थी.
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अबदुल्ला ने हाल ही में पत्रकार निधि राजदान से शादी की है.लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो इस शादी से बिल्कुल भी सहमत नहीं हैं, उनके अनुसार उमर को पहले निधि को इस्लाम कबूल कराना चाहिए था और फिर शादी करनी चाहिए थी, तभी ये शादी वैध मानी जाती.
मौलाना शाहबुद्दीन रजवी ने कहा, ''इस्लाम में शादी ब्याह निकाह के लिए कुछ उसूल मुकर्रर किए गए हैं, शर्तें हैं, और वो यह है कि निकाह यानि शादी के लिए लड़का और लड़की दोनों का मुसलमान होना जरूरी है.इस्लाम का मानने वाला अनुयायी होना जरूरी है. यहां जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अबदुल्ला मुसलमान हैं और निधि राजदान गैर मुस्लिम है. ऐसी कंडीशन में जो शादी हुई है, वो इस्लाम के नुक्तेनजर शादी शादी नहीं है, .ह शादी नाजायज है. उमर को चाहिए था कि सबसे पहले वो निधि को इस्लाम कबूल कराते, कलमा पढ़वाते, उसके बाद में शादी करते तो इस शादी को जायज करार किया जा सकता है अन्यथा नहीं.''
दरअसल ये उमर की दूसरी शादी है, इससे पहले उन्होंने पायल नाथ से शादी की थी.दोनों की शादी 1 सितंबर 1994 में हुई. इसके बाद लंबे समय तक साथ रहने के बाद दोनों ने अलग होने का फैसला किया. 31 जुलाई 2016 को दोनों में आपसी सहमति से तलाक हो गया.
उमर ने अपनी दूसरी पत्नी निधि से शादी ती तस्वीरें अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर शेयर की थी. उन्होंने 31 अक्तूबर को की गई पोस्ट में लिखा था, कल एक नई यात्रा शुरू हुई.उमर की पत्नी निधि एक जर्नलिस्ट हैं. उन्होंने काफी लंबे समय कर एनडीटीवी के साथ काम किया. निधि का जन्म दिल्ली में हुआ.स्कूल का पढ़ाई एपीजे स्कूल से की जबकि ग्रैजुएशन दिल्लू यूनिवर्सिटी के लेडी श्री राम कॉलेज से किया. इसके बाद आईआईएमसी से पत्रकारिता की पढ़ाई की. निधि को रामनाथ गोयनका अवॉर्ड भी मिल चुका है. उन्होंने एनडीटीवी में नौकरी छोड़ने के बाद हार्वर्ड में पढ़ाना शुरू किया.
क्या है मुस्लिम धर्म में निकाह करने के कायदे कानून?
इस्लाम में शादी केवल सामाजिक अनुबंध नहीं बल्कि दो लोगों के बीत विश्वास, सम्मान और मूल्यों को साझा करने के बंधन है. यहां आस्था में समानता को सबसे महत्वपूर्ण शर्तों में से एक माना जाता है, जिसे अनदेखा नहीं किया जा सकता, कुरान एक स्वस्थ वैवाहिक संबंध की नींव के रूप में समान आस्था पर जोर देती है.
कुरान में अलग-अलग धर्मों के लोगों के बीच विवाह के संबंध में विशेष मार्गदर्शन दिया गया है. कुछ शर्तों के तहत, मुस्लिम पुरुषों को 'अहल-ए-किताब' (यहूदियों और ईसाइयों) की महिलाओं से विवाह करने की अनुमति है, बशर्ते ये महिलाएं चरित्रवान हों और धर्म का सम्मान करती हों.
इस्लाम बच्चों की धार्मिक परवरिश को प्राथमिकता देता है. शादी सिर्फ दो व्यक्तियों के बीच ही नहीं, बल्कि परिवारों के बीच भी होती है. दो अलग धर्मों में शादी वाले विवाहों में प्रार्थना, उपवास और आहार संबंधी नियम जैसी दैनिक प्रथाएं जटिल हो सकती हैं.
इस्लामी विवाह की शर्तें, जिन्हें ध्यान में रखना चाहिए
शादी के लिए दोनों पक्षों की सहमति होनी चाहिए, विवाह अनुबंध (निकाह) के समय गवाह होने चाहिए, महिला को मेहर (दहेज) मिलना चाहिए, संघ को इस्लामी सिद्धांतों का विरोध नहीं करना चाहिए. इस्लाम में निकाह के समय गवाहों का होना भी जरूरी है.
इस्लाम में अलग-अलग धर्मों के बीच विवाह एक जटिल विषय है, जिस पर धार्मिक ग्रंथों, विद्वानों के मार्गदर्शन और व्यक्तिगत परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है. इस्लाम, मुस्लिम पुरुषों को कुछ विशेष शर्तों के तहत 'अहल-ए-किताब' (ईश्वरीय ग्रंथ मानने वाले) समुदायों की पवित्र चरित्र वाली महिलाओं से विवाह करने की अनुमति देता है. हालांकि, यह मुस्लिम महिलाओं को गैर-मुस्लिम पुरुषों से विवाह करने की पूरी तरह से मनाही करता है.