18 जनवरी को मौनी अमावस्या, जानिए मौन, स्नान और दान महापर्व की 5 खास बातें
हिंदू पंचांग के अनुसार 18 जनवरी को मौनी अमावस्या का पावन पर्व मनाया जाएगा, जिसे स्नान, दान और मौन का विशेष महापर्व माना जाता है. यह दिन आध्यात्मिक शुद्धि और आत्मचिंतन के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है. मान्यता है कि इस दिन मौन व्रत रखने से मन और आत्मा दोनों शुद्ध होते हैं, वहीं पवित्र नदियों में स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और दान करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं.;
18 जनवरी, रविवार को मौनी अमावस्या है. शास्त्रों के अनुसार माघ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि का बहुत महत्व है. इस अमावस्या तिथि को 'मौनी' कहने के पीछे यह मान्यता है कि इसी पावन तिथि पर मनु ऋषि का जन्म हुआ था और मनु शब्द से इस अमावस्या को मौनी अमावस्या कहा जाने लगा.
यह तिथि हिंदू धर्म में अत्यंत पुण्यदायी मानी गई है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन मौन, स्नान, दान और ध्यान के माध्यम से व्यक्ति आत्मशुद्धि कर सकता है. खासतौर पर इस अमावस्या पर संगम, गंगा, यमुना और अन्य पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व है. आइए जानते हैं मौनी अमावस्या पर्व की 5 खास बातें.
मौनी अमावस्या का क्यों है इतना महत्व
शास्त्रों के अनुसार माघ मास स्वयं में ही पुण्यदायक होता है और जब इसमें अमावस्या का योग बनता है, तब इसका फल कई गुना बढ़ जाता है. पुराणों में उल्लेख है कि मौनी अमावस्या के दिन मौन व्रत रखकर भगवान विष्णु और शिव की पूजा करने से मनुष्य को जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति मिलती है. यह तिथि तप, त्याग और संयम का प्रतीक मानी गई है.
क्यों रखा जाता है यह व्रत?
इस अमावस्या को मौनी इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस दिन मौन व्रत का विशेष महत्व है. मान्यता है कि मौन रखने से मन की चंचलता शांत होती है और आत्मा की आवाज सुनाई देती है. ऋषि-मुनि मौन को आत्मज्ञान का साधन मानते थे. आज के शोर-शराबे भरे जीवन में यह व्रत व्यक्ति को मानसिक शांति और संतुलन प्रदान करता है.
माघ स्नान और पवित्र नदियों का महत्व
मौनी अमावस्या पर पवित्र नदियों में स्नान करने का विशेष फल बताया गया है. प्रयागराज संगम में इस दिन लाखों श्रद्धालु स्नान करते हैं. मान्यता है कि इस दिन स्नान करने से अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य प्राप्त होता है. स्नान के पश्चात सूर्य देव को अर्घ्य देना और भगवान विष्णु का स्मरण करना अत्यंत शुभ माना गया है.
दान-पुण्य और पितृ तर्पण का फल
मौनी अमावस्या पर किया गया दान विशेष फलदायी होता है. तिल, कंबल, अन्न, वस्त्र और घी का दान करने से दरिद्रता दूर होती है. इस दिन पितरों का तर्पण करने से वे प्रसन्न होते हैं और परिवार पर आशीर्वाद बनाए रखते हैं. अमावस्या तिथि पितृ कर्म के लिए विशेष मानी जाती है.
मौनी अमावस्या की सीख
मौनी अमावस्या हमें सिखाती है कि कभी-कभी शब्दों से दूर रहकर भी जीवन को समझा जा सकता है. संयम, संतोष और आत्मचिंतन ही सच्ची साधना है. यह पर्व बाहरी आडंबर से हटकर आंतरिक शुद्धता की ओर ले जाता है और जीवन को सकारात्मक दिशा प्रदान करता है.