बदमाश लड़कों पर क्‍यों फिदा होती हैं लड़कियां, सीमा आनंद ने क्‍या बताया?

प्यार के मामले में एक सवाल सदियों से लोगों को उलझाता आया है कि आखिर क्यों कई लड़कियां पहले “बैड बॉय” की तरफ अट्रैक्ट होती हैं और आखिरकार जाकर “ग्रीन फ्लैग” लड़कों के साथ जिंदगी बसाती हैं? इसी दिलचस्प मुद्दे पर हाल ही में पॉडकास्ट में सीमा आनंद से सवाल पूछा गया.;

( Image Source:  AI SORA )
Edited By :  हेमा पंत
Updated On : 16 Jan 2026 11:54 AM IST

प्यार के मामले में दिल अक्सर दिमाग की छुट्टी कर देता है. तभी तो सवाल उठता है कि आखिर लड़कियां उन लड़कों पर क्यों फिदा हो जाती हैं, जिन पर घरवाले, दोस्त और समाज पहले से ही “बदमाश” का ठप्पा लगा चुके होते हैं. वो लड़के जिनका एटीट्यूड खतरनाक लगता है, बातों में कॉन्फिडेंस टपकता है और जिनके साथ रहकर लगता है कि लाइफ किसी फिल्म की तरह चल रही है. शुरुआत में यही रोमांच दिल को भा जाता है और लगता है कि इससे बेहतर, इससे अलग कोई हो ही नहीं सकता.

लेकिन बाद में ऐसे लड़कों के साथ रहना मुहाल हो जाता है. क्या यह सिर्फ अट्रैक्शन का खेल है या इसके पीछे कोई गहरी मनोवैज्ञानिक वजह छुपी है? इसी दिलचस्प सवाल पर पॉडकास्ट में सीमा आनंद ने खुलकर बात की. उन्होंने बताया कि बैड बॉयज की तरफ क्यों अट्रैक्ट होती हैं लड़कियां.

लड़कियों को क्यों भाते हैं बैड बॉयज?

सीमा आनंद का मानना है कि महिलाओं के लिए यह समझना बेहद जरूरी होता है कि टॉक्सिक मर्द आखिर होते कैसे हैं. जब तक कोई लड़की खुद ऐसे रिश्ते से नहीं गुजरती, तब तक उसे यह एहसास नहीं होता कि किन आदतों से दूरी बनानी चाहिए. टॉक्सिक रिश्ते एक तरह से सबक बनते हैं, ताकि भविष्य में सही इंसान की कद्र की जा सके.

बैड बॉय का अट्रैक्शन आखिर आता कहां से है?

हम में से ज्यादातर लोग मानते हैं कि बदमाश लड़कों में एक अलग ही कॉन्फिडेंस और चार्म होता है. शुरुआत में उनका अंदाज, बोलने का तरीका और बेपरवाह स्वभाव बेहद आकर्षक लगता है. कई बार हमें लगता है कि “वह अंदर से अच्छा इंसान है”, बस थोड़ा गलत समझा गया है.

जब प्यार में दिखने लगती हैं खामियां

बैड बॉयज के साथ रहते हुए समय के साथ तस्वीर बदलने लगती है. वही इंसान, जो कभी कूल लगता था, अब बेइज्जती करने लगता है. प्यार ऑब्सेशन में बदल जाता है और आत्मविश्वास घमंड का रूप ले लेता है. यहीं से समझ आने लगता है कि यह रिश्ता आपको जोड़ नहीं रहा, बल्कि तोड़ रहा है.

चेहरा नहीं, रिस्पेक्ट है असली कनेक्शन

पॉडकास्ट में यह भी कहा गया कि शुरुआत में अक्सर चेहरा और आकर्षण दिल जीत लेता है, लेकिन असली रिश्ता रिस्पेक्ट पर टिकता है. रिस्पेक्ट की अहमियत समझने में थोड़ा वक्त जरूर लगता है, लेकिन जब समझ आ जाती है, तो प्राथमिकताएं खुद-ब-खुद बदल जाती हैं.

आखिर में क्यों चुनती हैं ग्रीन फ्लैग?

सीमा आनंद ने बताया कि जब लड़कियां टॉक्सिक रिश्तों से बाहर निकलती हैं, तब उन्हें एहसास होता है कि स्थिरता, इज्जत और इमोशनल सिक्योरिटी कितनी जरूरी है. तभी ग्रीन फ्लैग लड़के, जो शांत, समझदार और सम्मान देने वाले होते हैं, असली पार्टनर नजर आने लगते हैं.

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