क्यों बढ़ते जा रहे है चिकन के दाम? 300 से 325 पहुंचा रेट, देसी मुर्गी 800 पार

हैदराबाद में चिकन की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है, जहां skinless चिकन 325 रुपये किलो तक पहुंच गया है. गर्मी और सप्लाई की कमी के चलते आने वाले दिनों में कीमतें 400 रुपये किलो तक जा सकती हैं.

( Image Source:  ANI )
Edited By :  रूपाली राय
Updated On : 17 March 2026 10:16 AM IST

हाल के दिनों में हैदराबाद और आसपास के इलाकों में चिकन की कीमतों में बहुत तेज़ी से इज़ाफ़ा देखने को मिल रहा है. यह बढ़ोतरी इतनी तेज़ है कि आम उपभोक्ता भी हैरान हैं और बाज़ार में जा कर लोगों के चेहरे पर परेशानी साफ़ नज़र आ रही है. पहले जहां बिना चमड़ी वाला चिकन (skinless chicken) लगभग 300 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास बिक रहा था, वहीं अब यह कीमत 325 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच चुकी है. वहीं देसी मुर्गी (country chicken) की बात करें तो उसकी कीमत 750 से 800 रुपये प्रति किलोग्राम के बीच पहुंच गई है, जो पहले से काफ़ी ज़्यादा है. पिछले चार-पांच दिनों से लगातार कीमतें ऊपर जा रही हैं और ऐसा लग रहा है कि यह सिलसिला अभी रुकने वाला नहीं है.

व्यापारियों और पोल्ट्री उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि इस बार भीषण गर्मी ने सबसे बड़ा खेल बिगाड़ दिया है. मार्च का महीना चल रहा है और तापमान लगातार बढ़ रहा है. ऐसे में पोल्ट्री फार्मों पर मुर्गियों की सेहत पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है. उच्च तापमान की वजह से फार्मों में और भंडारण स्थलों पर कई मुर्गियां मर गई हैं. इससे बाज़ार में आने वाला स्टॉक यानी उपलब्ध चिकन की मात्रा बहुत कम हो गई है. सप्लाई में इतनी बड़ी कमी आ गई है कि मांग जितनी है, उसके मुकाबले चिकन बहुत कम पहुंच रहा है.

क्यों ख़त्म हो रहा है स्टॉक?

इसके अलावा एक और वजह भी सामने आ रही है. पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश के खरीदार अब हैदराबाद, शमशाबाद, शादनगर और महबूबनगर के आसपास के फार्मों से बड़ी-बड़ी मात्रा में मुर्गियां खरीद रहे हैं. थोक में यह खरीदारी हो रही है, जिससे हैदराबाद शहर के बाज़ारों में चिकन की इनकमिंग और भी कम हो गई है. थोक व्यापारी और छोटे रिटेलर आमतौर पर 7 से 10 दिनों का स्टॉक रखते हैं, लेकिन अब फार्मों से ही मुर्गियां कम मिल रही हैं, तो स्टॉक खत्म होने में देर नहीं लग रही.

10,000 टन चिकन की बिक्री

हैदराबाद में सामान्य दिनों में ग्रेटर हैदराबाद क्षेत्र में रोज़ाना करीब 10,000 टन चिकन की बिक्री होती है. लेकिन त्योहारों जैसे दशहरा, दीपावली, संक्रांति या रमज़ान के समय यह खपत बढ़कर 15,000 से 16,000 टन तक पहुंच जाती है. अभी हालांकि कोई बड़ा त्योहार नहीं है, लेकिन मांग फिर भी स्थिर और मजबूत बनी हुई है. रविवार जैसे दिनों में तो मांसाहारी लोग खूब बाज़ारों में उमड़ते हैं और चिकन की डिमांड और बढ़ जाती है. कीमतें बढ़ने के बावजूद लोग चिकन खरीद रहे हैं. पहले 300 रुपये के आसपास था, अब 25 से 40 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी हो चुकी है. उपभोक्ताओं पर यह आर्थिक बोझ बढ़ रहा है, लेकिन मांग में अभी कोई खास कमी नहीं दिख रही.

चिकेन महंगा अंडे सस्ते

कुछ लोग अब मछली या दूसरी चीज़ों की तरफ मुड़ रहे हैं, लेकिन कुल मिलाकर चिकन की डिमांड बनी हुई है. दूसरी तरफ अच्छी खबर यह है कि अंडों की कीमतों में थोड़ी राहत मिली है. हैदराबाद में एक दर्जन अंडे अभी लगभग 64 रुपये में मिल रहे हैं और पिछले कुछ दिनों में इनकी कीमत में हल्की गिरावट आई है.

आगे क्या होगा?

पोल्ट्री उद्योग के जानकारों का कहना है कि आने वाले हफ्तों में तापमान और भी बढ़ सकता है. अगर गर्मी का यह प्रकोप जारी रहा और फार्मों में मुर्गियों की मौत का सिलसिला नहीं रुका, तो आपूर्ति और कम होगी. ऐसे में व्यापारियों का अनुमान है कि चिकन की कीमतें 400 रुपये प्रति किलोग्राम तक भी जा सकती हैं. फिलहाल स्थिति यह है कि बढ़ती कीमतों से उपभोक्ता परेशान तो हैं, लेकिन बाज़ार में चिकन की मांग अभी भी कायम है. लोग उम्मीद कर रहे हैं कि मौसम ठंडा होने पर या आपूर्ति बढ़ने पर कीमतें कुछ संभलेंगी. लेकिन अभी तो गर्मी के साथ-साथ चिकन की कीमतों का पारा भी चढ़ता ही जा रहा है. 

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