टैटू का शौक पड़ सकता है भारी, इंक के कारण कैंसर का खतरा, जानें क्या कहती है स्टडी
आजकल टैटू बनवाना युवाओं के बीच एक फैशन और स्टाइल स्टेटमेंट बन चुका है. लोग अपनी भावनाओं, सोच और पहचान को टैटू के जरिए शरीर पर उकेर रहे हैं. लेकिन इस ट्रेंड के पीछे छिपे सेहत से जुड़े खतरे अब सामने आने लगे हैं. जर्मन इंस्टिट्यूट की एक हालिया स्टडी ने टैटू की इंक को लेकर गंभीर चिंता जताई है.;
आजकल टैटू सिर्फ फैशन या ट्रेंड नहीं, बल्कि खुद को एक्सप्रेस करने का एक जरिया बन चुका है. यंगस्टर्स में टैटू का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपकी स्किन पर हमेशा के लिए उकेरी जाने वाली यह स्याही आपके शरीर के अंदर क्या असर डाल सकती है?
जर्मन इंस्टीट्यूट की एक रिसर्च टैटू को लेकर कुछ गंभीर सवाल खड़े करती है, जिन्हें नजरअंदाज करना सही नहीं होगा. स्टडी के मुताबिक टैटू की इंक से कैंसर हो सकता है. चलिए जानते हैं इससे बचाव के तरीके.
कैसे शरीर पर असर डालती है टैटू की इंक?
रिसर्च के मुताबिक, टैटू की स्याही का एक बड़ा हिस्सा समय के साथ शरीर से बाहर निकल जाता है, लेकिन करीब 20 प्रतिशत स्याही शरीर के अंदर ही रह जाती है. इस इंक में मौजूद हार्ड और माइक्रो पार्टिकल्स खून के जरिए लिंफेटिक सिस्टम तक पहुंच सकते हैं. ये कण खासतौर पर लिंफ नोड्स या लिंफ ग्लैंड्स में जमा हो सकते हैं, जो हमारी इम्यून सिस्टम का अहम हिस्सा होते हैं.
हो सकता है कैंसर
करीब 12 हजार लोगों पर की गई स्टडी में यह पाया गया कि टैटू बनवाने वाले लोगों में लिंफोमा (लिंफ सिस्टम से जुड़ा कैंसर) का खतरा थोड़ा ज्यादा देखा गया. हालांकि यह एक ऑब्जर्वेशनल स्टडी थी, यानी इसमें सीधे तौर पर यह साबित नहीं हुआ कि टैटू ही कैंसर की वजह बनता है. फिर भी, यह साइन जरूर मिलता है कि टैटू और लिंफ सिस्टम के बीच कोई कनेक्शन हो सकता है.
इंफेक्शन से बचने का तरीका
आजकल टैटू बनवाते समय दस्ताने, डिसइंफेक्टेंट और साफ-सफाई का खास ध्यान रखा जाता है. इसके बावजूद, कई लोगों को टैटू की स्याही से एलर्जी, सूजन या स्किन रिएक्शन हो सकता है. खासतौर पर सेंसिटिव वाले लोगों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है.
यूरोपीय संघ के सख्त नियम
संभावित खतरों को देखते हुए यूरोपीय संघ ने टैटू की स्याही में इस्तेमाल होने वाले करीब 4 हजार केमिकल्स पर बैन लगा दिया है. इसके साथ ही टैटू आर्टिस्ट्स के लिए सख्त हाइजीन नियम लागू किए गए हैं. अब सुईयों का दोबारा इस्तेमाल नहीं किया जा सकता और डिस्पोजेबल नीडल्स का इस्तेमाल जरूरी हो गया है, जिससे इंफेक्शन का खतरा कम हो सके.
टैटू का बढ़ता चलन
जर्मनी में करीब 25 फीसदी लोगों ने टैटू बनवाया है, जिनमें बड़ी संख्या 30 साल से कम उम्र के युवाओं की है. यह आंकड़ा दिखाता है कि टैटू का चलन कितना तेजी से बढ़ रहा है. टैटू बनवाना पूरी तरह गलत नहीं है, लेकिन बिना जानकारी और सावधानी के लिया गया फैसला नुकसानदेह हो सकता है. अगर आप भी टैटू के शौकीन हैं, तो स्याही की क्वालिटी, हाइजीन और संभावित हेल्थ रिस्क्स को जरूर समझें. खूबसूरती के साथ सेहत से समझौता करना समझदारी नहीं है.