न घर न गाड़ी, पहनती हैं तांत की साड़ी और 150 की चप्पल, कुछ ऐसा है ममता बनर्जी का रुआब
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपनी सादगी भरी लाइफस्टाइल और सफेद सूती साड़ी के लिए जानी जाती हैं. काला, नीला या हरा पतला बॉर्डर वाली उनकी साड़ी अब 'ममता साड़ी' के नाम से मशहूर हो चुकी है, जो हुगली जिले की धनियाखाली हैंडलूम से आती है और GI टैग प्राप्त है. खास बात यह है कि ममता दी अपनी साड़ियों का डिजाइन खुद तय करती हैं.;
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ममता बनर्जी जिन्हें लोग प्यार से ममता दी या दीदी कहते हैं, उनकी पहचान हमेशा एक जैसी ही रही है सफेद सूती साड़ी और हवाई चप्पल. राजनीति में ममता ऐसी महिला हैं जिन्हें सिर्फ सिंपल लाइफस्टाइल अपनाने के लिए जाना जाता है. उनके चेहरे पर कभी मेकअप तक भी नहीं देखा गया. ममता की ये खास सफेद साड़ी, जिसमें काला, नीला, हरा या कोई एक रंग का पतला बॉर्डर होता है, अब पूरी तरह उनकी ब्रांडिंग बन चुकी है. ये साड़ी न सिर्फ उन्हें पॉपुलर बनाती है, बल्कि बंगाल की आम महिलाओं की पारंपरिक पोशाक का भी प्रतीक है.
ये सफेद साड़ियां धनियाखाली (Dhaniakhali) नाम के इलाके से आती हैं. पश्चिम बंगाल के हुगली जिले में स्थित एक छोटा सा इलाका है, जो अपनी हैंडलूम यानी हाथ से बुनी जाने वाली तांत साड़ियों के लिए बहुत मशहूर है. यहां के बुनकर पीढ़ियों से ये कला संभालते आ रहे हैं. धनियाखाली साड़ी को 2011 में GI टैग (भौगोलिक संकेतक) भी मिल चुका है, यानी ये खास बंगाल की ही है. इन साड़ियों की सबसे बड़ी खासियत ये है कि ये बहुत हल्की, आरामदायक और सांस लेने वाली होती हैं. बंगाल का चिपचिपा और गर्म मौसम होने के बावजूद ये पहनने में बहुत सुकून देती हैं. एक साड़ी को हाथ से पूरा बुनने में आमतौर पर 2 से 3 दिन लग जाते हैं.
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बहुत कम लोग जानते होंगे कि ममता दी सिर्फ साड़ी पहनती नहीं, बल्कि इनके डिजाइन खुद तय करती हैं. वो एक खास बुनकर या कोऑपरेटिव से ऑर्डर देती हैं. उनकी पसंद होती है पूरी सफेद साड़ी पर पतली-पतली धारियां (स्ट्राइप्स), और बॉर्डर काफी पतला और एक ही रंग का. साड़ी के अलावा उनके पैरों में गौर किया गया हो तो वह फेंसी फुटवियर के बजाए रबर की चप्पल पहनती है. जिसकी कीमत महज 150 से 250 हो सकती है.
वो लाल या गहरा क्रिमसन रंग बिल्कुल पसंद नहीं करतीं साथ ही, वो साड़ी को सामान्य से थोड़ा लंबा ऑर्डर करती हैं यानी तेरह हाथ (लगभग 6 मीटर) की, जबकि आम साड़ियां बारह हाथ (5.5 मीटर) की होती हैं. इन साड़ियों की कीमत बहुत ही साधारण होती है- 350 से 400 रुपये के आसपास. लेकिन अब इन्हें लोग 'ममता साड़ी' कहकर पुकारते हैं और ये काफी पॉपुलर हो चुकी हैं.
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ममता दी के बचपन में परिवार को काफी आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा था. पिता की जल्दी मौत हो गई थी इसी वजह से उन्होंने कभी ज्यादा कपड़े जमा करने या लग्जरी की आदत नहीं डाली. उनके पास बस जरूरत जितने ही कपड़े होते हैं. वो पेंटर भी हैं और समय मिलने पर खूबसूरत पेंटिंग बनाती हैं, जो काफी महंगी बिकती हैं. लेकिन खुद वो हमेशा इसी सादगी वाली साड़ी और हवाई चप्पल में राज्य के लंबे-लंबे दौरे करती हैं, रैलियां करती हैं और काम संभालती हैं.
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ममता के हाथों पर कोई चूड़ी-कंगन नहीं हमेशा से घड़ी देखी गई है. कोई स्पष्ट या विश्वसनीय जानकारी उपलब्ध नहीं है कि वे किस खास ब्रांड की घड़ी पहनती हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, वह उनकी कलाई पर घड़ी दिखती भी है, तो वह साधारण, बेसिक एनालॉग या कैजुअल टाइप की लगती है- जैसे भारतीय ब्रांड्स Titan, Sonata या Fastrack जैसी आम और अफोर्डेबल वाली. लेकिन पिछले कुछ समय से उनकी कलाई पर जो वॉच देखी गई है वह फिटबिट ब्रांड की मालुम होती है.
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ममता बनर्जी, जो 5 जनवरी 1955 को कोलकाता के एक बहुत साधारण परिवार में पैदा हुईं, ने अपने चुनावी हलफनामे (शपथ-पत्र) में साफ बताया है कि उनके पास खुद का कोई घर या कार नहीं है. 2025 में छपे इकोनॉमिक्स टाइम्स के मुताबिक, उनकी कुल चल संपत्ति (मूवेबल एसेट्स) सिर्फ 30.45 लाख रुपये की है (यह 2016 के हलफनामे के अनुसार है, बाद में 2021 में यह घटकर लगभग 16.72 लाख हो गई थी). उनके पास कुल तीन बैंक खाते हैं: दो बचत खाते और एक खास चुनाव खर्च के लिए खोला गया खाता (जिसमें से एक दिल्ली में है). उनके पास एक मल्टी जिम मशीन है, जिसकी कीमत 2 लाख 15 हजार रुपये है. इसके अलावा, उनके पास 9.75 ग्राम सोने के गहने हैं.