LPG vs Induction: गैस सिलेंडर महंगा पड़ रहा है? जानिए इंडक्शन पर खाना बनाना कितना सस्ता
एलपीजी सिलेंडर की कीमत बढ़ने और सप्लाई को लेकर चिंता के बीच लोग इंडक्शन कुकटॉप की तरफ तेजी से शिफ्ट हो रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक बिजली से खाना पकाने पर हर सिलेंडर के बराबर करीब 200-300 रुपये तक की बचत हो सकती है.
पिछले कई दशकों से भारतीय सरकार ने घरों में खाना पकाने के लिए एलपीजी सिलेंडर का इस्तेमाल बढ़ाने के लिए कई योजनाएं चलाई हैं. जैसे उज्ज्वला योजना आदि से गरीब परिवारों को सस्ते में सिलेंडर मिले और धुएं से मुक्ति मिली. लेकिन हाल ही में अमेरिका, ईरान और इजराइल के बीच चल रहे तनाव और युद्ध जैसी स्थिति के कारण दुनिया भर में गैस की कीमतें बढ़ गई हैं. भारत में भी एलपीजी की सप्लाई पर असर पड़ा है और लोग अब डर रहे हैं कि सिलेंडर महंगे हो जाएंगे या उपलब्धता कम हो जाएगी. इस वजह से बहुत से परिवार अब एलपीजी के अलावा खाना पकाने के दूसरे तरीकों की तलाश में लग गए हैं.
बाजार में कई विकल्प हैं जैसे:
- इलेक्ट्रिक प्रेशर कुकर
- सोलर कुकर (सूरज की रोशनी से चलने वाला)
- बायोगैस प्लांट (गोबर गैस)
- एयर फ्रायर
- माइक्रोवेव ओवन
इन सबमें से इंडक्शन कुकटॉप (इंडक्शन चूल्हा) सबसे ज्यादा पॉपुलर हो गया है. लोग इसे इसलिए पसंद कर रहे हैं क्योंकि:
- यह बहुत तेजी से खाना पकाता है
- बिजली की बचत करता है
- रसोई साफ-सुथरी रहती है, कोई धुआं या कालिख नहीं
- बच्चों और घर में सुरक्षा के लिहाज से भी बेहतर (गैस लीक का खतरा नहीं, आग लगने का कम जोखिम)
अब सवाल यह है कि एलपीजी से खाना पकाना सस्ता है या इंडक्शन से?
'द हिंदू' अखबार की एक रिपोर्ट के अनुसार, एलपीजी में खाना पकाने की क्षमता कम होती है. गैस की लौ से लगभग 60% गर्मी हवा में बेकार चली जाती है यानी जो पैसा आप गैस पर देते हैं, उसका सिर्फ 40% हिस्सा ही असल में खाने को गर्म करने में काम आता है. अभी दिल्ली में एक सामान्य 14.2 किलोग्राम का गैर-सब्सिडी वाला एलपीजी सिलेंडर लगभग 913 रुपये का है. मार्च 2026 के हिसाब से, हाल ही में 60 रुपये की बढ़ोतरी हुई है. दूसरी तरफ, इंडक्शन कुकटॉप की क्षमता करीब 90% तक होती है. इसमें गर्मी सीधे बर्तन के अंदर बनती है, हवा गर्म नहीं होती, इसलिए बर्बादी बहुत कम होती है. एक पूरा एलपीजी सिलेंडर जितनी उपयोगी गर्मी देता है, उतनी ही गर्मी पैदा करने के लिए इंडक्शन को लगभग 78 यूनिट बिजली चाहिए. अगर बिजली का रेट 8 रुपये प्रति यूनिट मानें जो दिल्ली में ऊपरी स्लैब में हो सकता है, तो कुल खर्च लगभग 624 रुपये आएगा. यानी एलपीजी की तुलना में हर सिलेंडर पर करीब 289 रुपये (913 - 624) की बचत हो सकती है. अगर महीने में 2-3 सिलेंडर लगते हैं, तो महीने में 500-900 रुपये तक बचत हो सकती है.
किस बात का रखें ध्यान?
दिल्ली में बिजली के रेट स्लैब के हिसाब से बढ़ते हैं. अगर आपका कुल बिजली इस्तेमाल ज्यादा हो गया जैसे- 800-1200 यूनिट से ऊपर, तो प्रति यूनिट रेट 7-8 रुपये तक पहुंच जाता है. ऐसे में बचत थोड़ी कम हो सकती है. कुछ राज्यों में पहले 100-200 यूनिट मुफ्त या बहुत सस्ती होती है, वहां इंडक्शन और भी सस्ता पड़ता है. शुरुआत में इंडक्शन पर स्विच करने का खर्चा भी लगता है:
एक अच्छा इंडक्शन कुकटॉप 2000 से 4000 रुपये में मिल जाता है (मध्यम दर्जे के गैस स्टोव जितना ही).
इंडक्शन के लिए खास बर्तन चाहिए- स्टेनलेस स्टील या कास्ट आयरन के, जिनका तला सपाट और चुंबकीय हो. पुराने बर्तन काम नहीं करेंगे. पूरा सेट लेने में 3000-8000 रुपये तक लग सकते हैं.
कुल मिलाकर शुरुआती निवेश 5000-12000 रुपये तक हो सकता है. लेकिन रोजाना चलने वाली कम लागत की वजह से ज्यादातर परिवार 8-12 महीनों में यह पैसा वसूल कर लेते हैं. उसके बाद हर महीने बचत होती रहती है.
फायदे और भी हैं:
- रसोई ठंडी रहती है
- साफ करना आसान, कोई काला धब्बा नहीं
- ज्यादा वेंटिलेशन या चिमनी की जरूरत नहीं
लेकिन सबके लिए इंडक्शन ठीक नहीं होता. खासकर रेस्तरां, होटल और बड़े कैटरिंग वाले जगहों पर अभी भी एलपीजी ज्यादा सुविधाजनक है. वहां बड़े-बड़े बर्नर और इंडक्शन वाले उपकरण खरीदने में 3-4 लाख रुपये तक खर्चा आ सकता है, जो गैस सिस्टम से 2-3 गुना ज्यादा है. साथ ही बिजली कटने पर काम रुक जाता है, जबकि गैस बैकअप के साथ चल सकती है इसलिए व्यावसायिक जगहों पर एलपीजी अभी भी भरोसेमंद विकल्प है.