बच्चे की नींद को लेकर हैं परेशान? जान लीजिए किस उम्र में कितना सोना है जरूरी
बच्चों की सही नींद उनके शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बेहद जरूरी है. हर उम्र में उनकी नींद की जरूरत अलग होती है.
अक्सर माता-पिता इस बात को लेकर परेशान रहते हैं कि उनका बच्चा ठीक से सो रहा है या नहीं. कोई बच्चा रात में बार-बार जाग जाता है, तो कोई दिन में ही ज्यादा सोता रहता है. ऐसे में कई पैरेंट्स के मन में सवाल आता है कि आखिर किस उम्र में बच्चे को कितनी नींद की जरूरत होती है.
दरअसल, बच्चों की नींद उनकी उम्र के साथ बदलती रहती है. शुरुआती महीनों में उन्हें काफी ज्यादा नींद चाहिए होती है, लेकिन जैसे-जैसे वे बड़े होते हैं, सोने का समय धीरे-धीरे कम होने लगता है. बच्चों के सही विकास के लिए पर्याप्त नींद बेहद जरूरी होती है. इसलिए यह समझना जरूरी है कि अलग-अलग उम्र में बच्चे को कितने घंटे सोना चाहिए.
बच्चों के लिए नींद क्यों है इतनी जरूरी?
clevelandclinic में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, पर्याप्त नींद बच्चों के फिजिकल और मेंटल डेवलेपमेंट के लिए बेहद जरूरी होती है. जिन बच्चों को पर्याप्त नींद मिलती है, उनमें कई पॉजिटिव बदलाव देखने को मिलते हैं, जैसे-
- ध्यान लगाने की क्षमता बेहतर होती है
- बिहेवियर में सुधार होता है
- पढ़ाई और सीखने की क्षमता बढ़ती है
- याददाश्त मजबूत होती है
- भावनाओं को कंट्रोल करने में मदद मिलती है
- मेंटल और फिजिकल हेल्थ बेहतर रहती है
- लाइफ क्वालिटी अच्छी होती है
डॉक्टरों का कहना है कि नींद बच्चों के लिए किसी दवा से कम नहीं है. यह प्राकृतिक तरीके से शरीर और दिमाग को हेल्दी रखने में मदद करती है.
नवजात शिशु को कितना सोना चाहिए?
जन्म के बाद शुरुआती महीनों में बच्चों का कोई तय स्लीप शेड्यूल नहीं होता. वे आमतौर पर सोते हैं, उठते हैं, दूध पीते हैं और फिर सो जाते हैं. इस उम्र में बच्चे दिन और रात का फर्क ठीक से नहीं समझ पाते हैं.इस समय बच्चे के दिमाग में सर्कैडियन रिदम यानी दिन-रात का प्राकृतिक चक्र पूरी तरह विकसित नहीं होता. आमतौर पर 3 से 6 महीने के बीच बच्चे दिन और रात के बीच अंतर समझना शुरू करते हैं. इस उम्र में बच्चों की नींद दिन और रात में अलग-अलग समय पर बंटी होती है, इसलिए उनके लिए कोई सख्त समय तय नहीं होता. लेकिन एवरेज टाइम 11 से 17 घंटे है.
4 से 12 महीने के बच्चे के लिए नींद
4 महीने के बाद बच्चों में धीरे-धीरे दिन और रात का रूटीन बनने लगता है. इस समय से माता-पिता बच्चे को नियमित सोने की आदत सिखा सकते हैं. इस उम्र के बच्चे आमतौर पर रात में 6 से 8 घंटे तक सो सकते हैं. बाकी नींद दिन में झपकी लेकर पूरी करते हैं. यानी 12 से 16 घंटे सोना चाहिए. कुछ बच्चे दिन में एक बार सोते हैं, तो कुछ दो या तीन बार झपकी लेते हैं. यह सामान्य है, बस यह जरूरी है कि कुल मिलाकर उनकी नींद पूरी हो. करीब 6 से 12 महीने की उम्र में अधिकांश बच्चों को रात में दूध पिलाने की जरूरत भी कम हो जाती है, अगर वे पूरी तरह हेल्दी हों.
टॉडलर (1 से 2 साल)
जब बच्चा चलना और बोलना शुरू करता है, तब उसकी नींद का पैटर्न भी बदलने लगता है. इस उम्र में बच्चे आमतौर पर रात में ज्यादा देर तक सोते हैं और दिन में सिर्फ एक बार झपकी लेते हैं. टॉडलर को कम से कम 11 से 14 घंटे की नींद लेनी चाहिए. इस समय बच्चों के लिए रूटीन बनाना बहुत जरूरी होता है. रोज एक ही समय पर सोना, शांत माहौल और सोने से पहले एक निश्चित दिनचर्या बच्चे को अच्छी नींद लेने में मदद करती है.
3 से 5 साल के बच्चे के लिए कितनी नींद जरूरी?
3 से 5 साल की उम्र तक आते-आते कई बच्चे दिन की झपकी छोड़ने लगते हैं और ज्यादातर नींद रात में ही पूरी करते हैं. लेकिन 10 से 13 घंटे की नींद जरूरी होती है. हालांकि यह बदलाव धीरे-धीरे होता है. कुछ बच्चे एक-दो दिन झपकी लेते हैं और कुछ दिन नहीं लेते. ऐसे में दोपहर में थोड़ा आराम या शांत समय देना अच्छा ऑप्शन हो सकता है. अगर बच्चा दिन में सोना छोड़ देता है, तो उसकी रात की नींद पूरी करने के लिए सोने का समय थोड़ा जल्दी करना फायदेमंद हो सकता है.
6 से 12 साल के बच्चों को कितना सोना चाहिए?
जब बच्चे स्कूल जाने लगते हैं, तब उनके लिए पर्याप्त नींद और भी जरूरी हो जाती है. 9 से 12 घंटे सोना चाहिए.अच्छी नींद लेने से बच्चे क्लास में बेहतर ध्यान लगा पाते हैं और पढ़ाई में अच्छा परफॉर्म करते हैं.जिन बच्चों को पर्याप्त नींद नहीं मिलती, उन्हें अक्सर ध्यान लगाने, बिहेवियर कंट्रोल करने और पढ़ाई समझने में कठिनाई हो सकती है. इसके अलावा कम नींद होने पर बच्चे खेलकूद और दूसरी एक्टिविटीज में भी पीछे रह सकते हैं.
अडल्ट बच्चों के लिए नींद
अक्सर लोगों को लगता है कि किशोरों को ज्यादा नींद की जरूरत नहीं होती, लेकिन सच इसके उलट है. इस उम्र में भी शरीर और दिमाग तेजी से विकसित होते हैं, इसलिए पर्याप्त नींद जरूरी है. यानी अडल्ट को कम से कम 8 से 10 घंटे की नींद पूरी करनी चाहिए. हालांकि पढ़ाई, सोशल लाइफ, मोबाइल और अन्य गतिविधियों के कारण कई किशोर नींद की कमी का सामना करते हैं.