फिर Gen Z ने गढ़ दी प्यार की नई परिभाषा, अब साल 2026 में करेगी Intentional Dating, जानें क्या है ये नया माजरा

डेटिंग का मतलब अब सिर्फ टाइमपास या कैज़ुअल बातचीत नहीं रह गया है. 2026 में Gen Z ने प्यार की नई परिभाषा गढ़ दी है, जिसे Intentional Dating का नाम दिया गया है. हां हमें पता है कि अभी आप ब्रेडक्रंबिंग और बेंचिंग से उबरे भी नहीं थे कि ये नया माजरा सामने आ गया है, तो परेशान न हो. इस बार यह जनरेशन अपने प्यार को लेकर काफी सीरियस है.;

( Image Source:  AI SORA )
Edited By :  हेमा पंत
Updated On : 12 Jan 2026 1:19 PM IST

डेटिंग ऐप्स पर स्वाइप करते-करते अगर आप भी थक चुके हैं, तो खुश हो जाइए, क्योंकि Gen Z ने प्यार की नई परिभाषा लिख दी है. साल 2026 में न “टाइमपास डेटिंग” चलेगी और न ही “चलो देखते हैं क्या होता है” वाला रवैया. अब ट्रेंड में है Intentional Dating, यानी सोच-समझकर, क्लियर इरादों के साथ प्यार करना.

Gen Z अब दिल लगाने से पहले दिमाग भी साथ रख रही है और यही इस नए माजरे की सबसे खास बात है. Gen Z का मानना है कि अगर समय और इमोशंस इन्वेस्ट करने हैं, तो सही इंसान के साथ ही क्यों न किया जाएं यही वजह है कि 2026 में प्यार थोड़ा कम कन्फ्यूजिंग और थोड़ा ज्यादा रियल होने वाला है. चलिए ऐसे में जानते हैं आखिर क्या है इंटेंशनल डेटिंग.

क्या है Intentional Dating?

Intentional Dating का मतलब है बिना घुमाए-फिराए अपनी फीलिंग्स, एक्सपेक्टेशंस और फ्यूचर प्लान्स साफ कहना. न घोस्टिंग, न सिचुएशनशिप का ड्रामा-सीधा सवाल, सीधा जवाब.

प्री-क्वालिफाइंग

2026 में “चलते-चलते देखेंगे” वाला फॉर्मूला काम नहीं कर रहा.अब लोग शुरुआत में ही अपने नॉन-नेगोशिएबल्स पर बात कर रहे है-जैसे आस्था, पॉलिटिकल सोच, पैसों को लेकर नजरिया, फैमिली प्लान और फ्यूचर की टाइमलाइन. लगभग आधे लोग ये बातें शुरुआती बातचीत में ही उठा रहे हैं, ताकि समय, पैसा और इमोशन्स तीनों बच सकें. 

क्या ROEmancing

अब रिश्तों को एक इमोशनल इन्वेस्टमेंट की तरह देखा जा रहा है. लोग यह समझना चाहते हैं कि उन्हें बदले में क्या मिल रहा है- स्टेबिलिटी, साफ बातचीत, सपोर्ट या सिर्फ टेंशन और कन्फ्यूजन. ज्यादातर लोग अपने रिश्तों में समय-समय पर चेक-इन कर रहे हैं, ताकि दोनों की जरूरतें पूरी हों और रिश्ता बैलेंस बना रहे.

कम्युनिटी कफिंग

डेटिंग अब सिर्फ ऐप्स तक सीमित नहीं रही. 2026 में लोग अपने आसपास की कम्युनिटी में ही रिश्ते तलाश रहे हैं. जैसे रनिंग ग्रुप्स, ब्रंच मीटअप्स, चर्च, क्रिएटिव ग्रुप्स. यानी जहां पहले से अपनापन है, वहीं से प्यार की शुरुआत हो रही है. एक सर्वे के अनुसार, 40% लोग अब शेयर कम्युनिटी स्पेस के जरिए डेट पर जा रहे हैं.

अब नहीं चलेगगी घोस्टलाइटिंग 

घोस्टलाइटिंग एक ऐसा बिहेवियर है, जिसमें कोई शख्स अचानक गायब हो जाता है और फिर वापस आकर ऐसे पेश आता है जैसे कुछ हुआ ही न हो. 2026 में इस ट्रेंड को पहचान लिया गया है और लोग इसे अब बर्दाश्त नहीं कर रहे. अगर कोई दोबारा एंट्री चाहता है, तो माफी, सफाई और लगातार सही बर्ताव जरूरी हो गया है. भरोसा अब आसानी से नहीं मिलता है .

डेटलिस्टिंग

अगर जिंदगी बहुत व्यस्त हो जाए, तो बिना बताए दूरी बनाना अब सही नहीं माना जा रहा.डेटलिस्टिंग का मतलब है कि अपनी अवेलेबिलिटी को लेकर साफ रहना और हल्के-फुल्के कॉन्टैक्ट में बने रहना. ज्यादातर लोग इस ईमानदारी की कद्र करते हैं और सही समय आने पर दोबारा जुड़ने के लिए तैयार रहते हैं.

क्या कहती है रिसर्च?

डेटिंग ऐप BLK के आंकड़ों के मुताबिक, 2026 में Dating Sunday पर मैचेस और मैसेजिंग दोनों में करीब 32% की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. इसका मतलब साफ है कि लोग सिर्फ मौजूद नहीं रहना चाहते, बल्कि सही तरीके से जुड़ना चाहते हैं.

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