Weather Update: अगस्त में होगी मूसलाधार बारिश या कमजोर पड़ेगा मानसून? IMD ने जारी किया अनुमान- 10 Points

IMD ने अगस्त 2026 में देशभर में सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान जताया है. मौसम विभाग के मुताबिक, अगस्त में बारिश दीर्घकालिक औसत की 94% से कम रह सकती है. इसकी बड़ी वजह प्रशांत महासागर में बना मध्यम स्तर का El Nino है. हालांकि कुछ इलाकों में सामान्य से ज्यादा बारिश हो सकती है.

( Image Source:  ANI )
Edited By :  अच्‍युत कुमार द्विवेदी
Updated On : 31 July 2026 7:28 PM IST

Weather Update August:  जुलाई में अच्छी बारिश के बाद अब अगस्त को लेकर मौसम विभाग ने चिंता बढ़ाने वाला पूर्वानुमान जारी किया है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, अगस्त 2026 में देशभर में बारिश सामान्य से कम रह सकती है. मौसम विभाग ने अनुमान लगाया है कि अगस्त में औसत बारिश दीर्घकालिक औसत (LPA) के 94 फीसदी से भी कम रह सकती है. अगस्त के लिए 1971-2020 के आंकड़ों के आधार पर सामान्य बारिश 254.9 मिमी मानी जाती है.

IMD का यह अनुमान ऐसे समय आया है, जब जुलाई में मानसून ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया. कई कम दबाव वाले क्षेत्र और मानसूनी सिस्टम बनने की वजह से जुलाई में बारिश करीब सामान्य स्तर तक पहुंची. इन मौसमी सिस्टम ने प्रशांत महासागर में बने El Nino के मानसून पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव को काफी हद तक कम किया.

 

मौसम विभाग ने मानसून को लेकर क्या कहा?

  1. मौसम विभाग का कहना है कि अगस्त में मानसून की स्थिति कमजोर हो सकती है. देश के ज्यादातर हिस्सों में सामान्य से कम बारिश का अनुमान है. इसका सीधा असर खेती, जलाशयों और पानी की उपलब्धता पर पड़ सकता है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां बारिश पर कृषि की निर्भरता ज्यादा है.
  2. पूरे देश के लिए बारिश का पूर्वानुमान भले ही कमजोर है, लेकिन सभी क्षेत्रों में स्थिति एक जैसी नहीं रहेगी. IMD के अनुसार, उत्तर-पश्चिम भारत, पूर्वोत्तर भारत, पूर्व-मध्य भारत और पूर्वी प्रायद्वीपीय क्षेत्र के कुछ हिस्सों में सामान्य से सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना है.
  3. इसके अलावा मानसून के बचे हुए समय यानी अगस्त और सितंबर के दौरान प्रायद्वीपीय भारत के कुछ हिस्सों, मध्य भारत, उत्तर-पश्चिम भारत के उत्तरी क्षेत्रों और पूर्वी एवं पूर्वोत्तर भारत में भी सामान्य से सामान्य से अधिक बारिश की संभावना जताई गई है.
  4. IMD ने सिर्फ अगस्त ही नहीं, बल्कि मानसून के दूसरे हिस्से को लेकर भी कमजोर पूर्वानुमान दिया है.  मौसम विभाग के मुताबिक, अगस्त और सितंबर को मिलाकर बारिश LPA के 94 फीसदी से कम रह सकती है. इन दोनों महीनों के दौरान सामान्य बारिश का औसत 422.8 मिमी है.
  5. इसका मतलब यह है कि जुलाई में मानसून की हुई रिकवरी के बावजूद पूरे मानसून सीजन की स्थिति अभी पूरी तरह सुरक्षित नहीं मानी जा सकती. आने वाले दो महीने देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं.
  6. मानसून के पूर्वानुमान में सबसे बड़ी भूमिका प्रशांत महासागर की समुद्री परिस्थितियों की है. IMD के मुताबिक, मध्यम स्तर का El Nino अगस्त तक बना रह सकता है और सितंबर में इसकी तीव्रता और बढ़ने की संभावना है. 
  7. दुनिया के कई जलवायु मॉडल भी संकेत दे रहे हैं कि प्रशांत महासागर में बना यह गर्म समुद्री घटनाक्रम 2027 की शुरुआत तक जारी रह सकता है. 
    El Nino
    की वजह से भारत में मानसूनी बारिश पर दबाव पड़ सकता है.
  8. हालांकि, मानसून के लिए पूरी तस्वीर नकारात्मक नहीं है. हिंद महासागर में Positive Indian Ocean Dipole (IOD) बनने की संभावना भी सामने आई है. कई अंतरराष्ट्रीय जलवायु मॉडल संकेत दे रहे हैं कि सितंबर तक Positive IOD विकसित हो सकता है. 
  9. आमतौर पर Positive IOD भारत में मानसूनी बारिश को बढ़ावा दे सकता है. ऐसे में अगर यह स्थिति बनती है तो यह El Nino के नकारात्मक प्रभाव को कुछ हद तक कम कर सकती है...  
    लेकिन यहां भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है.
  10. IMD के अपने Monsoon Mission Coupled Forecasting System (MMCFS) के मुताबिक, मानसून के बचे हुए समय में IOD की स्थिति ज्यादातर न्यूट्रल रह सकती है. इसलिए आने वाले हफ्तों में समुद्री परिस्थितियों में होने वाला बदलाव काफी अहम होगा.

मौसम विशेषज्ञों के लिए जुलाई का प्रदर्शन इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि El Nino के बावजूद मानसून ने उम्मीद से बेहतर वापसी की. कई कम दबाव वाले सिस्टम और डिप्रेशन ने बारिश को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई... लेकिन अब सवाल यह है कि क्या मानसून अगस्त और सितंबर में भी अपनी यह मजबूती बनाए रख पाएगा. अगर सितंबर में El Nino मजबूत होता है और Positive IOD पर्याप्त प्रभाव नहीं डाल पाता, तो मानसून के अंतिम चरण में बारिश पर दबाव बढ़ सकता है.

 

खेती और पानी की सुरक्षा के लिए अगले दो महीने अहम

मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, अब अगस्त और सितंबर भारत के मानसून के लिए निर्णायक महीने होंगे.  इन दो महीनों में होने वाली बारिश यह तय करने में अहम भूमिका निभाएगी कि जुलाई से पहले बना बारिश का घाटा कितना कम हो पाता है. कम बारिश का असर केवल मौसम तक सीमित नहीं रहेगा. इसका सीधा संबंध कृषि, जलाशयों में पानी के स्तर और देश की जल सुरक्षा से है. खासकर खरीफ फसलों के लिए मानसून के अंतिम चरण की बारिश बेहद महत्वपूर्ण होती है.

फिलहाल IMD के पूर्वानुमान में अगस्त के लिए देशव्यापी बारिश कमजोर रहने की संभावना है, लेकिन क्षेत्रीय स्तर पर तस्वीर अलग-अलग हो सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में El Nino और Indian Ocean Dipole (IOD) की स्थिति पर मौसम विशेषज्ञों की नजर रहेगी।

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