अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दौरे पर हैं. वहीं उनसे मुलाकात से पहले जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने साफ किया कि जम्मू-कश्मीर से जुड़े आंतरिक मुद्दों का समाधान अमेरिका नहीं, बल्कि भारत सरकार को करना होगा. श्रीनगर में बुधवार दोपहर होने वाली इस अहम मुलाकात को लेकर अब्दुल्ला ने कहा कि वह अमेरिकी राजदूत के सामने जम्मू-कश्मीर के आंतरिक मुद्दे नहीं उठाएंगे.

उमर अब्दुल्ला ने कहा "हमारी समस्याओं का समाधान वाशिंगटन से नहीं आएगा. हमारी समस्याओं का समाधान हमारी केंद्र सरकार को ही करना होगा." उन्होंने यह भी कहा कि वह बैठक में अमेरिकी राजदूत की बात सुनना चाहेंगे और देखेंगे कि चर्चा किस दिशा में आगे बढ़ती है.

अमेरिकी राजदूत से क्या होगी चर्चा?

अब्दुल्ला ने बैठक को लेकर कहा कि वह पहले अमेरिकी राजदूत को सुनना पसंद करेंगे. मुख्यमंत्री ने कहा "मैं उनसे और अधिक सुनना पसंद करूंगा. वे भी हमारी बात सुनने आ रहे हैं. देखते हैं कि किस तरह की चर्चा होती है." सर्जियो गोर की श्रीनगर यात्रा को क्षेत्र में बदलते रणनीतिक और कूटनीतिक घटनाक्रमों के बीच अमेरिका की एक अहम राजनयिक पहल के तौर पर देखा जा रहा है. ऑपरेशन सिंदूर और 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़पों के बाद किसी शीर्ष अमेरिकी राजनयिक की कश्मीर यात्रा को विशेष महत्व दिया जा रहा है.

क्या है उमर अब्दुल्ला का रुख?

उमर अब्दुल्ला पिछले महीने उस समय राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गए थे, जब उन्होंने कहा था कि जरूरत पड़ने पर वह जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल कराने के लिए व्हाइट हाउस के बाहर प्रदर्शन करने और राष्ट्रपति ट्रंप से संपर्क करने तक का विकल्प अपना सकते हैं. उन्होंने यह टिप्पणी उस संदर्भ में की थी जब दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन से भी राज्य का दर्जा बहाल नहीं होने की बात कही जा रही थी. भारतीय जनता पार्टी ने उमर अब्दुल्ला पर कश्मीर मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण करने का आरोप लगाया था. हालांकि, बुधवार को मुख्यमंत्री ने अमेरिकी राजदूत के साथ बैठक को लेकर अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर की समस्याओं का समाधान भारत सरकार को ही करना होगा.

आखिरी बार कब अमेरिकी राजदूत ने की थी कश्मीर की यात्रा?

जनवरी 2020 में तत्कालीन अमेरिकी राजदूत केनेथ जस्टर ने श्रीनगर का दौरा किया था. यह यात्रा अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त किए जाने के बाद भारत सरकार द्वारा आयोजित बहुराष्ट्रीय राजनयिक प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के तौर पर हुई थी. इस बार सर्जियो गोर का दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब अमेरिका और पाकिस्तान के बीच संबंधों में नई सक्रियता दिखाई दे रही है. ईरान युद्ध के दौरान इस्लामाबाद की भूमिका के बाद राष्ट्रपति ट्रंप और पाकिस्तान के नागरिक-सैन्य नेतृत्व के बीच संपर्क बढ़ा है.

कब लद्दाख जाएंगे सर्जियो गोर?

सर्जियो गोर के गुरुवार को लद्दाख जाने की उम्मीद है. यह यात्रा जून 2020 में गलवान घाटी में भारतीय सेना और चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के बीच हुई झड़पों के बाद किसी अमेरिकी राजदूत की हिमालयी क्षेत्र की पहली यात्रा होगी. गलवान संघर्ष के बाद अमेरिका ने LAC पर स्थिति बदलने के चीन के प्रयासों का विरोध करते हुए भारत का समर्थन किया था.