Exclusive: UP-पंजाब से लेकर उत्तराखंड तक... जहां-जहां चुनाव वहां-वहां अग्निवीर, कर्नल त्यागी ने बताया फैसले का चुनावी कनेक्शन
| अग्निवीर योजना में दो साल की अतिरिक्त सेवा के फैसले का यूपी, पंजाब और उत्तराखंड चुनावों से क्या कनेक्शन है? कर्नल अमरदीप त्यागी ने बताई इसकी सियासी वजह.
मोदी सरकार ने अग्निवीर योजना में बदलाव कर चार साल की सेवा पूरी करने वाले युवाओं को दो साल और सेना में काम करने का अवसर देने का फैसला किया है. यह फैसला ऐसे समय आया है, जब 2027 की शुरुआत में उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनाव होने हैं. इनमें उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड ऐसे राज्य हैं, जहां से बड़ी संख्या में युवा सेना में जाते रहे हैं. ऐसे में सरकार के इस फैसले को सैन्य जरूरतों के साथ-साथ चुनावी नजरिये से भी देखा जा रहा है.
रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल अमरदीप त्यागी का मानना है कि इस फैसले का राजनीतिक पहलू भी है. उनके मुताबिक, अग्निवीरों के साथ उनके परिवारों का बड़ा दायरा जुड़ा है. चुनाव के समय इन परिवारों की भावनाएं भी अहम हो सकती हैं. ऐसे में सरकार का यह फैसला आगामी विधानसभा चुनावों में चर्चा का विषय बन सकता है.
कर्नल ने फैसले का चुनावी कनेक्शन क्या बताया?
रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल अमरदीप त्यागी के मुताबिक, अग्निवीर योजना में बदलाव का असर केवल सेना में सेवा दे रहे युवाओं तक सीमित नहीं रहेगा. इससे उनके परिवार भी प्रभावित होंगे. उनका कहना है कि उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड से बड़ी संख्या में युवा सेना में जाते रहे हैं और इन तीनों राज्यों में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में अग्निवीरों को दो साल अतिरिक्त सेवा का मौका देने का फैसला चुनावी माहौल में चर्चा का विषय बन सकता है.
त्यागी का मानना है कि चुनाव के दौरान भावनात्मक मुद्दों का भी असर पड़ता है. अग्निवीरों की संख्या और उनसे जुड़े परिवारों को देखते हुए यह फैसला राजनीतिक संदेश देने का माध्यम बन सकता है. उन्होंने कहा कि बीजेपी और केंद्र सरकार पहले भी सैन्य घटनाओं और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक विमर्श में प्रमुखता देती रही हैं. ऐसे में आगामी चुनावों में सरकार इस फैसले को युवाओं के लिए अतिरिक्त अवसर के तौर पर पेश कर सकती है.
किन राज्यों से सबसे ज्यादा युवा सेना में जाते रहे हैं?
लोकसभा में 1 अप्रैल 2022 को पेश रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 31 दिसंबर 2021 तक भारतीय सेना में उत्तर प्रदेश के 1,62,724 जवान और जूनियर कमीशंड अधिकारी थे. इस सूची में पंजाब 90,290 जवानों के साथ दूसरे और महाराष्ट्र 84,373 के साथ तीसरे स्थान पर था. राजस्थान के 80,034 और उत्तराखंड के 59,978 जवान भी सेना में कार्यरत थे.
अग्निवीर योजना चुनावी मुद्दा कैसे बनी?
जून 2022 में अग्निपथ योजना लागू होने के बाद से ही इसे लेकर सवाल उठते रहे हैं. इस योजना के तहत सेना में जवानों की भर्ती चार साल के लिए करने और उनमें से 25 फीसदी को नियमित सेवा में रखने की व्यवस्था की गई थी. बाकी 75 फीसदी अग्निवीरों को चार साल बाद सेवा से बाहर होना था. इस व्यवस्था के खिलाफ उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और हरियाणा समेत कई राज्यों में युवाओं ने प्रदर्शन किए थे.
2024 के लोकसभा चुनाव में भी अग्निवीर योजना विपक्ष के प्रमुख मुद्दों में शामिल रही. कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दलों ने इसे युवाओं के रोजगार और भविष्य की सुरक्षा से जोड़कर सरकार पर सवाल उठाए. बीजेपी के कुछ सहयोगी दलों ने भी योजना की समीक्षा की मांग की थी. अब दो साल अतिरिक्त सेवा देने के फैसले के बाद इस मुद्दे पर एक बार फिर राजनीतिक बहस होने की संभावना है.
क्या सरकार के फैसले के पीछे चुनावी दबाव है?
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने अग्निवीरों को दो साल अतिरिक्त सेवा देने के फैसले को चुनावी राज्यों से जोड़कर सवाल उठाए हैं. उनका आरोप है कि उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड जैसे राज्यों में युवाओं की नाराजगी को देखते हुए सरकार ने यह बदलाव किया है. विपक्ष इस फैसले को अग्निवीर योजना पर सरकार के रुख में बदलाव के तौर पर पेश कर रहा है.
दूसरी तरफ, सरकार ने इस फैसले की वजह सेना की जरूरतों और पिछले चार साल में अग्निवीरों के प्रदर्शन की समीक्षा को बताया है. रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, सेना से मिले सुझावों के आधार पर यह बदलाव किया गया है, ताकि प्रशिक्षित जवानों की सेवाएं दो साल और ली जा सकें. इसलिए फैसले के पीछे चुनावी गणित होने का दावा फिलहाल राजनीतिक आरोप और विश्लेषण के दायरे में है, आधिकारिक वजह नहीं.
क्या दो साल का अतिरिक्त मौका युवाओं की चिंता दूर करेगा?
सरकार के नए फैसले से अग्निवीरों को चार साल के बाद दो साल और सेना में सेवा देने का विकल्प मिलेगा. इससे उन्हें नियमित सैनिक बनने का एक अतिरिक्त अवसर भी मिलेगा. लेकिन यह स्थायी नौकरी की गारंटी नहीं है. नियमित सेवा में शामिल होने के लिए अग्निवीरों को अपनी इच्छा बताने के साथ-साथ सेना के निर्धारित चयन मानकों पर भी खरा उतरना होगा.
ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनावों में अग्निवीर योजना पर बहस फिर तेज हो सकती है. सरकार इस बदलाव को युवाओं को अतिरिक्त अवसर देने और सेना को अनुभवी जवान उपलब्ध कराने के फैसले के रूप में रख सकती है. वहीं, विपक्ष का जोर इस सवाल पर रह सकता है कि चार साल बाद सेवा से बाहर होने वाले युवाओं के रोजगार और भविष्य की स्थायी सुरक्षा का क्या होगा.
सरकार ने अग्निवीर योजना में क्या बदलाव किया है?
दरअसल, केंद्र सरकार ने 4 नवंबर 2026 को अग्निवीर योजना में बदलाव को मंजूरी दी. नई व्यवस्था के तहत चार साल की सेवा पूरी करने वाले 25 फीसदी अग्निवीरों को पहले की तरह योग्यता और सेना की जरूरत के आधार पर नियमित सेवा में शामिल करने का अवसर मिलेगा. वहीं, बाकी 75 फीसदी अग्निवीरों को उनकी इच्छा के आधार पर दो साल का अतिरिक्त सेवा अवसर दिया जाएगा.
इस अतिरिक्त सेवा अवधि के दौरान अग्निवीरों को पहले से अधिक वेतन, बेहतर सेवा निधि और वरिष्ठता से जुड़े लाभ मिलेंगे. दो साल का अतिरिक्त कार्यकाल पूरा होने के बाद सभी अग्निवीरों को नियमित सैनिक के तौर पर शामिल होने का अवसर दिया जाएगा. हालांकि, इसके लिए उनकी सहमति और सेना के तय चयन मानकों को पूरा करना जरूरी होगा. यानी छह साल सेवा करने के बाद भी नियमित नियुक्ति अपने आप नहीं मिलेगी.