Arup Roy बने 'असली TMC' के अध्यक्ष, 30 सदस्यीय कार्यसमिति का भी हुआ गठन; अब क्या करेंगी ममता बनर्जी? 10 Points में जानिए

पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अंदर बढ़ता विवाद अब बड़े संगठनात्मक संकट में बदलता दिख रहा है. बागी विधायकों ने बैठक कर अरूप रॉय को कथित तौर पर 'असली TMC' का अध्यक्ष घोषित किया और 30 सदस्यीय कार्यसमिति बनाई. हालांकि. ममता बनर्जी गुट ने इस फैसले को असंवैधानिक बताते हुए खारिज कर दिया है.

ममता बनर्जी के सामने नई चुनौती

(Image Source:  ANI )
Edited By :  अच्‍युत कुमार द्विवेदी
Updated On : 22 Jun 2026 10:31 PM IST

TMC Crisis Explained: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस में अंदरूनी कलह अब खुलकर सामने आ गई है. सोमवार को बागी नेताओं के एक गुट ने कोलकाता में बैठक कर दावा किया कि उन्होंने पार्टी के नए ढांचे का गठन किया है. इस बैठक में वरिष्ठ नेता अरूप रॉय को 'असली TMC' का अध्यक्ष घोषित किया गया.

बागी गुट का नेतृत्व रितब्रत बनर्जी कर रहे हैं. उन्होंने दावा किया कि पूरी प्रक्रिया पार्टी संविधान के नियमों के अनुसार की गई है और जल्द ही इसकी जानकारी चुनाव आयोग को दी जाएगी. वहीं ममता बनर्जी के समर्थकों का कहना है कि पार्टी की अध्यक्ष ममता ही हैं और बागी गुट ऐसा कोई फैसला नहीं ले सकता.

TMC विवाद के 10 बड़े पॉइंट्स

1. सोमवार को कोलकाता के एक निजी होटल में TMC के बागी विधायकों और कुछ स्थानीय नेताओं की बैठक हुई. इस बैठक को 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस का विशेष सत्र' बताया गया.

2. बैठक के बाद बागी गुट ने वरिष्ठ नेता अरूप रॉय को पार्टी अध्यक्ष घोषित किया. उनका कहना है कि अरूप रॉय शुरुआत से पार्टी से जुड़े रहे हैं.

3. बागी गुट ने 30 सदस्यों वाली राष्ट्रीय कार्यसमिति बनाने का दावा किया. इसमें चार उपाध्यक्ष और चार महासचिव भी नियुक्त किए गए. 

4. रितब्रत बनर्जी ने कहा कि वे ममता बनर्जी को मुख्य सलाहकार के रूप में देखना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि पार्टी की विरासत का सम्मान किया जाएगा. 

5. ममता समर्थकों ने कहा कि पार्टी संविधान के अनुसार ममता बनर्जी ही अध्यक्ष हैं. पूर्व मंत्री मदन मित्रा ने कहा कि बागी गुट ऐसा बदलाव नहीं कर सकता.

6. बागी गुट से जब अभिषेक बनर्जी को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि बैठक में उनके नाम पर चर्चा नहीं हुई. यह संकेत माना जा रहा है कि विवाद सिर्फ नेतृत्व को लेकर है. 

7. अरूप विश्वास, सबीना यास्मिन, रथिन घोष और फिरहाद हकीम को उपाध्यक्ष बनाया गया. रितब्रत बनर्जी समेत कुछ नेताओं को महासचिव पद दिया गया. 

8. बैठक में लगाए गए होर्डिंग में ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की तस्वीरें नहीं थीं. हालांकि पार्टी चिन्ह और गांधी, टैगोर और अंबेडकर की तस्वीरें मौजूद थीं. 

9. 3 जून को करीब 80 में से 60 TMC विधायकों के बगावत करने का दावा किया गया था. इसके बाद रितब्रत बनर्जी को विपक्ष के नेता के रूप में स्वीकार किया गया.

10.  TMC के कुछ लोकसभा सांसदों ने भी अलग रुख अपनाने के संकेत दिए हैं. बागी गुट का दावा है कि उनके पास बड़ी संख्या में सांसदों का समर्थन है.

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