महिला की छाती को घूरना गलत, लेकिन अपराध नहीं- Bombay High Court का बड़ा फैसला, समझें पूरा मामला

Bombay High Court के हालिया फैसले ने ऑफिस में महिलाओं के साथ व्यवहार और कानून की सीमाओं को लेकर नई बहस छेड़ दी है. अदालत ने कहा कि घूरना भले ही नैतिक रूप से गलत हो, लेकिन इसे IPC की धारा 354C के तहत वॉयरिज्म नहीं माना जा सकता.

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Edited By :  समी सिद्दीकी
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Bombay High Court ने हाल ही में कहा है कि दफ्तर में किसी महिला सहकर्मी के शरीर के किसी हिस्से, जैसे छाती, को घूरना नैतिक रूप से गलत या अशोभनीय हो सकता है, लेकिन इसे भारतीय दंड संहिता की धारा 354C के तहत वॉयरिज्म नहीं माना जा सकता.

भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 354C वॉययूरिज्म के अपराध को परिभाषित और दंडित करती है. इसके अनुसार, यदि कोई व्यक्ति किसी महिला को ऐसे निजी कार्य करते हुए देखता है या उसकी तस्वीर लेता है, जहां उसे यह उम्मीद होती है कि कोई उसे नहीं देख रहा होगा, या उस तस्वीर को फैलाता है, तो यह अपराध माना जाएगा. पहली बार दोषी पाए जाने पर एक से तीन साल तक की सजा और जुर्माना हो सकता है, जबकि दोबारा दोषी पाए जाने पर सजा तीन से सात साल तक हो सकती है, साथ ही जुर्माना भी लगाया जा सकता है.

क्या है पूरा मामला?

यह मामला एक शिकायत से जुड़ा था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि मीटिंग के दौरान आरोपी आंखों में देखने के बजाय महिला के शरीर के हिस्सों को घूरता था और अनुचित टिप्पणियां करता था. NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी की आंतरिक शिकायत समिति (ICC) ने पहले ही आरोपी को इस मामले में क्लीन चिट दे दी थी. इस मामले में जस्टिस Amit Borkar ने कहा कि इस तरह का व्यवहार नैतिक रूप से गलत हो सकता है, लेकिन यह आईपीसी की धारा 354C के तहत अपराध की श्रेणी में नहीं आता.

कोर्ट ने क्या है?

अदालत ने इस मामले में दर्ज एफआईआर और आगे की आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया. कोर्ट ने कहा कि कानून को उसके स्पष्ट शब्दों से आगे नहीं बढ़ाया जा सकता और इस मामले को जारी रखना कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा.

जस्टिस अमित बोरकर की एकल पीठ ने कहा, “आरोप केवल इतना है कि उसने मीटिंग के दौरान महिला की छाती की ओर देखा. अगर इसे सही भी मान लिया जाए, तो भी यह वॉयरिज्म नहीं है. कानून को उसके सामान्य अर्थ से आगे नहीं बढ़ाया जा सकता.”

क्या इससे पहले भी आ चुका है ऐसा मामला?

मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, इसी तरह का एक मामला हाल ही में Delhi High Court में भी सामने आया था, जहां एक आइसक्रीम विक्रेता के खिलाफ वॉययूरिज्म और पीछा करने (स्टॉकिंग) का मामला दर्ज किया गया था. पीटीआई की 22 मार्च की रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस Saurabh Banerjee ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच समझौता हो जाने के बाद मामले को आगे बढ़ाना बेकार होगा. इसलिए 2018 में दर्ज एफआईआर और उससे जुड़ी सभी कार्यवाही को रद्द कर दिया गया था.

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