वंदे मातरम बोलो वरना भारत छोड़ो! ट्रेन में मुस्लिम महिला का घेराव, यूजर्स बोले- बंदूक की नोक पर एक पूजा भी करा लेंगे | Video Viral

भारतीय रेलवे की एक ट्रेन से सामने आया वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें नकाब पहनी एक मुस्लिम महिला को कथित तौर पर कुछ यात्रियों द्वारा ‘वंदे मातरम’ बोलने के लिए दबाव डाला जाता दिखाया गया है. महिला शांत रहते हुए इनकार करती है और कहती है कि वह भारतीय है लेकिन जबरदस्ती स्वीकार नहीं करेगी. बहस बढ़ने पर पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा.;

( Image Source:  X: @TheMuslim786 )
By :  रूपाली राय
Updated On : 27 Jan 2026 8:58 PM IST

भारतीय रेलवे की एक ट्रेन में यह विवादास्पद घटना घटी, जहां एक नकाब पहनी मुस्लिम महिला यात्रा कर रही थी. वीडियो में दिखाया गया है कि अचानक कुछ पुरुष यात्री उसे घेर लेते हैं और राष्ट्रवादी नारा 'वंदे मातरम' लगाने पर अड़ जाते हैं. महिला शांत लेकिन दृढ़ स्वर में इनकार करती है, कहती है कि वह भारतीय है और देश नहीं छोड़ेगी, लेकिन इस तरह की जबरदस्ती स्वीकार नहीं करेगी. भीड़ इकट्ठा हो जाती है, नारेबाजी तेज हो जाती है, लेकिन महिला डटकर मोबाइल फोन से पूरी बातचीत को रिकॉर्ड करती नजर आती है. वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया, जिससे देशभर में बहस छिड़ गई. 

वीडियो के कैप्शन में लिखा है, 'आपको वंदे मातरम बोलना होगा, अन्यथा आपको भारत छोड़ना होगा. ट्रेन में यात्रा कर रही एक मुस्लिम महिला को निशाना बनाया गया और उसे जबरन वंदे मातरम बोलने के लिए मजबूर किया गया. जब उसने इनकार किया, तो उसे भारत छोड़ने के लिए कहा गया, जिसका उसने विरोध किया. महिला विरोध कर रहे लोगों से सवाल करती है- क्या आप लोगों को किसी ने पर्सनली 'वंदे मातरम' बोलने को कहा है?. विवाद काफी बढ़ जाता और मुस्लिम महिला अकेले ही अपना बचाव करती नजर आईं. इसके बाद पुलिस को ट्रैन में हस्तछेप करना पड़ा. लेकिन महिला का विरोध करने शख्स ने पुलिस से कहा, 'इस महिला के दिल में नफरत में है यह वंदे मातरम का विरोध करती है.' वहीं महिला पीछे से कहती है- ये लोग मुझे बोल रहे है वंदे मातरम बोलो या भारत छोड़ों.'

बन्दूक की नोक पर पूजा 

वीडियो पर प्रतिक्रियाएं दो ग्रुप में बंटी हुई हैं. एक तरफ समर्थक इसे इस्लाम-विरोधी हरासमेंट बता रहे हैं. वे कहते हैं कि सार्वजनिक स्थान पर महिलाओं को निशाना बनाना अस्वीकार्य है और रेलवे पुलिस को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए. #RailwayProtectWomen जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं. दूसरी ओर आलोचक इसे बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने वाला एक प्रोपोगेंडा प्रमोशन बता रहे हैं. एक यूजर ने कहा, 'गजब गुंडागर्दी है.' दूसरे ने कहा, 'उसके कार्यों की वजह से घटना ने अलग ही मोड़ ले लिया. कम से कम श्रीनगर की तरह उसे बंदूक की नोक पर पाठ करने के लिए तो नहीं कहा गया मुस्लिम, इसे झेल लो.' वहीं अन्य यूजर्स का कहना है कि अगर वह भारतीय है तो वंदे मातरम बोलने में क्या हर्ज है.' कुछ ने इसे विपक्षी राजनीति से जोड़ दिया है.यह घटना भारत में जबरन देशभक्ति के दबाव और सांप्रदायिक तनाव को फिर से उभार रही है. 

क्या इतिहास 

'वंदे मातरम' मूल रूप से 1905 में बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय के उपन्यास आनंदमठ से लिया गया है, जो ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के खिलाफ स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक बना. यह गीत मातृभूमि भारत की स्तुति करता है, लेकिन कुछ पंक्तियों को मुसलमानों द्वारा धार्मिक भावनाओं के खिलाफ मानते हुए विवादास्पद ठहराया गया. इतिहास में कई बार इस पर बहस हुई. 1937 में कांग्रेस सत्र में इसे आंशिक रूप से राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया गया, लेकिन अल्पसंख्यकों की भावनाओं का सम्मान करते हुए पूर्ण रूप से नहीं. आज भी यह राष्ट्रवाद और धार्मिक संवेदनशीलता के बीच की खाई को दर्शाता है. 

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