13 आरोपी और 422 दस्तावेज... NEET पेपर लीक केस में CBI की आखिरी चार्जशीट में नहीं होगा किसी अधिकारी का नाम, फिर फाइनल रिपोर्ट में क्या?
NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में CBI एक हफ्ते के भ.तर अंतिम चार्जशीट दाखिल कर सकती है. एचटी की रिपोर्ट के मुताबिक, जांच में 13 आरोपियों, 360 गवाहों और 422 दस्तावेजों का जिक्र है, लेकिन किसी सरकारी अधिकारी को आरोपी बनाने की संभावना नहीं है.
नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट-अंडरग्रेजुएट (NEET-UG) 2026 पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) एक हफ्ते के भीतर अपनी दूसरी और अंतिम चार्जशीट दाखिल कर सकती है. मामले की जांच से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, CBI की जांच में अब तक 13 लोगों की भूमिका सामने आई है. इनमें नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की ओर से नियुक्त टेस्ट एक्सपर्ट, कोचिंग सेंटर संचालक, बिचौलिए और परीक्षा में शामिल उम्मीदवार शामिल हैं.
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, जांच एजेंसी की आखिरी चार्जशीट में केंद्र सरकार या NTA के किसी अधिकारी को आरोपी बनाए जाने की संभावना नहीं है. अधिकारियों के मुताबिक, पेपर लीक से जुड़े हालातों की जांच में प्राइवेट लोगों के अलावा किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने नहीं आ सकी है.
एक अधिकारी ने कहा कि एजेंसी अपनी अंतिम चार्जशीट में NTA से जुड़े अधिकारियों समेत किसी भी सरकारी अधिकारी को आरोपी नहीं बनाएगी. जांच में पेपर लीक से जुड़े मामले में निजी व्यक्तियों के अलावा किसी और की भूमिका सामने नहीं आई है. दूसरे अधिकारी ने कहा कि अंतिम चार्जशीट दाखिल होने के साथ NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में CBI की जांच पूरी हो जाएगी.
कब रद्द हुआ था NEET-UG 2026?
12 मई को NTA ने NEET-UG 2026 की परीक्षा रद्द करने का ऐलान किया था. इससे पहले 3 मई को हुई परीक्षा के प्रश्नपत्र में एक 'गेस पेपर' के कम से कम 120 सवालों के समान होने की बात सामने आई थी. यह गेस पेपर विषय विशेषज्ञों और शिक्षकों की ओर से तैयार किया गया था. इसमें पिछले वर्षों के सवालों के ट्रेंड और पैटर्न के आधार पर संभावित प्रश्नों का संकलन किया गया था.
परीक्षा के एक हफ्ता बाद पेपर लीक का पता चला. इसके बाद बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए और मामला संसद तक पहुंचा. रिपोर्ट के मुताबिक, इस घटनाक्रम के बाद तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की स्थिति बनी. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि लाखों युवाओं ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया था.
क्या उठ रहे हैं सवाल?
हालांकि, परीक्षा में शामिल छात्र शशांक मौर्य ने जांच को लेकर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि NTA और शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों की भूमिका के बिना NEET का पेपर लीक नहीं हो सकता था. उनके मुताबिक, NTA के अधिकारियों को मुख्य आरोपी माना जाना चाहिए और उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए.
शशांक ने 3 मई को हुई मूल परीक्षा और 21 जून को हुई दोबारा परीक्षा, दोनों में हिस्सा लिया था.
पहली चार्जशीट में 13 आरोपी बनाए गए
CBI ने मामले में पहली चार्जशीट 28 जुलाई को दाखिल की थी. इसमें 13 आरोपियों के नाम शामिल किए गए थे. इनमें NTA की ओर से नियुक्त तीन विषय विशेषज्ञ भी शामिल थे. इनमें बॉटनी और जूलॉजी के लिए नियुक्त मनीषा गुरुनाथ मांढरे, केमिस्ट्री के प्रह्लाद विठ्ठलराव कुलकर्णी और फिजिक्स की मनीषा संजय हवलदार शामिल थीं.
पहली चार्जशीट दाखिल करते समय CBI ने कहा था कि दूसरे संभावित साजिशकर्ताओं की भूमिका की जांच जारी रखी गई है. एजेंसी को सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (CFSL), गवर्नमेंट एग्जामिनर ऑफ क्वेश्चंड डॉक्यूमेंट्स (GEQD) और दिल्ली यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों की राय वाली रिपोर्ट का भी इंतजार था. इसके बाद CBI ने तीन और लोगों को गिरफ्तार किया. इन लोगों पर कोचिंग सेंटरों के जरिए पेपर लीक से लाभ लेने का आरोप था.
किन तीन आरोपियों की भूमिका आखिरी चार्जशीट में?
जांच से जुड़े अधिकारी के मुताबिक, इन तीन नए आरोपियों की भूमिका और फॉरेंसिक विशेषज्ञों की रिपोर्ट में सामने आए निष्कर्षों को अंतिम चार्जशीट में शामिल किया जाएगा. अधिकारी ने कहा कि यह पता लगाने के लिए विस्तृत जांच की गई कि क्या किसी NTA अधिकारी या किसी अन्य सरकारी अधिकारी की पेपर लीक में भूमिका थी. लेकिन जांच में ऐसी कोई भूमिका सामने नहीं आई. CBI के मुताबिक, अब इन तीन लोगों की भूमिका और फॉरेंसिक जांच के निष्कर्ष अंतिम चार्जशीट में विस्तार से बताए जाएंगे.
NTA के परीक्षा सिस्टम में किए गए बड़े बदलाव?
पेपर लीक मामले के बाद सरकार ने NTA में बड़े बदलावों का ऐलान किया. 17 अगस्त को केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने NTA के 50 कर्मचारियों को हटा दिया. इसके बाद NTA ने अपने परीक्षा से जुड़े सिस्टम में बदलाव की जानकारी दी. एजेंसी ने बताया कि उसकी परीक्षा टीम में बदलाव किया गया है. करीब 600 विषय विशेषज्ञों को हटाकर नए विशेषज्ञों को शामिल किया गया. इसके अलावा प्रश्नपत्र की जांच के लिए चार स्तरों वाली स्क्रूटिनी व्यवस्था शुरू की गई.
CBI की पहली चार्जशीट में NTA के विशेषज्ञों की भूमिका का क्या जिक्र है?
CBI की पहली चार्जशीट में NEET-UG 2026 के प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया में NTA की ओर से नियुक्त तीन विषय विशेषज्ञों के इस्तेमाल को लेकर भी जानकारी दी गई थी. CBI के मुताबिक, इन तीनों विशेषज्ञों को प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों में बार-बार शामिल किया गया था. इनमें से एक विशेषज्ञ को प्रश्नपत्र तैयार करने के सभी चार चरणों में शामिल किया गया था. इन चरणों में सवाल तैयार करना, उन्हें दूसरी भाषा में ट्रांसलेट करना और अन्य प्रक्रियाएं शामिल थीं.
CBI के अनुसार, अंतिम चरण में इन विशेषज्ञों को परीक्षा के चारों मास्टर प्रश्नपत्र सेट देखने की अनुमति थी. इसका मतलब यह था कि इन विशेषज्ञों के पास परीक्षा की बेहद संवेदनशील सामग्री तक लगातार और लंबे समय तक पहुंच थी.
केमिस्ट्री के 135 सवालों को लेकर क्या आरोप है?
CBI के मुताबिक, प्रह्लाद विठ्ठलराव कुलकर्णी ने केमिस्ट्री के 135 सवालों और उनके विकल्पों को कागज के छोटे-छोटे टुकड़ों पर लिखा और उन्हें गोपनीय क्षेत्र से बाहर ले गए. वहीं, मनीषा गुरुनाथ मांढरे और मनीषा संजय हवलदार पर सवालों और उनसे जुड़े विवरणों को याद करने और बाद में किताबों की मदद से उन्हें दोबारा तैयार करने का आरोप लगाया गया. CBI ने इन आरोपों के आधार पर मामले में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और सबूत नष्ट करने से जुड़ी धाराएं लगाई हैं.
इसके अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम से जुड़े कानून, Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024 के प्रावधान भी लगाए गए हैं.
CBI ने किन सबूतों के आधार पर मामला तैयार किया?
CBI ने अपनी पहली चार्जशीट में अपने मामले को मजबूत करने के लिए 360 गवाहों, 422 दस्तावेजों और 43 भौतिक साक्ष्यों का इस्तेमाल किया. अब एजेंसी की अंतिम चार्जशीट में गिरफ्तार किए गए तीन नए आरोपियों की भूमिका के साथ-साथ फॉरेंसिक विशेषज्ञों की रिपोर्ट के निष्कर्ष भी शामिल किए जाएंगे. CBI अधिकारियों के मुताबिक, इन सभी पहलुओं की जांच के बाद एजेंसी को किसी NTA अधिकारी या केंद्र सरकार के किसी अधिकारी की पेपर लीक में भूमिका का सबूत नहीं मिला है.
क्या ईडी भी कर रही बड़ी प्लानिंग?
इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की भी नजर बनी हुई है. पिछले महीने की रिपोर्ट के मुताबिक, ED ने CBI से मामले से जुड़े रिकॉर्ड मांगे थे. ED यह जांचना चाहता था कि क्या इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग का कोई मामला बनता है या नहीं. हालांकि, अभी तक ED ने Prevention of Money Laundering Act (PMLA) के तहत कोई केस दर्ज नहीं किया है.
कब दाखिल होगी आखिरी चार्जशीट?
CBI अधिकारियों के मुताबिक, मामले में तीन नए आरोपियों की भूमिका और फॉरेंसिक विशेषज्ञों की रिपोर्ट को अंतिम चार्जशीट में शामिल किया जाएगा. एजेंसी करीब एक सप्ताह के भीतर यह चार्जशीट दाखिल कर सकती है. अधिकारियों का कहना है कि पेपर लीक से जुड़ी परिस्थितियों की गहन जांच की गई, लेकिन NTA या केंद्र सरकार के किसी अधिकारी की भूमिका स्थापित नहीं हो सकी.