शादी के 3 महीने बाद ही पति ने रखी कपल स्वैपिंग की मांग तो पत्नी के उड़े होश, जानिए फेसबुक से होटल तक फैले नेटवर्क की पूरी कहानी
गुजरात की एक महिला ने दावा किया है कि शादी के कुछ महीने बाद उसके पति ने उस पर कपल स्वैपिंग में शामिल होने के लिए दबाव बनाया. महिला ने वीडियो जारी कर कथित नेटवर्क, फेसबुक से शुरू होने वाली गतिविधियों और अपने संघर्ष की कहानी बताई है.
महिला ने पति पर लगाया कपल स्वैपिंग का आरोप
(Image Source: Google Gemini )शादी को अभी सिर्फ तीन महीने ही हुए थे. एक महिला के लिए जहां नई जिंदगी के सपने शुरू हुए थे, वहीं उसके पति ने कथित तौर पर ऐसा प्रस्ताव रख दिया जिसने उसकी दुनिया हिला दी. महिला का दावा है कि पति ने उसे कपल स्वैपिंग यानी दूसरे कपल्स के साथ पार्टनर बदलने वाली गतिविधि में शामिल होने के लिए कहा. महिला के मुताबिक, पति ने इसे पैसे कमाने, मौज-मस्ती और नए लोगों से मिलने का तरीका बताया, लेकिन उसने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया और खुद को इस कथित नेटवर्क का हिस्सा बनने से बचा लिया. अब इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर बहस तेज है.
महिला का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें उसने इस पूरे कथित नेटवर्क के बारे में कई चौंकाने वाले दावे किए हैं. हालांकि महिला की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है.
महिला ने क्या-क्या खुलासा किया?
1- महिला ने दिव्य भास्कर से बातचीत करते हुए बताया कि ऐसे नेटवर्क की शुरुआत सोशल मीडिया से होती है. सबसे पहले अलग नाम से फेसबुक अकाउंट बनाया जाता है, इस पर कपल की तस्वीरें डाली जाती हैं और फिर दूसरे लोग जुड़ना शुरू करते हैं. बातचीत धीरे-धीरे आगे बढ़ती है और फिर वीडियो कॉल, चैट और मुलाकातों के जरिए संपर्क बनाया जाता है.
2- महिला के अनुसार, शुरुआत सामान्य बातचीत से होती है. पहले चाय-कॉफी पर मुलाकात होती है, फिर बाहर घूमने का प्लान बनाया जाता है और बाद में होटल तक बात पहुंचती है.
3- महिला ने दावा किया कि कुछ कपल्स आपस में बातचीत के बाद एक-दूसरे के साथ समय बिताने का फैसला करते हैं. कुछ लोग इसे सहमति और इच्छा से करते हैं, जबकि कुछ मामलों में पैसों का लेन-देन भी होता है. मध्यम वर्गीय लोगों को एक रात के लिए 20 हजार रुपये तक भी दिए जाते हैं.
4- महिला का दावा है कि शुरुआत में कुछ कपल्स जुड़े थे, लेकिन धीरे-धीरे संख्या बढ़ती गई और अब यह नेटवर्क बहुत बड़ा हो चुका है. अब यह इसमें 400 से अधिक जोड़े हैं.
5- महिला ने बताया कि उसकी शादी साल 2022 में सूरत में हुई थी. शादी के करीब तीन महीने बाद ही उसके पति ने उससे कपल स्वैपिंग में शामिल होने की बात कही. महिला के मुताबिक, "मैं यह सुनकर डर गई थी. मेरे पति ही ऐसा प्रस्ताव लेकर आए थे. मैंने साफ मना कर दिया और विरोध किया." उसने दावा किया कि उसके पास बातचीत के सबूत और चैट मौजूद हैं, जिन्हें वह जरूरत पड़ने पर सामने रखेगी.
6- महिला ने आरोप लगाया कि इस पूरे विचार की शुरुआत उसके पति और उनके बड़े भाई व उनकी पत्नी की तरफ से हुई. उनका तर्क था कि अगर पति का किसी और से संबंध हो और पत्नी को पता चल जाए तो शादी टूट सकती है. इसलिए पत्नी को भी इस व्यवस्था में शामिल कर लिया जाए.
7- महिला का कहना है कि कई बार महिलाएं दबाव में आ जाती हैं और कुछ मामलों में पति उन्हें ब्लैकमेल भी करते हैं. महिला ने कहा, "जब मैंने ऐसा करने से इनकार किया तो मेरे साथ मारपीट की गई, जिसकी वजह से मैंने पति के खिलाफ पुलिस और फैमिली कोर्ट में केस दर्ज कराया है."
8- महिला ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर गुजरात के डिप्टी सीएम Harsh Sanghavi तक अपनी बात पहुंचाने की अपील की है. महिला ने कहा कि कई महिलाएं ऐसी परिस्थितियों में फंसी हो सकती हैं, लेकिन सामाजिक डर की वजह से बोल नहीं पातीं.
10- वाइफ स्वैपिंग (Wife Swapping) एक ऐसी यौन गतिविधि (Sexual Practice) है, जिसमें दो या दो से अधिक शादीशुदा जोड़े आपसी सहमति से एक-दूसरे के जीवनसाथी (पार्टनर) की अदला-बदली कर शारीरिक संबंध बनाते हैं. इसे आधुनिक शब्दावली में 'स्विंगिंग' (Swinging) या 'पार्टनर स्वैपिंग' भी कहा जाता है.
क्या होता है कपल स्वैपिंग?
कपल स्वैपिंग का मतलब होता है कि दो या उससे ज्यादा कपल आपसी सहमति से अपने पार्टनर बदलते हैं. पॉप कल्चर में इसे कई बार दिखाया गया है. Ajnabee जैसी फिल्मों में भी इससे जुड़े कॉन्सेप्ट को दिखाया गया था. हालांकि वास्तविक जीवन में यह एक बेहद विवादित विषय है, जहां रिश्ते, सहमति और कानून से जुड़े कई सवाल खड़े होते हैं.
वाइफ स्वैपिंग की शुरुआत कैसे हुई?
वाइफ स्वैपिंग की शुरुआत को दो अलग-अलग नजरियों से देखा जाता है- प्राचीन इतिहास और आधुनिक सब-कल्चर. इतिहासकार मानते हैं कि पत्नियों या पार्टनर्स की अदला-बदली की प्रथा बेहद प्राचीन है. प्राचीन काल में कई आदिवासी कबीलों और सभ्यताओं में मेहमाननवाज़ी, दोस्ती मजबूत करने या अनुष्ठानों के हिस्से के रूप में ऐसी प्रथाएं मौजूद थीं. उदाहरण के लिए, भारत के लद्दाख क्षेत्र में रहने वाली प्राचीन 'ड्रोग्पा' या 'दार्ड' जनजाति में सदियों से पार्टनर्स की अदला-बदली की परंपरा रही है.
आधुनिक समाज में 'वाइफ स्वैपिंग' शब्द पहली बार 1955 से 1960 के दशक के बीच अमेरिका में दर्ज किया गया. दूसरे विश्व युद्ध के बाद अमेरिकी वायुसेना के पायलटों और उच्च वर्ग के बीच 'की पार्टी' (Key Parties) के रूप में इसकी गुपचुप शुरुआत हुई थी. पश्चिमी देशों में 1960 के दशक की 'यौन क्रांति' (Sexual Revolution) और गर्भनिरोधक गोलियों (Contraceptive Pills) के आने के बाद इस चलन ने ज़ोर पकड़ा. लोगों में कुछ नया तलाशने की चाहत ने इसे एक सब-कल्चर (Subculture) का रूप दे दिया.
कपल स्वैपिंग पार्टियों को लेकर दावे
ऐसी गतिविधियों को लेकर अलग-अलग तरह के दावे किए जाते हैं. कुछ रिपोर्ट्स में बताया गया है कि कुछ लोग निजी पार्टियों या सोशल ग्रुप्स के जरिए ऐसे संपर्क बनाते हैं. कहा जाता है कि कुछ जगहों पर लोग गेम या बातचीत के जरिए पार्टनर चुनने जैसी गतिविधियां करते हैं. हालांकि इन दावों की पुष्टि हर मामले में अलग-अलग होती है और किसी भी गतिविधि में सहमति और कानून सबसे महत्वपूर्ण पहलू होते हैं.
कानून क्या कहता है?
कपल स्वैपिंग को लेकर भारत में कोई अलग और स्पष्ट कानून नहीं है, लेकिन अगर इसमें जबरदस्ती, उत्पीड़न, धमकी या किसी व्यक्ति की इच्छा के खिलाफ कुछ किया जाता है तो संबंधित कानून लागू हो सकते हैं. किसी भी रिश्ते में सहमति सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है. जबरदस्ती या दबाव अपराध की श्रेणी में आ सकता है.
दिल्ली हाईकोर्ट का मामला
एक मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने ऐसे पति की जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिस पर पत्नी को पार्टनर स्वैपिंग के लिए मजबूर करने और उत्पीड़न के आरोप लगे थे. कोर्ट ने माना था कि आरोपी के बाहर आने पर पत्नी को खतरा हो सकता है.
शहरों से छोटे शहरों तक चर्चा
कुछ सर्वे और दावों में दावा किया गया है कि महानगरों में ऐसे रिश्तों को लेकर कुछ वर्गों में रुचि बढ़ी है. मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, रिश्तों में बदलाव, सोशल मीडिया का प्रभाव और बदलती जीवनशैली ऐसे मुद्दों को सामने ला रही है. लेकिन विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि किसी भी रिश्ते की नींव भरोसा, सम्मान और सहमति पर टिकी होती है.