दुनिया में तेल को लेकर मचा हाहाकार! भारत में लग सकता है ‘पेट्रोलियम लॉकडाउन’? जाानिए PM मोदी की अपील पर क्या बोले एक्सपर्ट
अर्थशास्त्री Mitali Nikore ने चेतावनी दी है कि मिडिल ईस्ट में युद्ध लंबा खिंचा तो दुनिया तेल संकट का सामना कर सकती है. उनका कहना है कि भारत में भी पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं. सरकार इसलिए लोगों को ईंधन बचाने और EV अपनाने का संदेश दे रही है.
Economist Mitali Nikore on Petroleum Lockdown, PM Modi fuel appeal: क्या आने वाले समय में भारत को 'पेट्रोलियम लॉकडाउन' जैसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपील और वैश्विक हालात को देखकर अब यह सवाल गंभीर चर्चा का विषय बनता जा रहा है. स्टेट मिरर हिंदी के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत में अर्थशास्त्री मिताली निकोर (Mitali Nikore) का मानना है कि यह सिर्फ भारत का संकट नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के सामने खड़ा होता हुआ बड़ा ऊर्जा संकट है. उन्होंने कहा कि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से तेल आयात करके पूरा करता है. ऐसे में जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो उसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक तेल कंपनियों को हर दिन करीब 1400 करोड़ रुपये तक का नुकसान झेलना पड़ रहा है. वजह यह है कि अंतरराष्ट्रीय कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, लेकिन घरेलू स्तर पर कीमतों को पूरी तरह उसी अनुपात में नहीं बढ़ाया गया है. यानी अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो या तो सरकार को टैक्स कम करना होगा या फिर पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने पड़ सकते हैं.
आखिर खतरा कितना बड़ा है?
मिताली निकोर के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में कई रिफाइनरियां बंद हो चुकी हैं और फिलहाल वही तेल बाजार में आ रहा है जो पहले से स्टोरेज में मौजूद है. उन्होंने दावा किया कि अलग-अलग देशों के पास लगभग 4 से 6 हफ्ते का ही ऑयल स्टॉक बचा हो सकता है. अगर युद्ध लंबा चला और रिफाइनरियां फिर शुरू नहीं हो पाईं, तो दुनिया में सप्लाई का बड़ा संकट पैदा हो सकता है. उनके मुताबिक, रिफाइनरी दोबारा पूरी तरह चालू करने में कई महीने लग सकते हैं. मिडिल ईस्ट की सप्लाई कमजोर पड़ सकती है. इससे वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं.
रूस और अमेरिका को फायदा?
निकोर का कहना है कि इस संकट में सबसे बड़ा फायदा Russia और United States को हो सकता है. अगर रूस पर लगे प्रतिबंध कम होते हैं और उसका तेल दोबारा बड़े पैमाने पर वैश्विक बाजार में आता है, तो रूस बड़ा सप्लायर बन सकता है. हालांकि उनका मानना है कि रूस भी तेल “सस्ते” में नहीं बेचेगा, क्योंकि बाजार में सप्लाई कम होने पर कीमतें ऊंची रहेंगी. अमेरिका भी इस स्थिति में बड़ा लाभ उठा सकता है क्योंकि वह दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादकों में शामिल है.
PM मोदी का संदेश क्या था?
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी ने सीधे तौर पर 'संकट' शब्द का इस्तेमाल नहीं किया, लेकिन उनका संदेश साफ था कि देश को आने वाले समय के लिए तैयार रहना होगा. इसीलिए उन्होंने पेट्रोल-डीजल बचाने, मेट्रो और कारपूलिंग अपनाने, वर्क फ्रॉम होम बढ़ाने और इलेक्ट्रिक व्हीकल इस्तेमाल करने जैसी बातें कहीं. निकोर के मुताबिक यह सिर्फ सलाह नहीं, बल्कि जनता को 'संभलने' का संकेत है.
EV और Renewable Energy पर जोर क्यों?
मिताली निकोर ने कहा कि भारत के लिए अब सबसे बड़ा रास्ता Renewable Energy है. उनके मुताबिक, कोयला और बिजली की सप्लाई चेन तेल जितनी प्रभावित नहीं है. भारत सोलर एनर्जी के मामले में मजबूत क्षमता रखता है. अगर संकट लंबा चला, तो ऊर्जा आत्मनिर्भरता सबसे बड़ा मुद्दा बन जाएगी. निकोर ने कहा कि यही वजह है कि दुनियाभर में Renewable Energy कंपनियों की वैल्यू तेजी से बढ़ रही है.
क्या सच में ‘पेट्रोलियम लॉकडाउन’ संभव है?
फिलहाल भारत में किसी तरह के पेट्रोलियम लॉकडाउन की आधिकारिक चर्चा नहीं है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर युद्ध लंबा खिंचता है, सप्लाई चेन टूटती है और तेल बेहद महंगा होता है तो सरकारों को ईंधन बचत और नियंत्रित खपत जैसे कदम उठाने पड़ सकते हैं. यानी अभी खतरा 'तुरंत संकट' का नहीं, बल्कि 'लंबी तैयारी' का बताया जा रहा है.
सबसे बड़ा सवाल क्या है?
अब पूरी दुनिया के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है-क्या मिडिल ईस्ट संकट जल्द खत्म होगा? क्या तेल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर तक जाएंगी? और क्या दुनिया को नई ऊर्जा व्यवस्था अपनानी पड़ेगी? भारत फिलहाल जनता को संकेत दे रहा है कि आने वाला समय आसान नहीं हो सकता.