कौन हैं पुलकित मणि?'छात्रों की गूंज' में PM मोदी की मिमिक्री से छाए, राहुल गांधी ने मंच पर दिखाए अंधभक्त के सबूत- 10 Point
इंदौर में राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में मोदी की मिमिक्री का वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है. कार्यक्रम में शिक्षा, रोजगार, पेपर लीक और छात्रों के सवालों पर भी बात हुई.
मध्य प्रदेश के इंदौर में शनिवार को कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के पांचवें संस्करण में युवाओं और छात्रों से संवाद किया. कार्यक्रम में शिक्षा, रोजगार, भर्ती, परीक्षा व्यवस्था और विश्वविद्यालयों में पारदर्शिता जैसे मुद्दे उठे. रिपोर्टों के मुताबिक आईडीए ग्राउंड पर बड़ी संख्या में युवा पहुंचे और कार्यक्रम में करीब 20 से 25 हजार लोगों की मौजूदगी बताई गई.
कार्यक्रम के दौरान एक छात्र ने विश्वविद्यालयों में कथित फर्जीवाड़े और पारदर्शिता की कमी की बात रखी. वहीं राहुल गांधी ने अपने संबोधन में कहा कि छात्रों को सवाल पूछने से नहीं रोका जाना चाहिए. उन्होंने 'सिस्टम बनाम स्टूडेंट्स' के मुद्दे को अपने संबोधन का प्रमुख हिस्सा बनाया. इसी के साथ उन्होंने अंधभक्त के 6 लक्षण भी बताए.
कॉमेडियन पुलकित मणि कौन हैं?
पुलकित मणि एक भारतीय स्टैंड-अप कॉमेडियन और सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर हैं, जो अपने व्यंग्यात्मक वीडियो और राजनीतिक मिमिक्री के लिए जाने जाते हैं. Instagram पर वह @hunnywhoisfunny नाम से सक्रिय हैं और उनके करीब 6 लाख फॉलोअर्स हैं. वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई राजनीतिक हस्तियों की मिमिक्री और समसामयिक मुद्दों पर कॉमेडी करते हैं. उनका ‘Raw Hunny’ नाम से स्टैंड-अप स्पेशल भी है. हाल ही में Instagram रील्स से जुड़े कॉपीराइट विवाद को लेकर वह दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचे थे, जिसके बाद Meta ने संबंधित रील्स बहाल कर दी थीं.
1. मंच पर PM मोदी की मिमिक्री, राहुल गांधी का मजेदार जवाब
कार्यक्रम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसमें एक युवक मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिमिक्री करता नजर आया. वायरल क्लिप में युवक मोदी के बोलने और हंसने के अंदाज की नकल करता है. इसके बाद राहुल गांधी और युवक के बीच हल्की-फुल्की बातचीत होती दिखाई देती है. युवक ने मिमिक्री के अंदाज में बातचीत शुरू की My Friends और राहुल गांधी ने जवाब दिया. क्लिप में ‘How are you Modi ji?’ जैसी लाइन भी सुनाई देती है.
ग्रेट हरासमेंट. फिर हंसी. राहुल बोले Very Nice to Meet you brother, युवक- गलगोटिया. राहुल और बताइए थोड़ा- युवक- मां को कुर्सी दो. फिर पीएम मोदी का सिक्का चिपकाने वाला मिमिक्री किया. ये वीडियो सोशल में छाया हुआ है. आखिर ये युवक कहता है लवडेन भोज्यम और चला जाता है ये वीडियो काफी तेजी से वायरल हो रहा है. यही छोटा सा वीडियो अब कार्यक्रम के गंभीर राजनीतिक और छात्र मुद्दों वाले हिस्से से अलग सोशल मीडिया पर चर्चा बटोर रहा है.
2. राहुल गांधी ने छात्रों के सामने 'सिस्टम' का मुद्दा क्यों उठाया?
राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों को इसलिए खतरा माना जाता है क्योंकि वे सवाल पूछते हैं. उनके मुताबिक छात्र यह जानना चाहता है कि किसी संस्था की स्थिति खराब क्यों है, परीक्षाओं में पेपर लीक क्यों होते हैं और युवाओं को रोजगार से जुड़ी परेशानियों का सामना क्यों करना पड़ता है. उन्होंने छात्रों को जिज्ञासु बताते हुए कहा कि सवाल पूछना उनकी स्वाभाविक प्रवृत्ति है. उनके भाषण का मुख्य तर्क यह था कि शिक्षा व्यवस्था में छात्रों की आवाज और सवालों के लिए जगह होनी चाहिए.
3. 'सिस्टम को छात्र नहीं, अंधभक्त चाहिए' वाले बयान पर चर्चा
राहुल गांधी ने अपने भाषण में ‘अंधभक्त’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए कहा कि सिस्टम ऐसे लोगों को पसंद करता है जो सवाल नहीं पूछते. उन्होंने छात्र और ‘अंधभक्त’ के बीच अंतर बताते हुए कहा कि छात्र जिज्ञासु होता है और सवाल करता है.उन्होंने स्कूलों और कॉलेजों की स्थिति, पेपर लीक और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े सवाल भी उठाए. यह बयान उनके भाषण के सबसे ज्यादा चर्चा में आए हिस्सों में रहा. यह ध्यान रखना जरूरी है कि ‘अंधभक्त’ संबंधी ये टिप्पणियां राहुल गांधी के भाषण का हिस्सा थीं और इन्हें उनके राजनीतिक वक्तव्य के रूप में ही रिपोर्ट किया जाना चाहिए.
4. देश के 'सिस्टम' पर छह लोगों के नियंत्रण का दावा
राहुल गांधी ने कार्यक्रम में एक स्लाइड के जरिए अपने बताए ‘सिस्टम’ की संरचना समझाई. उन्होंने दावा किया कि इसकी शीर्ष परत में छह लोग हैं और इसमें नरेंद्र मोदी, अमित शाह, अजीत डोभाल, मोहन भागवत, गौतम अडानी और मुकेश अंबानी का नाम लिया. उन्होंने इन लोगों को अलग-अलग भूमिकाओं से जोड़ते हुए कई आरोप लगाए. इन आरोपों को स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि राहुल गांधी द्वारा कार्यक्रम में किए गए राजनीतिक दावों के रूप में प्रस्तुत किया जाना चाहिए. अमर उजाला और अन्य रिपोर्टों ने भी उनके इसी बयान को दर्ज किया है.
5. छात्रों ने भी राहुल गांधी के सामने रखीं अपनी परेशानियां
कार्यक्रम सिर्फ राहुल गांधी के भाषण तक सीमित नहीं रहा. छात्रों ने मंच से परीक्षा, भर्ती और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्याएं भी बताईं. एक छात्रा ने मध्य प्रदेश में सरकारी परीक्षाओं और नियुक्तियों से जुड़ी परेशानी का मुद्दा उठाया. रिपोर्टों के अनुसार, उसने बताया कि कानूनी विवाद के चलते कुछ नियुक्तियां अटकी हुई हैं. वहीं दूसरे छात्र ने MPPSC में कथित अनियमितताओं को सामने लाने के बाद अपने खिलाफ कार्रवाई होने का दावा किया.
6. विश्वविद्यालयों में 'फर्जीवाड़े और पारदर्शिता' का मुद्दा
कार्यक्रम में एक छात्र ने राहुल गांधी से बातचीत के दौरान विश्वविद्यालयों में कथित फर्जीवाड़े और पारदर्शिता की कमी की शिकायत की. छात्र ने कहा कि विश्वविद्यालय समस्याओं का समाधान करने में सक्षम नहीं दिख रहे हैं और छात्रों को अपने मुद्दों का उचित समाधान चाहिए. यह बातचीत ‘छात्रों की गूंज’ के मूल उद्देश्य से भी जुड़ी रही, जिसमें छात्रों की शिक्षा और भविष्य से जुड़े सवालों को सामने लाने की बात कही गई है.
7. राहुल गांधी ने रोजगार और खाली पदों का मुद्दा भी उठाया
राहुल गांधी ने सरकारी नौकरियों और खाली पदों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कई पद भरे नहीं जा रहे हैं और संविदा के जरिए काम चलाया जा रहा है. उन्होंने प्राइवेटाइजेशन और रोजगार के अवसरों को लेकर भी सवाल उठाए. उनका तर्क था कि युवाओं के भविष्य से जुड़े सवालों पर सरकार और संस्थानों को जवाब देना चाहिए.
8. 'छात्र सिर्फ इसलिए नहीं मानता क्योंकि उसे बताया गया'
राहुल गांधी ने छात्रों की भूमिका को लेकर कहा कि छात्र किसी बात को केवल इसलिए स्वीकार नहीं करता क्योंकि उसे कोई बात बता दी गई है. वह उसके पीछे की वजह जानना चाहता है. इसी संदर्भ में उन्होंने छात्रों को जिज्ञासु, सवाल पूछने वाला और अलग-अलग विचारों को समझने वाला बताया. उनके अनुसार, यही गुण लोकतांत्रिक व्यवस्था में युवाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बनाते हैं.
9. इंदौर से पहले किन शहरों में हुआ 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम?
इंदौर का कार्यक्रम इस पहल का पांचवां संस्करण था. इससे पहले राहुल गांधी ‘छात्रों की गूंज’ के कार्यक्रम कोटा, देहरादून, प्रयागराज और पुणे में कर चुके हैं. राहुल गांधी की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, इस पहल में छात्रों से शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक, रोजगार और भविष्य से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठाने का आह्वान किया गया है.
10. कार्यक्रम में असली मुद्दा क्या रहा- मिमिक्री या छात्रों के सवाल?
इंदौर का कार्यक्रम दो अलग-अलग वजहों से चर्चा में आया. एक तरफ सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री मोदी की मिमिक्री वाला वीडियो तेजी से शेयर किया गया, वहीं कार्यक्रम के मुख्य हिस्से में छात्रों की शिक्षा, परीक्षा, भर्ती, रोजगार और संस्थागत पारदर्शिता से जुड़े सवाल रहे. राहुल गांधी ने इन मुद्दों को ‘सिस्टम बनाम स्टूडेंट्स’ के फ्रेम में रखा और दावा किया कि छात्रों के सवालों से व्यवस्था को चुनौती मिलती है. दूसरी तरफ, उनके ‘छह लोगों’ और ‘अंधभक्त’ वाले बयान स्पष्ट रूप से उनके राजनीतिक भाषण और आरोपों का हिस्सा थे. यानी इंदौर की ‘छात्रों की गूंज’ में मंच पर मोदी की मिमिक्री वाला वायरल पल सोशल मीडिया की सुर्खी बना, लेकिन कार्यक्रम का बड़ा फोकस छात्रों के सवाल, शिक्षा व्यवस्था, भर्ती और रोजगार पर रहा.