अरे, दादा का एक्सीडेंट हुआ क्या? बेटे की मौत से पहले मां आशाताई का सवाल, स्टाफ ने कैसे छुपाई हादसे की बात?
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के विमान हादसे से पहले उनकी मां आशाताई पवार टीवी पर खबर देख रही थीं. बेटे का नाम फ्लैश होते ही उन्होंने पूछा- "क्या दादा का एक्सीडेंट हुआ है?” बारामती प्लेन क्रैश की भावुक कहानी और लैंडिंग से जुड़े बड़े सवाल.;
बुधवार की सुबह बारामती के फार्म हाउस में सब कुछ रोज़ जैसा ही था. अजित पवार की मां आशाताई पवार टीवी पर मराठी न्यूज़ चैनल देख रही थीं और नाश्ते की तैयारी चल रही थी. तभी स्क्रीन पर अचानक एक ब्रेकिंग फ्लैश हुई. खबर अधूरी थी, लेकिन नाम साफ दिख रहा था. आशाताई ने सहज भाव से पूछा, “अरे, क्या दादा का एक्सीडेंट हुआ है?” उस पल किसी को अंदाजा नहीं था कि यह सवाल कुछ ही देर में महाराष्ट्र की सबसे भारी खबर में बदल जाएगा.
अजित पवार बुधवार सुबह जिला परिषद चुनाव के प्रचार के लिए मुंबई से बारामती रवाना हुए थे. उनका कार्यक्रम पहले से तय था और स्थानीय कार्यकर्ता उनके स्वागत की तैयारी में लगे थे. लेकिन बारामती एयरपोर्ट पहुंचने से ठीक पहले उनका विमान हादसे का शिकार हो गया. इस दुर्घटना में अजित पवार समेत कुल पांच लोगों की मौत हो गई, और देखते ही देखते पूरे महाराष्ट्र में शोक की लहर दौड़ गई.
फार्म हाउस में बढ़ता सस्पेंस
हादसे के कुछ समय बाद टीवी पर खबरें लगातार आने लगीं. फार्म हाउस के मैनेजर संपत धायगुडे के मुताबिक सुबह करीब साढ़े आठ बजे न्यूज़ चैनलों पर विमान हादसे की खबर साफ-साफ चलने लगी. आशाताई को अब भी यही लग रहा था कि शायद कोई छोटी दुर्घटना हुई है और अजित पवार सुरक्षित होंगे. लेकिन परिवार के बाकी सदस्यों को हालात की गंभीरता का अंदाजा हो चुका था.
मां से सच छिपाने की मजबूरी
परिवार ने तय किया कि आशाताई तक पूरी सच्चाई तुरंत नहीं पहुंचनी चाहिए. टीवी केबल काट दी गई और यह कहकर टीवी बंद कर दिया गया कि तकनीकी खराबी आ गई है. उनका मोबाइल फोन भी फ्लाइट मोड पर डाल दिया गया, ताकि कोई कॉल या मैसेज न आ सके. सभी उन्हें यही समझाते रहे कि अजित पवार को मामूली चोट आई है और घबराने की कोई बात नहीं है.
मिलने की जिद और बेचैनी
इसके बावजूद आशाताई पवार बेचैन होती चली गईं. वे बार-बार अजित पवार से मिलने की बात कहने लगीं और आखिरकार पैदल ही फार्म हाउस से बाहर निकल पड़ीं. ड्राइवर ने गाड़ी खराब होने की बात कही, लेकिन वे मानने को तैयार नहीं थीं. हालात को संभालते हुए परिवार ने उन्हें बारामती स्थित बंगले पर ले जाने का फैसला किया, ताकि स्थिति को किसी तरह काबू में रखा जा सके.
बारामती: जहां राजनीति चमकी, वहीं हुआ अंत
बारामती अजित पवार की सियासत का केंद्र रहा. यहां से वे आठ बार विधायक और एक बार सांसद बने. इसी इलाके में उनका प्रभाव सबसे मजबूत माना जाता था. संयोग देखिए कि जिस बारामती के लिए वे उस सुबह निकले थे, वहीं उनकी आखिरी सांस भी ली गई. यह बात उनके समर्थकों को सबसे ज्यादा झकझोर रही है.
हादसे के आखिरी पल: क्या हुआ रनवे पर?
जानकारी के मुताबिक अजित पवार का विमान 28 जनवरी की सुबह 8:10 बजे मुंबई से उड़ा और करीब 40 मिनट में बारामती पहुंच गया. लैंडिंग के आखिरी पलों में पायलट ने पहली कोशिश की, लेकिन रनवे साफ दिखाई नहीं दिया. दूसरी कोशिश के दौरान 8:46 बजे विमान रनवे के पास क्रैश हो गया. हादसा इतना भयावह था कि किसी को बचने का मौका नहीं मिला.
विजिबिलिटी पर सवाल
शुरुआती रिपोर्ट में सामने आया है कि उस वक्त बारामती में विजिबिलिटी करीब 3 किलोमीटर थी, जबकि नियमों के मुताबिक कम से कम 5 किलोमीटर विजिबिलिटी जरूरी मानी जाती है. ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि इतनी कम दृश्यता में लैंडिंग की अनुमति किस आधार पर दी गई. अब इस हादसे की तकनीकी जांच के साथ-साथ यह भी देखा जा रहा है कि क्या नियमों का पालन हुआ था या नहीं क्योंकि इस एक फैसले ने महाराष्ट्र को अपूरणीय क्षति दे दी.