एडवोकेट उज्ज्वल निकम के जीवन पर आधारित फिल्म प्रहार की रिलीज डेट को फिलहाल टाल दिया गया है. फिल्म में एक्टर राजकुमार राव मुख्य भूमिका निभा रहे हैं. एक ट्रेड सोर्स ने बॉलीवुड हंगामा को बताया कि 'प्रहार' को 7 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज किया जाना था. हालांकि, मेकर्स ने अब इसकी रिलीज को टालने का फैसला किया है. स्टेकहोल्डर्स के साथ बातचीत के बाद, उन्हें लगा कि उस दौरान फिल्म को रिलीज करना सही नहीं होगा.

'प्रहार' के रिलीज होने से एक हफ्ते पहले 'स्पाइडर-मैन: ब्रांड न्यू डे' बड़े पर्दे पर आएगी और उसके एक हफ्ते बाद 'बंटवारा 1947' और 'आवारापन 2' रिलीज होंगी।  राजकुमार राव की यह फिल्म एक खास फिल्म है और इसे रिलीज के लिए एक अच्छा समय मिलना चाहिए. अगस्त में मैडॉक फिल्म्स की दो फिल्में रिलीज़ होने वाली थीं - 'प्रहार' (7 अगस्त) और 'ईथा' (28 अगस्त).

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कुछ दिन पहले ऐसी खबरें आई थीं कि श्रद्धा कपूर की फिल्म की रिलीज डेट आगे बढ़ाई जा रही है ताकि 'टॉक्सिक' (जो 26 अगस्त को रिलीज होने वाली है) के साथ टकराव से बचा जा सके. हालांकि, मेकर्स ने अभी तक आधिकारिक तौर पर यह कन्फर्म नहीं किया है कि दोनों फिल्में पोस्टपोन कर दी गई हैं.

खबरों के मुताबिक, 'प्रहार' वकील उज्ज्वल निकम द्वारा लड़े गए अहम मुकदमों पर आधारित है. यह 1993 के मुंबई धमाकों और 2008 के मुंबई 26/11 आतंकी हमलों के बाद चली कानूनी लड़ाइयों और मुकदमों को दिखाता है. इस फिल्म के डायरेक्टर अविनाश अरुण हैं और इसमें वामिका गब्बी भी मुख्य भूमिका में हैं. यह राजकुमार और वामिका की साथ में दूसरी फिल्म होगी. इससे पहले, दोनों ने 'भूल चूक माफ' में काम किया था, जो बॉक्स ऑफिस पर हिट रही थी. हालांकि टीजर ने सभी का ध्यान खींचा था, लेकिन यह देखना दिलचस्प होगा कि रिलीज होने के बाद 'प्रहार' को कैसा रिस्पॉन्स मिलता है.

उज्ज्वल निकम भारत के सबसे मशहूर, सीनियर और हाई-प्रोफाइल पब्लिक प्रोसिक्यूटर (सरकारी वकील) हैं. उन्होंने देश के कई ऐसे बड़े और संवेदनशील आपराधिक मामलों में सरकार का पक्ष रखा है, जिन्होंने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था. कानून के क्षेत्र में उनके शानदार करियर और सख्त रुख की वजह से उन्हें भारतीय कानूनी इतिहास में एक बेहद खास मुकाम हासिल है.

निकम की सबसे बड़ी पहचान 26/11 के मुंबई आतंकी हमले के मामले से जुड़ी है. इस ऐतिहासिक केस में वह मुख्य सरकारी वकील थे. उन्होंने ही आतंकी अजमल आमिर कसाब के खिलाफ अदालत में सबूत पेश किए और कानूनी दांव-पेचों को बखूबी संभालते हुए कसाब को फांसी के फंदे तक पहुंचाने में सबसे अहम भूमिका निभाई. उन्हें अन्य हाई-प्रोफाइल मामले के लिए भी जाना जाता है, जिसमें 1993 के मुंबई बम ब्लास्ट, गुलशन कुमार हत्याकांड, प्रमोद महाजन हत्याकांड और कोपर्डी और शक्ति मिल रेप केस जैसे हाई प्रोफाइल केस के लिए जाना जाता है.