प्रहार फिल्म का पहला गाना मेरे रहते रिलीज कर दिया गया है. फिल्म 16 अक्टूबर 2026 को रिलीज होगी. फिल्म के ट्रेलर को ऑडियंस का जबरदस्त रिस्पांस मिला. T-सीरीज़ और मैडॉक फिल्म्स ने गाना रिलीज किया है.

इस गाने को कंपोज और गाया विशाल मिश्रा ने हैं. गाने के लिरिक्स अमिताभ भट्टाचार्य ने लिखें हैं. फिल्म में एक्टर राज कुमार राव ने लीड रोल किया है. उन्होंने उज्जवल निकम का किरदार निभाया है. फिल्म को दिनेश विजयन ने प्रोड्यूस किया है जबकि अनिनाश अरुण ने डायरेक्ट किया है.

क्या हैं गाने के लिरिक्स

तेरे गुलसता की एक कली भी ना मुरझाएगी

कोई लाख बुरा चाहे पर तुझ पे आंच ना आएगी

मेरे रहते मेरे रहते मेरे रहते मेरे तेरे रहते

अरे सोने चिरैया पंख तेरे कोई नोच ना पाएगा

कभी चोट तुझे पहुंचाने की कोई सोच ना पाएगा

मेरे रहते मेरे रहते मेरे रहते मेरे रहते

मेरे रहते मेरे रहते मेरे रहते मेरे रहते।

सदियों से जो किया तुझ पे अभिमान सही पर

सच्चा है। कुछ तो है तुझ में बात तभी तू

सारे जहां से अच्छा है। तू सारे जहां से अच्छा है। तू सारे जहां से अच्छा है।

नापाक नजर वालों की तुझे कभी नजर ना लगने दूं।

तेरे आंगन में भटकी रूहों को कदम ना रखनेदूं मेरे रहते मेरे रहते मेरे रहते मेरे

रहते मेरे रहते मेरे मेरे रहते

रहते मलेजम सत्य श्यामला मातरम

वंदे मातरम वंदे मातरम

वंदे मातरम वंदे मातरम

2मेरे रहते मेरे रहते मेरे रहते मेरे रहते

Full View

क्या हुआ था 26-11 को? 

मुंबई का वो खौफनाक मंजर आज भी हर हिंदुस्तानी के दिल को दहला देता है. जब 26 नवंबर 2008 को समंदर के रास्ते आए 10 आतंकियों ने मायानगरी को खून से नहला दिया था. सुरक्षाबलों ने मुस्तैदी दिखाते हुए 9 हमलावरों को ढेर कर दिया, जबकि एक आतंकी जिंदा पकड़ा गया अजमल आमिर कसाब. कसाब की वो तस्वीर आज भी लोगों के जेहन में ताजा है, जिसमें वह हाथ में बंदूक थामे छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) पर बेगुनाहों को निशाना बना रहा था.

लेकिन इस पूरी त्रासदी के बाद देश के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा हुआ. जब कसाब का गुनाह पूरी दुनिया के सामने बेनकाब हो चुका था, कैमरे में उसकी लाइव तस्वीरें कैद थीं, तो फिर उसे फांसी के फंदे तक लटकाने में 4 साल का लंबा वक्त क्यों लग गया? आम जनता के मन में यह गुस्सा और उलझन सालों तक बनी रही. अब इसी अनसुने और पेचीदा सच से पर्दा उठाने आ रही है 'प्रहार'. यह फिल्म सिर्फ एक आतंकी की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस अदालती और कूटनीतिक लड़ाई का लेखा-जोखा है जो बंद दरवाजों के पीछे लड़ी गई थी.

कौन हैं उज्जवल निकम? 

फिल्म उज्जवल निकम के जीवन पर बेस्ड है. उज्ज्वल निकम भारत के सबसे मशहूर, सीनियर और हाई-प्रोफाइल पब्लिक प्रोसिक्यूटर (सरकारी वकील) हैं. उन्होंने देश के कई ऐसे बड़े और संवेदनशील आपराधिक मामलों में सरकार का पक्ष रखा है, जिन्होंने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था।. कानून के क्षेत्र में उनके शानदार करियर और सख्त रुख की वजह से उन्हें भारतीय कानूनी इतिहास में एक बेहद खास मुकाम हासिल है. उज्ज्वल निकम की सबसे बड़ी पहचान 26/11 के मुंबई आतंकी हमले के मामले से जुड़ी है.

इस ऐतिहासिक केस में वह मुख्य सरकारी वकील थे. उन्होंने ही आतंकी अजमल आमिर कसाब के खिलाफ अदालत में सबूत पेश किए और कानूनी दांव-पेचों को बखूबी संभालते हुए कसाब को फांसी के फंदे तक पहुंचाने में सबसे अहम भूमिका निभाई. उन्हें अन्य हाई-प्रोफाइल मामले के लिए भी जाना जाता है. जिसमें 1993 के मुंबई बम ब्लास्ट, गुलशन कुमार हत्याकांड, प्रमोद महाजन हत्याकांड और कोपर्डी और शक्ति मिल रेप केस जैसे हाई प्रोफाइल केस के लिए जाना जाता है.