Rajkumar Rao की Prahaar का दूसरा गाना 'तुझ में बसी मेरी जान' हुआ रिलीज, ऐसे हैं गाने के बोल, पति-पत्नी के गहरे रिश्ते पर है बेस्ड
राजकुमार राव और वामिका गब्बी की फिल्म 'प्रहार' का नया गाना 'तुझ में बसी मेरी जान' रिलीज हो गया है. श्रेया घोषाल और सोनू निगम की आवाज से सजे इस गाने में दोनों कलाकारों की शादी और खूबसूरत पारिवारिक जीवन की झलक दिखाई गई है. अमिताभ भट्टाचार्य के लिखे इस गाने को दर्शकों का प्यार मिलने की उम्मीद है. फिल्म 16 अक्टूबर 2026 को रिलीज होगी.
राजकुमार राव स्टारर फिल्म प्रहार का दूसरा गाना 'तुझ में बसी मेरी जान' रिलीज हो गया है. फिल्म 16 अक्टूबर 2026 को रिलीज होगी. फिल्म के ट्रेलर को ऑडियंस का जबरदस्त रिस्पांस मिला. T-सीरीज ने गाना रिलीज किया है.इस गाने को श्रेया घोषाल और सोनू निगम ने अपनी आवाज दी है जबकि अमिताभ भट्टाचार्या ने लिखा है. गाने में राजकुमार राव और वामिका गब्बी की शादी दिखाई गई है.
गाने का हर एक बोल खुद को जस्टीफाई करता है.गाने में शादी के खूबसूरत बंधन की अहमियत और प्यार भरे रिश्ते को दिखाया गया है जिसमें एक दूसरे की केयर की जाती है.दोनो के पारिवारिक जीवन को बहुत अच्छे से उकेरा गया है. इससे पहले फिल्म का पहला गाना मेरे रहते रिलीज किया जा चुका है.
क्या है गाने के बोल
मेरी जिंदगानी का इतना फसाना है जब तक
जीना है तुझसे निभाना है तेरे हर एहसास का
मुझे एहसास है कुछ नहीं चाहिए
तू जो मेरे पास है कहीं बात तेरी भी सुनी
रूह मेरी समझो आंखों की तेरी [संगीत] मैं जबान
रे तुझ में बसी मेरी जान [संगीत]
रे तुझ में बसी मेरी जान रे तू [संगीत] ही
मेरी पहचान रे तुझ में बसी सी मेरी जान रे
शादी मस्त आस
तमी के मन मास
प्रेम सेरे माग मा मुझको तो मेरी
परछाई से भी ज्यादा भरोसा तुझ पे है यारा
मांगे बिना ही सब कुछ मिला है तू जो मेहरबान
मुझ पे है या तेरी तकलीफ में हंसते हुए
झेल लूं बैर जमाने से तेरे लिए मैं ले लूं सुन
तुझको सोलाने जा तेरे सिवाने चैन तेरा ये मेरा इत्मीनान
तुझ में बसी मेरी जान रे तुझ
में बसी मेरी मेरी जान रे तुझ पे
तो मैं कुर्बान तुझ में बसे
मेरी जान रे मैं तुझे छोड़ के नहीं जाऊंगा आप जिस काम के लिए दिन रात मेहनत कर रहे
हैं आप उसे ऐसे अधूरा नहीं छोड़ सकते जाइए प्लीज इस जन्म में तेरा एहसान नहीं चुका पाऊंगा मैं
इसीलिए तो सात जन्म की ढील है तुझ में बसी मेरी जान रे
क्या हुआ था 26-11 को?
मुंबई का वो खौफनाक मंजर आज भी हर हिंदुस्तानी के दिल को दहला देता है. जब 26 नवंबर 2008 को समंदर के रास्ते आए 10 आतंकियों ने मायानगरी को खून से नहला दिया था. सुरक्षाबलों ने मुस्तैदी दिखाते हुए 9 हमलावरों को ढेर कर दिया, जबकि एक आतंकी जिंदा पकड़ा गया अजमल आमिर कसाब.
कसाब की वो तस्वीर आज भी लोगों के जेहन में ताजा है, जिसमें वह हाथ में बंदूक थामे छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) पर बेगुनाहों को निशाना बना रहा था. लेकिन इस पूरी त्रासदी के बाद देश के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा हुआ. जब कसाब का गुनाह पूरी दुनिया के सामने बेनकाब हो चुका था, कैमरे में उसकी लाइव तस्वीरें कैद थीं, तो फिर उसे फांसी के फंदे तक लटकाने में 4 साल का लंबा वक्त क्यों लग गया? आम जनता के मन में यह गुस्सा और उलझन सालों तक बनी रही. अब इसी अनसुने और पेचीदा सच से पर्दा उठाने आ रही है 'प्रहार'. यह फिल्म सिर्फ एक आतंकी की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस अदालती और कूटनीतिक लड़ाई का लेखा-जोखा है जो बंद दरवाजों के पीछे लड़ी गई थी.
कौन हैं उज्जवल निकम?
फिल्म उज्जवल निकम के जीवन पर बेस्ड है. उज्ज्वल निकम भारत के सबसे मशहूर, सीनियर और हाई-प्रोफाइल पब्लिक प्रोसिक्यूटर (सरकारी वकील) हैं. उन्होंने देश के कई ऐसे बड़े और संवेदनशील आपराधिक मामलों में सरकार का पक्ष रखा है, जिन्होंने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था।. कानून के क्षेत्र में उनके शानदार करियर और सख्त रुख की वजह से उन्हें भारतीय कानूनी इतिहास में एक बेहद खास मुकाम हासिल है. उज्ज्वल निकम की सबसे बड़ी पहचान 26/11 के मुंबई आतंकी हमले के मामले से जुड़ी है.
इस ऐतिहासिक केस में वह मुख्य सरकारी वकील थे. उन्होंने ही आतंकी अजमल आमिर कसाब के खिलाफ अदालत में सबूत पेश किए और कानूनी दांव-पेचों को बखूबी संभालते हुए कसाब को फांसी के फंदे तक पहुंचाने में सबसे अहम भूमिका निभाई. उन्हें अन्य हाई-प्रोफाइल मामले के लिए भी जाना जाता है. जिसमें 1993 के मुंबई बम ब्लास्ट, गुलशन कुमार हत्याकांड, प्रमोद महाजन हत्याकांड और कोपर्डी और शक्ति मिल रेप केस जैसे हाई प्रोफाइल केस के लिए जाना जाता है.