Manoj Bajpayee ने मांगा बड़ा रोल तो यश चोपड़ा बोले- मैं तेरे जैसे एक्टर्स के लिए... क्या है 22 साल पुराना किस्सा?
शेखर सुमन के शो में मनोज बाजपेयी ने 'वीर-ज़ारा' से जुड़ा दिलचस्प किस्सा साझा किया. उन्होंने बताया कि कैसे यश चोपड़ा ने उन्हें कैमियो ऑफर किया और बाद में ऐसी फीस दी, जिसकी उन्हें उम्मीद भी नहीं थी.
बॉलीवुड में जब भी किसी ऐसे एक्टर का नाम लिया जाता है जिसने बिना किसी गॉडफादर के, सिर्फ अपने टैलेंट के दम पर हिंदी सिनेमा की परिभाषा बदल दी, तो ज़हन में सबसे पहला नाम मनोज बाजपेयी (Manoj Bajpayee) का आता है. आज वे भारतीय सिनेमा के सबसे सम्मानित और प्रभावशाली एक्टर्स में से एक हैं. लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने का रास्ता फूलों का नहीं, बल्कि कांटों और कड़े फैसलों से भरा था.
हाल ही में शेखर सुमन के मशहूर टॉक शो 'शेखर टूनाइट' में शिरकत करते हुए मनोज बाजपेयी ने अपने करियर के उन सुनहरे और बेहद कठिन दिनों को याद किया. उन्होंने बताया कि कैसे कल्ट क्लासिक फिल्म 'सत्या' (1998) की अपार सफलता के बाद भी उन्हें आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा और कैसे उन्होंने पैसों के पीछे भागने के बजाय अपने क्रिएटिव सेल्फ-रेस्पेक्ट को चुना. इस बेबाक बातचीत में उन्होंने दिग्गज फिल्म निर्माता यश चोपड़ा और फिल्म 'वीर-ज़ारा' से जुड़ा एक ऐसा दिलचस्प किस्सा शेयर किया, जो आज के समय में किसी भी कलाकार के लिए एक बड़ी सीख है.
टाइपकास्ट होने का डर
साल 1998 में आई राम गोपाल वर्मा की फिल्म 'सत्या' ने मनोज बाजपेयी को रातों-रात स्टार बना दिया था. जिसमें मनोज ने सबसे आइकॉनिक 'भीखू म्हात्रे' का किरदार निभाया था जो भारतीय सिनेमा के इतिहास में अमर हो गया. इस फिल्म की सफलता के बाद मनोज के पास ऑफर्स की बाढ़ आ गई थी. हर बड़ा प्रोड्यूसर और डायरेक्टर उनके घर के चक्कर काट रहा था, लेकिन एक पेच था. हर कोई उन्हें सिर्फ 'खलनायक' या 'गैंग लीडर' की भूमिका ही ऑफर कर रहा था. 'सत्या' की सफलता के बाद मनोज को कई मोटी रकम वाले फिल्मी ऑफर मिले. इसका नतीजा यह हुआ कि जिन फिल्मों की स्क्रिप्ट उन्हें पसंद आ रही थी, उनके बजट बहुत कम थे और वहां फीस के नाम पर बहुत मामूली रकम मिल रही थी.
'वीर-ज़ारा' का वो यादगार वाकया
मनोज बाजपेयी हमेशा से लीक से हटकर सिनेमा करने के लिए जाने जाते थे, लेकिन उनके मन में एक कमर्शियल फिल्म मेकर के साथ काम करने की बड़ी इच्छा थी और वो थे रोमांस के बादशाह यश चोपड़ा. मनोज अच्छी कहानियों के इंतजार में थे, तभी एक दिन उनके पास खुद यश चोपड़ा का फोन आया. शेखर सुमन ने जब उनसे पूछा कि क्या उन्हें 'वीर-ज़ारा' में एक छोटा सा कैमियो करने का कोई मलाल है, तो मनोज ने मुस्कुराते हुए इस बात से साफ इनकार कर दिया.
'तू मेरी फिल्म करेगा'
उन्होंने उस कभी न भूलने वाली फोन कॉल को याद करते हुए बताया, 'यश जी ने मुझे फोन किया और पूछा, 'मेरी फिल्म में एक कैमियो है, तू करेगा क्या? मैंने तेरी फिल्म 'पिंजर' (2003) देखी थी और उसे देखते हुए मुझे लगा कि यह रोल सिर्फ और सिर्फ तू ही कर पाएगा.' यकीन मानिए, जब उन्होंने मुझसे यह कहा, तो मैं उनसे स्क्रिप्ट तक नहीं सुनना चाहता था. मेरा सपना था कि मैं उनके निर्देशन में काम करूं मैंने तुरंत हां करते हुए कहा, 'यश जी, बस मुझे बताइए कि कब आना है.' हालांकि मनोज बिना स्क्रिप्ट सुने जाने को तैयार थे, लेकिन यश चोपड़ा के बेटे और फिल्म के राइटर आदित्य चोपड़ा ने प्रोफेशनल तरीका अपनाते हुए मनोज को पूरा सीन और उनके किरदार के बारें में बताया.
'मैं तेरे जैसे एक्टर्स के लिए फिल्में नहीं बनाता'
'वीर-ज़ारा' (2004) में मनोज बाजपेयी ने 'रज़ा शिराज़ी' का किरदार निभाया था, जो प्रीति जिंटा (ज़ारा) का मंगेतर और एक पाकिस्तानी राजनेता का बेटा था. रोल भले ही छोटा था, लेकिन पूरी कहानी को पलटने के लिए बेहद अहम था. मनोज ने स्क्रिप्ट सुनने के बाद यश चोपड़ा से एक मजाकिया लेकिन गंभीर अनुरोध किया था. उन्होंने कहा, 'यश जी, इस बार तो मैं यह रोल कर रहा हूं, लेकिन अगली बार जब आप मेरे बारे में सोचें, तो कृपया मुझे कोई बड़ा रोल दीजिएगा.' इस पर यश चोपड़ा ने जो जवाब दिया, उसने मनोज का दिल जीत लिया.
यश जी ने बेहद ईमानदारी से कहा, 'बेटे, मैं तुम्हारे जैसे एक्टर्स के लिए फिल्में नहीं बनाता. मेरा सिनेमा अलग है और अगर भविष्य में मेरी फिल्मों में तुम्हारे लायक कोई रोल होगा भी, तो शायद तुम उसे अपनी क्राफ्ट के कारण करना पसंद नहीं करोगे. इसलिए, जो रोल अभी मिला है, उसे ही पूरे दिल से और बेहतरीन तरीके से करो.' यहां पर तुम्हारे जैसे एक्टर्स का मतलब था 'मेथड' और 'गंभीर'. मनोज बाजपेयी को यश चोपड़ा की यह बेबाकी बेहद पसंद आई. उन्हें अच्छा लगा कि एक इतने बड़े फिल्म निर्माता ने उनसे कोई झूठा वादा नहीं किया और सिनेमा के बाजार की कड़वी सच्चाई को उनके सामने रख दिया.
'लीड एक्टर' जितनी मिली रकम
इस फिल्म से जुड़ा सबसे दिलचस्प मोड़ तब आया जब बात फीस पर पहुंची. मनोज बाजपेयी यश चोपड़ा के प्रति इतने आदर से भरे थे कि उन्होंने इस कैमियो के लिए कोई भी पैसा लेने से साफ मना कर दिया था. उन्होंने यश चोपड़ा से कहा था कि वह यह रोल फ्री में करेंगे. लेकिन यश चोपड़ा अपने सिद्धांतों के पक्के थे. उन्होंने मनोज से कहा, 'तुम काम कर रहे हो, तो फीस तो तुम्हें मिलेगी.' इसके बाद जो हुआ, उसकी उम्मीद खुद मनोज बाजपेयी को भी नहीं थी. फिल्म की शूटिंग पूरी होने के बाद यश चोपड़ा ने मनोज को जो चेक भेजा उसकी रकम उतनी ही थी, जितनी मनोज उस दौर में किसी फिल्म में लीड एक्टर निभाने के लिए चार्ज किया करते थे. एक छोटे से कैमियो के लिए इतनी बड़ी रकम देना यश चोपड़ा के बड़प्पन था.
टाइमलेस फिल्म 'वीर-ज़ारा'
साल 2004 में रिलीज हुई 'वीर-ज़ारा' बॉक्सऑफिस पर खास कमाल नहीं कर पाई. लेकिन टीवी पर पहली बार ब्रॉडकास्ट होने के बाद इसे खूब पसंद किया गया. यश चोपड़ा के निर्देशन में बनी इस रोमांटिक ड्रामा फिल्म में शाहरुख खान (वीर प्रताप सिंह), प्रीति जिंटा (ज़ारा हयात खान) और रानी मुखर्जी (सामिया सिद्दीकी) मुख्य भूमिकाओं में थे. इनके अलावा फिल्म में अमिताभ बच्चन, हेमा मालिनी, दिव्या दत्ता, बोमन ईरानी, अनुपम खेर, किरण खेर और खुद मनोज बाजपेयी जैसे दिग्गज कलाकारों की फौज थी.