ऐसे गाने नहीं गाऊंगी! करीना कपूर इस हिट सॉन्ग गाने से Shreya Ghoshal ने किया था इंकार, चिकनी चमेली पर हुईं शर्मिदा
श्रेया घोषाल ने कहा कि उन्हें ‘चिकनी चमेली’ गाने से कोई शर्म नहीं है, लेकिन अब वे ऐसे गाने नहीं गाएंगी जिनमें महिलाओं का ऑब्जेक्टिफिकेशन हो. उन्होंने यह भी बताया कि कई बड़े ऑफर मिलने के बावजूद उन्होंने ऐसे कई गानों को ठुकरा दिया.
श्रेया घोषाल (Shreya Ghoshal) ने हाल ही में रियलिटी शो इंडियन आइडल में अपना पुराना सुपरहिट गाना 'चिकनी चमेली' गाया. इस गाने को गाने के बाद उन्हें सोशल मीडिया पर काफी ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा. वजह यह थी कि इससे महज 5 दिन पहले ही उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि जब छोटी-छोटी बच्चियां उनके ऐसे लोकप्रिय आइटम सॉन्ग गाती हैं, तो उन्हें बहुत शर्मिंदगी महसूस होती है. लोगों ने उन पर सवाल उठाया कि अगर उन्हें शर्म आती है, तो वे अभी भी कॉन्सर्ट में यह गाना क्यों गाती हैं? ट्रोलिंग के बाद अब श्रेया ने राज शामानी के पॉडकास्ट में अपनी पूरी बात स्पष्ट कर दी है.
श्रेया ने कहा कि उन्हें 'चिकनी चमेली' गाने से कोई शर्म नहीं है. वे इस गाने को पूरी तरह से अपना मानती हैं और अपने कॉन्सर्ट में इसे गाती रहेंगी. उनका कहना है कि यह गाना अच्छा है, इसमें म्यूजिक की खूबसूरती है और यह उन्हें अपनी कम्फर्ट जोन से बाहर निकलकर नई आवाज आजमाने का मौका भी देता था. उन्होंने बताया कि इस गाने को रिकॉर्ड करते समय उन्होंने करीब 12 कप कॉफी पी और बहुत मजे से इसे गाया था. यह उनके लिए एक चैलेंजिंग लेकिन मजेदार गाना था. लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी माना कि अब वे ऐसे गाने नहीं गाएंगी. गाने के बाद उन्हें कई बड़े-बड़े ऑफर मिले, लेकिन वे ज्यादातर ठुकरा चुकी हैं.
एक उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि एक बहुत प्यारे म्यूजिशियन दोस्त ने उन्हें एक फिल्म का गाना ऑफर किया, जिसमें बोल बहुत ज्यादा ऑब्जेक्टिफिकेशन वाले थे. जैसे 'चिकन बनाकर खा ले, ये कर के लिपट ले'. श्रेया ने कहा कि ऐसे शब्द वे मुंह से नहीं निकाल सकतीं, उनका चेहरा लाल हो जाता है. कई बार तो वे हाथ जोड़कर चुपके से वहां से निकल गईं. यह गाना शायद 'फेविकोल से' हो सकता है, जो 'दबंग 2' फिल्म का था, लेकिन उन्होंने इसे गाने से मना कर दिया.
श्रेया ने आगे समझाया कि 'चिकनी चमेली' में भी कुछ अच्छी और कुछ बुरी बातें थीं. बुरी बात यह कि इसके बोल थोड़े संकेत देने वाले हैं, लेकिन अच्छी बात यह कि गाने का जो वर्जन आया, वह काफी माइल्ड है. यह शब्दों का खेल है, इसका सीधा मतलब इतना गंदा नहीं है. उस समय उन्हें गाने का पूरा अर्थ अच्छे से समझ नहीं आया था, लेकिन अब वे ज्यादा जागरूक हो गई हैं.
उन्होंने कहा कि अगर कोई गाना हिट हो जाता है, तो उसे हर जगह गाना पड़ता है यहां तक कि जहां छोटे बच्चे भी हों. बच्चे उसे बिना मतलब समझे गाते या नाचते हैं, और यह देखकर उन्हें असहज लगता है. भारत में फिल्मों को 'ए' सर्टिफिकेट मिलता है, यानी 18+ उम्र वाले ही देख सकते हैं, लेकिन गानों पर ऐसा कोई नियम नहीं है.
हर उम्र का इंसान गाने सुनता है इसलिए अब वे ज्यादा सोच-समझकर गाने चुनती हैं. पिछले साल लिली सिंह से बातचीत में भी उन्होंने कहा था कि सेक्सी होने और महिलाओं को सिर्फ ऑब्जेक्ट की तरह दिखाने के बीच बहुत पतली रेखा होती है. समय के साथ वे इस बारे में ज्यादा सचेत हो गई हैं, क्योंकि छोटी बच्चियां 5-6 साल की बिना समझे ऐसे गाने गाती हैं, और यह अच्छा नहीं लगता.
श्रेया ने यह भी कहा कि अगर ये गीत किसी महिला ने लिखे होते, तो शायद वे और सुंदर और बैलेंस्ड होते. फिल्में और गाने लोगों की जिंदगी पर बहुत असर डालते हैं. कोई ब्लॉकबस्टर गाना या फिल्म इतिहास का हिस्सा बन जाता है, और वे ऐसे इतिहास का हिस्सा नहीं बनना चाहतीं जहां महिलाओं का वस्तुकरण हो.