मेरा मांस नोच के खाया है! Govind Namdev का शॉकिंग खुलासा, जब फूलन देवी ने ब्लाउज खोलकर दिखाए थे सीने के जख्म
'लल्लनटॉप' में गोविंद नामदेव ने खुलासा किया कि 'बैंडिट क्वीन' की शूटिंग के दौरान फूलन देवी ने अपने जख्म दिखाए थे. इस घटना ने फिल्म की पूरी टीम को हिला दिया था.
बॉलीवुड के दिग्गज गोविंद नामदेव (Govind Namdev) हाल ही में लल्लन टॉप में पहुंचे, जहां उन्होंने अपनी एक्टिंग जर्नी की कई अनकही कहानियां शेयर कीं. खास तौर पर उन्होंने 1994 में रिलीज़ हुई अपनी सबसे चर्चित फिल्म 'बैंडिट क्वीन' के बारे में बात की. जिसमें उन्होंने ठाकुर श्रीराम का एक बेहद पावरफुल और विवादास्पद किरदार निभाया था. यह फिल्म मशहूर निर्देशक शेखर कपूर द्वारा निर्देशित थी और यह चंबल घाटी की कुख्यात डाकू फूलन देवी की जिंदगी पर आधारित थी.
फिल्म की कहानी माला सेन की किताब India's Bandit Queen: The True Story of Phoolan Devi से इंस्पायर्ड थी. रिलीज़ के समय यह फिल्म काफी विवादों में घिर गई थी. कई आपत्तिजनक और संवेदनशील सीन होने के कारण इसे अस्थायी रूप से बैन भी कर दिया गया था. लेकिन बाद में दर्शकों और क्रिटिक्स ने इसे खूब सराहा. फिल्म ने तीन नेशनल फिल्म अवॉर्ड जीते. सीमा बिस्वास को बेस्ट एक्ट्रेस, डॉली अहलूवालिया को बेस्ट कॉस्ट्यूम डिज़ाइन और फिल्म को बेस्ट हिंदी फीचर फिल्म का अवॉर्ड मिला.
क्या है वो दिलचस्प किस्सा?
अब आते हैं उस दिलचस्प और दर्दनाक किस्से पर, जिसे गोविंद नामदेव ने लल्लन टॉप में शेयर किया. जब उनसे फिल्म की शूटिंग प्रोसेस के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बताया कि शूटिंग का एक अलग सिस्टम था. हर दो दिन की शूटिंग के बाद असिस्टेंट डायरेक्टर फूलन देवी को ब्रीफ देने जाता था कि दो दिन में क्या-क्या शूट हुआ क्योंकि नामदेव ने अपने एक पुराने इंटरव्यू में बताया था कि फूलन देवी की शर्त थी कि फिल्म उनके बारें में है इसलिए जो भी शूट होगा उन्हें ग्वालियर की जेल में आकर बताना होगा. शेखर उस वक्त फिल्म को हर हाल में बनाना चाहते थे और उन्हें यह शर्त मंजूर थी.
कितनी मुश्किल थी शूटिंग?
गोविंद नामदेव ने आगे बताया कि ठाकुर श्रीराम के किरदार की तैयारी उन्हें बहुत मुश्किल लग रही थी. डायरेक्शन डिपार्टमेंट से मिली जानकारी बेहद सीमित थी. बस एक-दो पुरानी अखबारों की कटिंग्स और एनकाउंटर वाली जगह का जिक्र. ठाकुर श्रीराम की फैमिली बैकग्राउंड, उनका बचपन, उनकी असली जिंदगी कुछ भी ठोस नहीं मिल रहा था. वे काफी परेशान थे कि इस क्रूर, ताकतवर और जटिल किरदार को कैसे निभाया जाए.
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जब कॉस्ट्यूम डिज़ाइनर पहुंची जेल
फिर एक दिन जब बात आई कि अगली ब्रीफिंग के लिए जेल कौन जाएगा, तो आमतौर पर शेखर कपूर अपने किसी असिस्टेंट को भेज देते थे. लेकिन इस बार फिल्म की कॉस्ट्यूम डिज़ाइनर डॉली अहलूवालिया ने खुद आगे बढ़कर कहा, 'मैं जाऊं क्या? फूलन देवी से मिलकर ब्रीफिंग देकर आऊं?. शेखर कपूर ने तुरंत हामी भर दी और उन्हें जाने की इजाजत दे दी. डॉली ने जेल में फूलन देवी से मुलाकात की, दो दिनों की शूटिंग का अपडेट दिया और आगे के सीन के बारे में बताया.
खोल दिया था फूलन देवी ने ब्लाउज
ब्रीफिंग खत्म होने के बाद डॉली ने फूलन से पूछा, 'आपके साथ ऐसा क्या-क्या हुआ था कि आपकी जिंदगी इतनी बदल गई? आप डाकू बन गईं और 24 ठाकुरों को गोली मारनी पड़ी. तब फूलन देवी ने अपनी पूरी दास्तान सुना दी बचपन से लेकर जबरन शादी, सामाजिक उत्पीड़न, पुलिस और ठाकुरों द्वारा बार-बार हुए अत्याचार, बलात्कार और शोषण की पूरी कहानी. यह सुनकर डॉली अहलूवालिया रो पड़ीं. फूलन देवी ने उन्हें देखकर कहा, 'तुम क्यों रो रही हो? मैंने जो तुम्हें बताया, वो तो मेरे दर्द का सिर्फ 50% है. मेरे साथ इससे कहीं ज्यादा बुरा हुआ है.' फिर फूलन ने अपने ब्लाउज के बटन खोले और डॉली को अपने सीने पर मौजूद गहरे, खुरदुरे और भयानक निशान दिखाए. उन्होंने कहा, 'ये निशान देख रही हो? मेरे सीने का मांस तक ठाकुरों ने नोच-नोचकर निकाल दिया था.'
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हर तबके के लोग ने शोषण किया
गोविंद नामदेव ने बताया कि डॉली जब यह सब सुनकर और देखकर वापस लौटीं, तो उनका चेहरा पूरी तरह बदल गया था. उन्होंने जो सुना और देखा, उसने गोविंद नामदेव को ठाकुर श्रीराम के किरदार की असली क्रूरता और उसकी जड़ों को समझने में बहुत मदद की. नामदेव ने कहा कि फूलन देवी की जिंदगी में हर स्तर पर शोषण हुआ था. पुलिस ने, ठाकुरों ने, समाज के हर तबके ने. कोई भी उन्हें बचा नहीं सका, बल्कि हर किसी ने उनका फायदा उठाया.