भोजपुरी इंडस्ट्री के आमिर खान कहलाते हैं Dinesh Lal Yadav, कैसा रहा 3500 रुपये महीने से 9.4 करोड़ तक का सफर
दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ की कहानी संघर्ष, संगीत और स्टारडम से होकर राजनीति तक पहुंचने की है. गाजीपुर के टंडवा गांव से निकलकर कोलकाता में पले-बढ़े निरहुआ ने बिरहा गायकी से पहचान बनाई और 'निरहुआ सटल रहे' एल्बम से भोजपुरी इंडस्ट्री में धमाका कर दिया. 'निरहुआ रिक्शावाला' ने उन्हें सुपरस्टार बनाया.;
दिनेश लाल यादव, जिन्हें दुनिया 'निरहुआ' के नाम से जानती है, की जिंदगी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है. 2 फरवरी 1979 को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के टंडवा गांव में जन्मे दिनेश का बचपन कोलकाता के बेलघोरिया इलाके में गुजरा. उनके पिता कुमार यादव एक साधारण परिवार से थे, जो सीमित संसाधनों में घर चलाते थे. दिनेश की जिंदगी की शुरुआत संघर्षों से भरी थी. घर की आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि दिनेश को पढ़ाई के साथ-साथ छोटे-मोटे काम करने पड़ते थे. लेकिन उनके खून में संगीत था. गाजीपुर की मिट्टी में बिरहा गायकी की परंपरा थी, और दिनेश के चचेरे भाई विजय लाल यादव और प्यारे लाल यादव पहले से ही बिरहा सम्राट के रूप में मशहूर थे. दिनेश ने उनके साथ मिलकर संगीत की दुनिया में कदम रखा.
2003 में, दिनेश ने अपना पहला एल्बम 'निरहुआ सटल रहे' रिलीज किया, जो भोजपुरी संगीत की दुनिया में धमाका साबित हुआ. इस एल्बम की सफलता ने उन्हें 'निरहुआ' का नाम दिया, जो उनके असली नाम से ज्यादा लोकप्रिय हो गया. यह एल्बम न सिर्फ उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और झारखंड में हिट हुआ, बल्कि दिनेश को भोजपुरी इंडस्ट्री का दरवाजा खोल दिया. संगीत से मिली पहचान ने उन्हें एक्टिंग की ओर मोड़ा. 2006 में उन्होंने अपनी पहली फिल्म 'हमका ऐसा वैसा ना समझा' से डेब्यू किया, लेकिन असली कामयाबी मिली 'चलत मुसाफिर मोह लियो रे' से. 2008 में 'निरहुआ रिक्शावाला' ने उन्हें स्टार बना दिया. इस फिल्म की सफलता इतनी बड़ी थी कि निरहुआ भोजपुरी सिनेमा के 'आमिर खान' कहलाने लगे.
दिनेश लाल यादव की खास फ़िल्में
उन्होंने अपने भाइयों दिवेश लाल यादव और प्रवेश लाल यादव के साथ मिलकर निरहुआ एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड नाम की प्रोडक्शन कंपनी शुरू की, जो आज भोजपुरी फिल्मों की बड़ी खिलाड़ी है. 2015 में निरहुआ ने लगातार पांच हिट फिल्में दीं- 'पटना से पाकिस्तान', 'निरहुआ रिक्शावाला 2', 'जिगरवाला', 'राजा बाबू' और 'गुलामी'. इन फिल्मों ने उन्हें भोजपुरी का सुपरस्टार बना दिया. उन्होंने 100 से ज्यादा फिल्मों में काम किया, जिनमें 'निरहुआ हिंदुस्तानी' सीरीज और 'बॉर्डर' जैसी ब्लॉकबस्टर शामिल हैं.
'पावर स्टार' वर्सेज 'निरहुआ'
लेकिन स्टारडम की राह आसान नहीं थी. भोजपुरी इंडस्ट्री में प्रतिस्पर्धा कड़ी है, और निरहुआ की राइवलरी कुछ बड़े नामों से रही है. सबसे बड़ा नाम है पवन सिंह के साथ. पवन सिंह, जो राजपूत समुदाय से हैं, भोजपुरी के 'पावर स्टार' कहलाते हैं. दोनों की फिल्में बॉक्स ऑफिस पर अक्सर टकराती हैं, और फैंस के बीच बहस होती है कि कौन नंबर वन है. उनकी राइवलरी को 'हेल्दी कॉम्पिटिशन' कहा जाता है, लेकिन कभी-कभी यह तीखी हो जाती है. दोनों ने साथ में काम किया है, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर उनकी फिल्मों की टक्कर ने इंडस्ट्री को नई एनर्जी दी. इसी तरह, खेसारी लाल यादव के साथ भी निरहुआ की राइवलरी मशहूर है. खेसारी, जो खुद यादव हैं, भोजपुरी के उभरते सितारे हैं. दोनों ने 'दूध का कर्ज' जैसी फिल्मों में साथ काम किया, लेकिन फैंस के बीच 'किंग ऑफ भोजपुरी' का ताज किसके सिर पर हो, इस पर जंग चलती रहती है.
बीच बाजार में जूता मारना चाहिए
हाल ही में, 2025 के बिहार विधानसभा चुनावों में यह राइवलरी राजनीतिक रंग ले चुकी थे. खेसारी आरजेडी से छपरा की सीट से चुनाव लड़ रहे थे. जबकि निरहुआ बीजेपी के सांसद हैं. निरहुआ ने खेसारी को 'कूप मंडूक' कहा, यानी कुएं का मेंढक, जो बड़ी बातें करता है लेकिन काम नहीं. सिर्फ इतना ही नहीं दिनेश ने खेसारी को बीज बाजार जूता मारने की बात तक कह दी थी. जब दिनेश से पूछा गया कि चुनाव आते ही खेसारी को क्या हो गया तो, दिनेश ने कहा, 'खेसारी भीड़ देखकर पागल जो गए है. उन्हें पता नहीं है यह भीड़ मनोज तिवारी, रवि किशन और निरउआ ने भी बहुत देखी है.' पवन सिंह ने भी अप्रत्यक्ष रूप से खेसारी पर तंज कसा कि 'कहा करो या किया करो'. यह राइवलरी अब सिर्फ फिल्मी नहीं, बल्कि राजनीतिक भी हो गई है. भोजपुरी इंडस्ट्री में जाति का असर भी दिखता है- निरहुआ और खेसारी यादव हैं, जबकि पवन राजपूत, जो किरदारों और फैनबेस को प्रभावित करता है फिर भी, ये राइवलरीज इंडस्ट्री को जीवंत रखती हैं, और फैंस को डबल एंटरटेनमेंट देती हैं.
हार गए थे चुनाव
निरहुआ की जिंदगी सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं रही. 2012 में उन्होंने 'बिग बॉस 6' में हिस्सा लिया, जहां उनकी सादगी ने दर्शकों का दिल जीता. फिर राजनीति में कदम रखा. 2019 में बीजेपी से आजमगढ़ से लोकसभा चुनाव लड़े, लेकिन हार गए. 2022 के उपचुनाव में जीतकर सांसद बने. आज वह राजनीति और फिल्मों दोनों में एक्टिव हैं. उनकी पत्नी मनसा देवी से 2000 में शादी हुई, और उनके दो बेटे आदित्य, अमित और बेटी अदिति हैं.
3500 रुपये 50 लाख तक
अब बात उनकी नेट वर्थ की तो एक समय 3500 रुपये महीना कमाने वाले निरहुआ आज करोड़पति हैं. 2024 के लोकसभा चुनाव के हलफनामे के अनुसार, उनकी कुल संपत्ति लगभग 9.4 करोड़ रुपये है, जिसमें 2.2 करोड़ की चल संपत्ति और 7.2 करोड़ की अचल संपत्ति शामिल है. वह एक फिल्म के लिए 40-50 लाख रुपये चार्ज करते हैं, और प्रोडक्शन हाउस से भी कमाई होती है. 2025-2026 तक यह आंकड़ा और बढ़ सकता है, क्योंकि उनकी फिल्में अभी भी हिट हो रही हैं. निरहुआ ने कई अवॉर्ड्स जीते, जैसे भोजपुरी फिल्म अवॉर्ड्स में बेस्ट एक्टर और 2016 में उत्तर प्रदेश सरकार से भारती सम्मान.