Dhurandhar 2 Review- रणवीर सिंह की करियर बेस्ट परफॉर्मेंस, थका सकता है 4 घंटे का रनटाइम; जानें कितनी देखने लायक है फिल्म

'धुरंधर: द रिवेंज' एक डार्क, इंटेंस और पॉलिटिकल थ्रिलर है जिसमें रणवीर सिंह ने दमदार परफॉर्मेंस दी है. हालांकि फिल्म का लंबा रनटाइम और स्लो सेकंड हाफ इसे हर दर्शक के लिए मुश्किल बना देता. स्टेट मिरर के लिए ये रिव्यू तनीशा टुटेजा ने किया है.

( Image Source:  IMDB )
By :  स्टेट मिरर डेस्क
Updated On : 19 March 2026 10:12 AM IST

Dhurandhar: The Revenge Review: अगर आप एक्शन, रिवेंज, पॉलिटिकल इंट्रिग और हाई-वोल्टेज ड्रामा पसंद करते हैं, तो 'धुरंधर: द रिवेंज' (Dhurandhar: The Revenge) आपके लिए थिएटर में जाना एक बड़ा एक्सपीरियंस हो सकता है. स्टेट मिरर ये फिल्म 'धुरंधर' पार्ट 1 की सीधी कंटिन्यूएशन है, और डायरेक्टर आदित्य धर ने इसे और भी बड़ा, बोल्ड और इंटेंस बनाने की पूरी कोशिश की है. लेकिन सच कहूं तो ये फिल्म हर किसी के लिए आसान नहीं है ये लंबी, ब्रूटल और मेंटली हैवी है. 

कहानी की शुरुआत और फील

थिएटर में घुसते ही आपको वो पुरानी वाली दुनिया याद आ जाती है. वही कैरेक्टर्स, वही टेंशन, वही गहरा बदला. फिल्म की कहानी जसकीरत सिंह रांगी से शुरू होती है, जो हालातों की मार से एक 'किलिंग मशीन' बन चुका है. उसका पास्ट इतना डार्क और इमोशनल है कि आपको देखते वक्त तैयार रहना पड़ता है. यहां सिर्फ एक ही इमोशन है बदला. फिर कहानी उसी पॉइंट पर लौटती है जहां जसकीरत अब हमजा अली मजारी बन चुका है. वो अब सिर्फ सर्वाइव नहीं कर रहा, बल्कि कंट्रोल करने की कोशिश कर रहा है. फर्स्ट हाफ में उसकी टैक्टिकल प्लानिंग, पॉलिटिकल समझ और इंटेलिजेंस स्किल्स बहुत अच्छे से दिखाई गई हैं. ये हिस्सा आपको स्क्रीन से चिपका के रखता है हर सीन में कुछ न कुछ होता रहता है. लेकिन इंटरवल के ठीक पहले एक बड़ा ट्विस्ट आता है, जो पूरी कहानी को बदल देता है. हमजा और जसकीरत के बीच का राज खुलने लगता है, और यहीं से फिल्म और ज्यादा इंटेंस हो जाती है. 

सेकंड हाफ- पॉलिटिकल लेयर और रियल इश्यू

सेकंड हाफ में फिल्म पूरी तरह खुलकर सामने आती है. यहां पंजाब में ड्रग्स का इश्यू, अलगाववादी फंडिंग, फेक करेंसी नेटवर्क और पाकिस्तान से जुड़े टेररिज्म को बहुत ओपनली दिखाया गया है. फिल्म में कई रियल-लाइफ इंस्पायर्ड इवेंट्स और पॉलिटिकल रेफरेंस हैं- जैसे क्रॉस-बॉर्डर टेररिज्म, डेमोक्रेटाइजेशन से जुड़े नैरेटिव वगैरह. ये सब मिलाकर कहानी को काफी रियलिस्टिक और इंगेजिंग बनाते हैं. लेकिन यहीं पर फिल्म थोड़ी रिस्की भी हो जाती है. जब फिक्शन और रियल इवेंट्स को इतना ज्यादा मिक्स कर दिया जाता है, तो कुछ जगहों पर ये कंट्रोवर्शियल लगने लगता है, और एंगेजमेंट थोड़ा कम हो जाता है. 

कैरेक्टर्स – कौन सबसे मजबूत है?

  • रणवीर सिंह- फिल्म की असली जान! जसकीरत से हमजा तक का ट्रांसफॉर्मेशन उन्होंने इतनी एनर्जी, इमोशन और इंटेंसिटी से किया है कि देखकर लगता है. ये उनका करियर बेस्ट परफॉर्मेंस है. हिंसा सिर्फ बॉडी पर नहीं, दिल पर भी असर करती है, और रणवीर ने दोनों को बैलेंस किया है. वो फिल्म को ऊपर उठाते हैं. 
  • संजय दत्त – SP असलम चौधरी इस बार और ज्यादा खतरनाक और एग्रेसिव हैं. उनके कई सीन में प्योर मेंनेस (डरावना खौफ) है, जो स्क्रीन पर छा जाता है. 
  • अर्जुन रामपाल- मेजर इकबाल वो विलेन है जिसकी पार्ट 1 से उम्मीद थी. उनका कैल्म, कैलकुलेटेड और ग्रे परफॉर्मेंस कहानी में अनप्रेडिक्टेबिलिटी जोड़ता है. 
  • राकेश बेदी- जामील जमाल! फिल्म के अंत तक वो इमोशनल कनेक्ट का सबसे बड़ा सोर्स बन जाते हैं. कई लोगों के लिए वो फिल्म का हिडन हीरो लग सकता है. 

बाकी कैरेक्टर्स जैसे सारा अर्जुन इमोशनल एंगल जोड़ते हैं, लेकिन उनकी डेप्थ उतनी मजबूत नहीं लगती जितनी उम्मीद थी. 

म्यूजिक और बैकग्राउंड स्कोर

फिल्म का फोकस म्यूजिक पर नहीं है. गाने ऐसे नहीं हैं कि याद रहें. लेकिन बैकग्राउंड स्कोर बहुत इंटेंस और हैवी है. एक्शन सीन और इमोशनल मोमेंट्स में ये स्कोर सीन को और पावरफुल बना देता है. साउंड डिजाइन की वजह से आप पूरी तरह इमर्स हो जाते हैं. 

डायरेक्शन और टेक्निकल 

आदित्य धर ने बहुत अम्बिशियस फिल्म बनाई है. स्केल बड़ा है, विजुअल्स ग्रैंड हैं, स्टोरीटेलिंग सिनेमैटिक है. एक्शन कोरियोग्राफी और विजुअल एक्जीक्यूशन टॉप क्लास हैं. लेकिन यही अम्बिशन कई जगह कमजोरी बन जाती है. स्टोरी को इतना एक्सपैंड किया है कि कई सीन जरूरत से ज्यादा लंबे लगते हैं. पेसिंग स्लो हो जाती है, और इमोशनल बैलेंस कई जगह खो जाता है. विजन बहुत मजबूत है, लेकिन एक्जीक्यूशन थोड़ा असमान है. 

ओवरऑल एक्सपीरियंस और फाइनल वर्डिक्ट

'धुरंधर: द रिवेंज' एक मिक्स्ड बैग है. फर्स्ट हाफ ग्रिपिंग, इंगेजिंग और इंपैक्टफुल है, लेकिन सेकंड हाफ नोटिसेबली स्लो और स्ट्रेच्ड लगता है. सबसे बड़ी प्रॉब्लम इसका रनटाइम है लगभग 3.5 से 4 घंटे की फिल्म. ये हर व्यूअर के पेशेंस लेवल का इम्तिहान लेने जैसा है. वायलेंस बहुत ब्रूटल है गालियां, खून-खराबा, सब कुछ पहले पार्ट से दोगुना इंटेंस. कुछ लोगों को ये रियलिज्म लगेगा, कुछ को ओवरडन. एक पॉइंट के बाद थकान महसूस होने लगती है 'बस अब बहुत हो गया' फिर भी, अगर आप इंटेंस, डार्क और हैवी सिनेमा पसंद करते हैं, तो ये आपके लिए मस्ट वॉच है. रणवीर सिंह की परफॉर्मेंस, एक्शन का स्केल और पावरफुल मोमेंट्स इसे यादगार बनाते हैं. लेकिन अगर आप लाइट एंटरटेनमेंट चाहते हैं, तो ये फिल्म आपके लिए थोड़ी टफ हो सकती है. स्टेट मिरर इसे 3.5 स्टार्स देता है. 

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