विजयपत सिंघानिया ने कैसे बदली थी Raymond Group की किस्मत? 6 Pointers

Raymond Group को नई पहचान दिलाने वाले विजयपत ने अपने विजन, मार्केटिंग कौशल और समय की नब्ज पहचानने की क्षमता के दम पर रेमंड को एक ब्रांड से बढ़ाकर एक भावना बना दिया.

मशहूर बिजनेसमैन विजयपत सिंघानिया

(Image Source:  X/ @genzdigest )
Edited By :  विशाल पुंडीर
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भारत के मशहूर बिजनेसमैन विजयपत सिंघानिया का 87 साल की उम्र में निधन हो गया. Raymond Group को नई पहचान दिलाने वाले विजयपत ने अपने विजन, मार्केटिंग कौशल और समय की नब्ज पहचानने की क्षमता के दम पर रेमंड को एक ब्रांड से बढ़ाकर एक भावना बना दिया.

उन्होंने ‘द कंप्लीट मैन’ की सोच को हर भारतीय घर तक पहुंचाया. भारत के कॉरपोरेट इतिहास में कुछ कहानियां सिर्फ सफलता की नहीं, बल्कि सोच बदलने की मिसाल बन जाती हैं और विजयपत सिंघानिया की कहानी उन्हीं में से एक है.

6 पॉइंटस में समझें पूरा सफर

1. विजयपत सिंघानिया का परिवार मूल रूप से राजस्थान से था, जो बाद में कानपुर और फिर मुंबई आकर बस गया. रेमंड की कहानी भी बेहद साधारण शुरुआत से शुरू हुई. साल 1925 में ‘वाडिया मिल्स’ के रूप में ठाणे में एक छोटी वूलन मिल की स्थापना हुई, जिसे बाद में E. D. Sassoon & Company ने खरीदकर ‘रेमंड वूलन मिल्स’ नाम दिया. 1944 में JK Group ने इस मिल का अधिग्रहण किया और इसकी जिम्मेदारी कैलाशपत सिंघानिया को सौंपी गई.

2. 1958 में महज 20 वर्ष की उम्र में विजयपत सिंघानिया ने कंपनी के कामकाज में कदम रखा. उस समय उनके साथ गोपाल कृष्ण सिंघानिया भी कंपनी को संभाल रहे थे. धीरे-धीरे उन्होंने बिजनेस की बारीकियों को समझा और 1980 में पूरी तरह से कंपनी की कमान अपने हाथों में ले ली.

3. साल 1980 में नेतृत्व संभालने के बाद विजयपत सिंघानिया ने रेमंड को नई दिशा दी. उन्होंने छोटे शहरों तक शोरूम खोलकर ब्रांड की पहुंच बढ़ाई और आधुनिक तकनीक को अपनाकर क्वालिटी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया.

4. विजयपत सिंघानिया की सबसे बड़ी ताकत उनकी मार्केटिंग समझ थी. उन्होंने यह पहचाना कि भारतीय ग्राहक सिर्फ कपड़ा नहीं, बल्कि भावनाएं खरीदता है. उन्होंने ‘फील्स लाइक हैवन’ और ‘द कंप्लीट मैन’ जैसे अभियानों के जरिए रेमंड को एक इमोशनल ब्रांड में बदल दिया. जहां उस दौर में अन्य ब्रांड्स मर्दानगी को ताकत और आक्रामकता से जोड़ते थे, वहीं रेमंड ने एक संवेदनशील, पारिवारिक और सुसंस्कृत पुरुष की छवि पेश की.

5. साल 1986 में उन्होंने Park Avenue लॉन्च किया, जिसने रेडी-टू-वियर सेगमेंट में नई क्रांति ला दी. इसके बाद 1990 में विदेशों में शोरूम खोलकर उन्होंने वैश्विक बाजार में भी भारतीय ब्रांड की मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई.

6. 1980 से 2000 के बीच विजयपत सिंघानिया ने रेमंड ग्रुप को बहुआयामी पहचान दी. कंपनी ने टेक्सटाइल के अलावा सिंथेटिक फैब्रिक, डेनिम, स्टील, इंडस्ट्रियल फाइल्स और सीमेंट जैसे क्षेत्रों में भी कदम रखा. उन्होंने यह साबित किया कि एक मजबूत बिजनेस साम्राज्य केवल एक प्रोडक्ट पर निर्भर नहीं रह सकता.

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