ईरान युद्ध की आंच से कांपा बाजार: खुलते ही सेंसेक्‍स में 1100 अंकों की गिरावट, निफ्टी भी 330 अंक टूटा; कच्चा तेल 13% उछला

Iran War Impact: अमेरिका-इज़राइल हमलों और ईरान की जवाबी कार्रवाई के बाद भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई. BSE Sensex 1100 अंक और Nifty 50 330 अंक टूट गया, जबकि ब्रेंट क्रूड 13% तक उछला.

( Image Source:  Sora AI )
Edited By :  प्रवीण सिंह
Updated On : 2 March 2026 9:47 AM IST

Iran War Impact: पश्चिम एशिया में अमेरिका-इज़राइल के हमलों और ईरान की जवाबी कार्रवाई के बाद सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में तगड़ी गिरावट दर्ज की गई. बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज का सूचकांक सेंसेक्‍स बाजार खुलते ही करीब 1100 अंक गिर गया. वहीं नेशनल स्‍टॉक एक्‍सचेंज के निफ्टी में भी 330 अंकों की गिरावट दर्ज की गई.

निवेशक पहले से ही अनुमान लगए बैठे थे कि इस जंग का असर बाजार पर जरूर देखने को मिलेगा. बात करें GIFT निफ्टी की तो उसमें भी 300 अंकों से ज्‍यादा की गिरावट दर्ज की गई है. कच्चे तेल में 13% तक उछाल और सोने-चांदी में तेज रैली ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है.

बाजार में गैप-डाउन ओपनिंग क्यों हुई?

सोमवार को भारतीय इक्विटी बाजारों में तेज गिरावट के साथ कारोबार शुरू हुआ. BSE का सेंसेक्स 1,100 अंक टूट गया, जबकि NSE का निफ्टी 50 करीब 330 अंक नीचे आ गया. प्री-ओपन सेशन में स्थिति और गंभीर थी. सेंसेक्स 3.4% यानी 2,743 अंक गिरकर 78,543.73 पर था, जबकि निफ्टी 2.06% या 519.40 अंक फिसलकर 24,659.25 पर ट्रेड कर रहा था.

GIFT निफ्टी ने पहले ही क्या संकेत दे दिए थे?

कारोबार शुरू होने से पहले ही GIFT निफ्टी 150 अंकों से ज्यादा गिर चुका था, जिससे साफ संकेत मिल रहा था कि दलाल स्ट्रीट पर गैप-डाउन ओपनिंग होगी. वैश्विक बाजारों में वीकेंड के दौरान आई बिकवाली ने निवेशकों का भरोसा कमजोर किया.

पश्चिम एशिया में तनाव क्यों बढ़ा?

तनाव उस समय और गहरा गया जब अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर बड़े हमले किए. इन हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्‍ला अली खामेनेई मौत हो गई. इसके बाद ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों और क्षेत्रीय लक्ष्यों पर जवाबी कार्रवाई की. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप पर ईरान ने “खतरनाक लाल रेखा पार करने” का आरोप लगाया है. हालात ऐसे हैं कि तेल आपूर्ति मार्ग और एयर हब भी प्रभावित हो रहे हैं.

कच्चे तेल में 13% उछाल क्यों आया?

ब्रेंट क्रूड सोमवार सुबह 13% तक उछलकर 82 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया, हालांकि बाद में कुछ गिरावट आई. ओमान की खाड़ी में ईरानी युद्धपोत पर अमेरिकी हमले के बाद आशंका है कि ईरान होरमुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही बाधित कर सकता है. भारत अपनी लगभग 85% तेल जरूरतें आयात करता है. यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहीं, तो भारत के ट्रेड बैलेंस और चालू खाते पर दबाव बढ़ सकता है.

एशियाई और अमेरिकी बाजारों का हाल कैसा रहा?

एशियाई बाजारों में भी बिकवाली हावी रही. जापान का निक्केई 225 लगभग 2% गिरा, जबकि टॉपिक्स इंडेक्स 2.1% नीचे रहा. अमेरिकी फ्यूचर्स भी दबाव में दिखे. डॉउ जोन्स फ्यूचर्स 571 अंक (1.2%) गिरा, S&P 500 फ्यूचर्स 1% और Nasdaq 100 फ्यूचर्स 1% से ज्यादा फिसले. बढ़ते तनाव के बीच निवेशकों ने सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख किया.

Similar News