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शी जिनपिंग को अपनो ने लूटा! चीनी सेना में मचा हड़कंप, जांच के घेरे में ये Top जनरल

चीनी राजनीति और सेना में जबरदस्त हलचल मच गई है. राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सबसे करीबी माने जाने वाले टॉप सैन्य जनरल झांग यूश्या जांच के घेरे में आ गए हैं. चीन के रक्षा मंत्रालय ने ‘अनुशासन और कानून के गंभीर उल्लंघन’ की पुष्टि की है. इस घटनाक्रम के बाद सत्ता के भीतर गहरी दरार और अंदरूनी साजिशों की चर्चाएं तेज हो गई हैं. एक्सपर्ट्स इसे शी जिनपिंग के खिलाफ चले अंदरूनी खेल और उसके पलटवार से जोड़कर देख रहे हैं. इससे साफ है कि चीनी सेना और कम्युनिस्ट पार्टी में भरोसे का संकट गहराता जा रहा है.

xi jinping china army top general crisis zhang youxia investigation
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xi jinping china army top general crisis zhang youxia investigation

( Image Source:  Sora AI )
सागर द्विवेदी
By: सागर द्विवेदी

Updated on: 25 Jan 2026 11:07 AM IST

चीन की सत्ता के गलियारों में एक बार फिर साजिश, सस्पेंशन और सख्त कार्रवाई की गूंज सुनाई दे रही है. सवाल बड़ा है और सनसनीखेज भी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को हटाने की साजिश रची जा रही थी? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के सबसे ताकतवर जनरलों में गिने जाने वाले झांग यूश्या अचानक जांच के दायरे में आ गए हैं.

चीनी रक्षा मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (CMC) के वाइस चेयरमैन झांग यूश्या पर ‘अनुशासन और कानून के गंभीर उल्लंघन’ के आरोपों की जांच चल रही है. खास बात यह है कि झांग को लंबे समय तक शी जिनपिंग का सबसे भरोसेमंद सैन्य साथी माना जाता रहा है. ऐसे में यह कार्रवाई सिर्फ एक प्रशासनिक कदम नहीं, बल्कि सत्ता संघर्ष का बड़ा संकेत मानी जा रही है.

कौन हैं झांग यूश्या, जिनसे कांप उठा बीजिंग?

75 वर्षीय झांग यूश्या चीनी सेना की सबसे ताकतवर संस्था सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के उपाध्यक्ष हैं. वह वही शख्स हैं जो सीधे राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ सेना की कमान संभालते रहे हैं. 1968 में सेना में शामिल हुए झांग जमीनी लड़ाकू बलों से निकले अनुभवी जनरल माने जाते हैं. दशकों तक PLA में सेवा देने के बाद वह सत्ता के उस शिखर तक पहुंचे, जहां से गिरना लगभग नामुमकिन समझा जाता था, लेकिन अब वही जनरल जांच मशीनरी की गिरफ्त में हैं.

चीन में ‘अनुशासन उल्लंघन’ एक बेहद भारी शब्द है. अक्सर इसका मतलब होता है—भ्रष्टाचार, सत्ता का दुरुपयोग या पार्टी लाइन से बगावत. ऐसे मामलों का अंत आमतौर पर पद से हटाने, गिरफ्तारी और कड़ी सजा तक जाता है.

क्या शी जिनपिंग को हटाने की चल रही थी अंदरूनी साजिश?

झांग यूश्या और सैन्य रणनीति प्रमुख ल्यू झेनली के खिलाफ अचानक शुरू हुई कार्रवाई ने बीजिंग में हड़कंप मचा दिया है. यही वजह है कि अब इसे सिर्फ अनुशासन का मामला नहीं माना जा रहा. चीन मामलों की जानकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता जेनिफर जेंग ने इस पूरे घटनाक्रम पर बड़ा दावा किया है. उनके मुताबिक, शी जिनपिंग को सत्ता से हटाने की कोशिश भीतर ही भीतर चल रही थी और झांग यूश्या उसी खेमे का हिस्सा थे.

जेंग का कहना है कि पूर्व राष्ट्रपति हू जिंताओ, पूर्व प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ और झांग यूश्या जैसे दिग्गज मिलकर शी जिनपिंग की ताकत कम करना चाहते थे. उनका मकसद पार्टी को खत्म करना नहीं, बल्कि चीन को फिर से देंग शियाओपिंग के दौर की सामूहिक नेतृत्व प्रणाली में लौटाना था.

बीमारी की अफवाह और गिरफ्तारी का जाल?

जेनिफर जेंग का दावा और भी चौंकाने वाला है. उनके अनुसार, हाल ही में शी जिनपिंग के बीमार होने और अस्पताल में भर्ती होने की खबरें दरअसल एक रणनीतिक चाल थीं. मकसद था—विरोधी गुट को भ्रम में डालना. इसी दौरान एक अहम बैठक में झांग यूश्या सिर्फ चार सुरक्षा कर्मियों के साथ पहुंचे. लेकिन वहां पहले से मौजूद सौ से ज्यादा सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें घेर लिया और हिरासत में ले लिया गया.

कुछ रिपोर्ट्स यहां तक कहती हैं कि झांग वाकई शी जिनपिंग को हटाने की योजना बना रहे थे, लेकिन किसी ने इसकी भनक पहले ही दे दी. यानी साजिश पलटकर खुद साजिशकर्ताओं के खिलाफ हथियार बन गई.

शी जिनपिंग का सख्त संदेश: कोई भी अछूता नहीं

दिलचस्प बात यह है कि इससे पहले एक और CMC वाइस चेयरमैन हे वेइडोंग को हटाने की खबर महीनों तक दबाकर रखी गई थी. लेकिन झांग यूश्या के मामले में कार्रवाई की घोषणा तुरंत कर दी गई. विशेषज्ञ मानते हैं कि यह शी जिनपिंग का साफ संदेश है. सेना हो या पार्टी, विरोध की कोई गुंजाइश नहीं. जेनिफर जेंग के शब्दों में, 'कम्युनिस्ट पार्टी के भीतर बैठे लोग अब समझने लगे हैं कि सिर्फ चेहरे बदलने से कुछ नहीं बदलेगा. या तो पूरा सिस्टम बदलेगा या फिर डर और सख्ती का यही दौर चलता रहेगा.'

क्या टूट रहा है चीन की सत्ता का संतुलन?

झांग यूश्या पर कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि चीन की सत्ता अब सिर्फ बाहरी दुनिया के लिए ही नहीं, अंदर से भी बेहद अस्थिर दौर में है. शी जिनपिंग की पकड़ मजबूत जरूर दिखती है, लेकिन लगातार सैन्य अधिकारियों पर गिरती गाज इस बात का संकेत है कि पार्टी के भीतर असंतोष गहराता जा रहा है. सवाल यही है- क्या यह अंत है या किसी और बड़े तूफान की शुरुआत?

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