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बुलंदशहर में जन्म-AMU में पढ़ाई और अब अमेरिका में जीता चुनाव, कहानी इतिहास रचने वाली Saba Haider की

सबा हैदर भारतीय मूल की अमेरिकी राजनेता हैं, जिनका परिवार यूपी के बुलंदशहर से ताल्लुक रखता है. AMU से वाइल्डलाइफ साइंस की पढ़ाई करने वाली सबा ने अमेरिका के इलिनॉय में चुनाव जीतकर अपनी अलग पहचान बनाई है.

Saba Haider
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( Image Source:  instagram-@sabahaiderdist84 )
हेमा पंत
Edited By:हेमा पंत8 Mins Read

Updated on: 6 Nov 2026 5:22 PM IST

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से निकली एक महिला ने हजारों किलोमीटर दूर अमेरिका में अपनी मेहनत से ऐसी पहचान बनाई है, जिसकी चर्चा अब भारत में भी हो रही है. कभी वन्यजीवों के बीच रहकर काम करने वाली और लोगों को योग सिखाने वाली सबा हैदर आज अमेरिकी राजनीति का जाना-पहचाना नाम बन गई हैं. उन्होंने 3 नवंबर को हुए चुनाव में इलिनॉय की 84वीं हाउस डिस्ट्रिक्ट सीट पर शानदार जीत हासिल की.

उनकी इस कामयाबी के पीछे सिर्फ चुनाव लड़ने की कहानी नहीं है, बल्कि पढ़ाई, नए देश में खुद को स्थापित करने, सामाजिक काम करने और लोगों के बीच भरोसा बनाने का लंबा सफर है. आखिर कौन हैं सबा हैदर, भारत से अमेरिका कैसे पहुंचीं और राजनीति में उन्होंने अपनी जगह कैसे बनाई? चलिए जानते हैं.

कौन हैं सबा हैदर?

सबा हैदर का नाता उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले से है. उनका जन्म भारत में हुआ और पढ़ाई-लिखाई भी यहीं हुई. आगे की शिक्षा के लिए उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का रुख किया. यहां उन्होंने वाइल्डलाइफ साइंस में मास्टर डिग्री ली. पढ़ाई पूरी करने के बाद सबा ने भारत में ही वाइल्डलाइफ इकोलॉजिस्ट के तौर पर काम किया. यानी उनका शुरुआती करियर राजनीति या किसी सरकारी पद से नहीं, बल्कि जंगलों और वन्यजीवों से जुड़े काम से शुरू हुआ था. उस समय शायद उन्होंने भी नहीं सोचा होगा कि आगे चलकर उनका रास्ता अमेरिका की चुनावी राजनीति तक पहुंचेगा.

सबा क्यों गई थीं अमेरिका?

सबा की जिंदगी में एक बड़ा बदलाव तब आया, जब वह अपने पति अली के साथ अमेरिका चली गईं. करीब 19 साल पहले भारत छोड़कर उन्होंने इलिनॉय में नई जिंदगी शुरू की. एक नए देश में परिवार बसाना और वहां अपनी अलग पहचान बनाना उनके लिए जिंदगी का नया चैप्टर था. शिकागो सन-टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने खुद को भारत से अमेरिका आई प्रवासी महिला बताया था. उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका पहुंचने के बाद उन्होंने अपने परिवार और स्थानीय समुदाय के साथ रिश्ते मजबूत करने में समय लगाया. हालांकि, अमेरिका जाकर उन्होंने अपने काम का दायरा सिर्फ घर और परिवार तक सीमित नहीं रखा. उन्होंने लोगों से जुड़ना शुरू किया और धीरे-धीरे हेल्थ, एजुकेशन और सोशल एक्टिविटीज में सक्रिय भूमिका निभाने लगीं.

वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट योग और मेडिटेशन टीचर

सबा हैदर का प्रोफेशनल जर्नी कई अलग-अलग क्षेत्रों से होकर गुजरा है. भारत में जहां वह वन्यजीवों के साथ काम करती थीं, वहीं अमेरिका में उन्होंने हेल्थ और वेलनेस की दुनिया में कदम रखा. वह योग और ध्यान सिखाने लगीं और इसी क्षेत्र में अपना छोटा कारोबार भी खड़ा किया. उनके काम का तरीका भी काफी दिलचस्प रहा. वह केवल आम लोगों को ही योग नहीं सिखाती थीं, बल्कि कंपनियों और सामाजिक संस्थाओं से जुड़े लोगों के लिए भी क्लासेस होस्ट करती थीं . इस तरह उन्होंने अपने पेशे के जरिए अलग-अलग समुदायों के लोगों के साथ जुड़ने का मौका बनाया. सबा का मानना रहा कि हेल्दी जीवन और बेहतर समाज एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं. यही वजह है कि आगे चलकर उनकी दिलचस्पी सार्वजनिक स्वास्थ्य और समुदाय के विकास जैसे विषयों में भी बढ़ी.

कैसे बनाया राजनीति में करियर?

instagram-@sabahaiderdist84

सबा हैदर का राजनीति की तरफ बढ़ना अचानक लिया गया फैसला नहीं था. अमेरिका में रहते हुए उन्होंने स्थानीय लोगों की जरूरतों को करीब से समझा और कई सामाजिक संस्थाओं के साथ काम किया. वह इंडियन प्रेयरी एजुकेशनल फाउंडेशन की डायरेक्टर रहीं. इसके अलावा स्कूल डिस्ट्रिक्ट 204 की पैरेंट डायवर्सिटी एडवाइजरी काउंसिल से भी जुड़ीं. उन्होंने विल और डुपेज काउंटी में डेमोक्रेटिक पार्टी के एशियन अमेरिकन एंड पैसिफिक आइलैंडर कॉकस को खड़ा करने में भी भूमिका निभाई. वह इसकी सह-संस्थापक और अध्यक्ष रहीं. इन जिम्मेदारियों ने उन्हें स्थानीय स्तर पर लोगों के बीच काम करने का एक्सपीरियंस दिया. स्वास्थ्य, बच्चों की शिक्षा, पर्यावरण और प्रवासी परिवारों से जुड़े मुद्दे उनके काम का अहम हिस्सा बनते गए.

2024 में जीता डुपेज काउंटी बोर्ड

सबा ने अपनी इसी सामाजिक पहचान को राजनीति में आगे बढ़ाया. साल 2024 में उन्होंने डुपेज काउंटी बोर्ड के डिस्ट्रिक्ट 5 का चुनाव जीता. इस जीत के साथ उन्होंने उस सीट पर डेमोक्रेटिक पार्टी को सफलता दिलाई, जहां पहले रिपब्लिकन पार्टी का कब्जा था. बोर्ड में पहुंचने के बाद उन्हें कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलीं. वह स्ट्रैटेजिक प्लानिंग और पर्यावरण से जुड़ी समितियों की अध्यक्ष बनीं. इसके साथ ही आर्थिक विकास, वित्त, न्यायिक मामलों और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े कामों में भी उनकी भागीदारी रही. जनवरी 2026 में डुपेज काउंटी बोर्ड ने उन्हें डुपेज हाउसिंग अथॉरिटी का कमिश्नर नियुक्त करने को मंजूरी दी. इस पद पर उनका कार्यकाल दिसंबर 2030 तक तय किया गया. स्थानीय राजनीति में रहते हुए सबा ने आम परिवारों के लिए सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं, बेहतर शिक्षा और मानसिक स्वास्थ्य सुविधाओं की जरूरत पर जोर दिया. वह चाहती थीं कि प्रवासी परिवार भी बिना किसी डर के सरकारी सुविधाओं का लाभ उठा सकें.

2026 में फिर जीता इतने परसेंट से चुनाव?

instagram-@sabahaiderdist84

अब सबा हैदर ने अपने राजनीतिक सफर में एक और बड़ी उपलब्धि जोड़ ली है. 3 नवंबर 2026 को हुए अमेरिकी चुनाव में उन्होंने इलिनॉय की 84वीं हाउस डिस्ट्रिक्ट सीट से डेमोक्रेटिक उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा. उनके सामने रिपब्लिकन उम्मीदवार ब्रायन स्कोपा थे. चुनाव में सबा को 20,756 वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी को 8,520 मत हासिल हुए. इस तरह सबा ने 70.9 प्रतिशत वोट के साथ जीत दर्ज की. उनकी इस सफलता को भारतीय मूल के लोगों की अमेरिकी राजनीति में बढ़ती भागीदारी के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

जीत के बाद किसे दिया अपनी कामयाबी का श्रेय?

चुनाव जीतने के बाद सबा ने अपने समर्थकों और साथ काम करने वाले लोगों के प्रति आभार जताया. उन्होंने बताया कि उनकी टीम ने लगभग 15 महीने तक पूरे चुनाव क्षेत्र में लोगों से मुलाकात की. इस दौरान घर-घर जाकर उनकी समस्याएं सुनी गईं और यह समझने की कोशिश की गई कि वे अपने इलाके में किस तरह का बदलाव चाहते हैं. सबा ने अपनी जीत को किसी एक व्यक्ति की उपलब्धि के बजाय पूरे समुदाय की सफलता बताया. उनके मुताबिक, चुनाव का असली मकसद उन लोगों के लिए बेहतर भविष्य तैयार करना था, जो उस इलाके में रहते हैं.

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