अमेरिकी चुनाव में छाने वाली Pia Dandiya कौन, जयपुर से क्या कनेक्शन, ट्रंप-बाइडेन के साथ कर चुकी हैं काम
अमेरिका की सियासत में अपनी जगह बनाने वाली पिया दांडिया की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है. भारतीय जड़ों से जुड़ी पिया ने टेक्नोलॉजी की दुनिया से निकलकर अमेरिकी सत्ता के गलियारों तक का सफर तय किया है.
अमेरिका की राजनीति में पिया डांडिया का नाम इन दिनों चर्चा में है. इसकी वजह है फ्लोरिडा की 22वीं कांग्रेसनल सीट पर उनकी जीत. भारतीय परिवार में जन्मी और अमेरिका में पली-बढ़ी पिया ने अपनी मेहनत के दम पर राजनीति तक का सफर तय किया है. दिलचस्प बात यह है कि उनके माता-पिता कभी राजस्थान के जयपुर से अमेरिका गए थे.
आज उनकी बेटी अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के लिए चुनी गई हैं. राजनीति में आने से पहले पिया ने बच्चों को पढ़ाया, स्कूल की जिम्मेदारी संभाली, व्हाइट हाउस में काम किया और फिर दुनिया की जानी-मानी टेक कंपनी एप्पल का हिस्सा बनीं. उनकी जिंदगी का सफर बताता है कि उन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों में काम करते हुए अपनी पहचान बनाई.
कौन हैं पिया डांडिया?
पिया डांडिया का बचपन अमेरिका के फ्लोरिडा में बीता. उनका परिवार मूल रूप से भारत से है. उनके माता-पिता 1980 के दशक में जयपुर छोड़कर अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित जुपिटर शहर में बस गए थे. पिया का जन्म और पालन-पोषण पाम बीच काउंटी में हुआ. वह ऐसे परिवार से आती हैं, जिसने भारत से जाकर अमेरिका में नई जिंदगी शुरू की. पिया के पिता डॉक्टर थे और मां ने बच्चों की शुरुआती शिक्षा के लिए मॉन्टेसरी स्कूल खोला था. घर में शिक्षा को खास महत्व दिया जाता था. शायद यही वजह रही कि पिया ने भी अपने करियर की शुरुआत पढ़ाई-लिखाई से जुड़े काम से की.
कितनी पढ़ी-लिखी हैं पिया डांडिया?
पिया पढ़ाई में भी काफी आगे रहीं. उन्होंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से गवर्नमेंट विषय में बैचलर ऑफ आर्ट्स की डिग्री ली. इसके बाद बोस्टन यूनिवर्सिटी से शिक्षा के क्षेत्र में मास्टर डिग्री हासिल की. उनकी पढ़ाई ने उन्हें सरकारी व्यवस्था और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को समझने का मौका दिया. आगे चलकर यही दोनों विषय उनके काम का अहम हिस्सा बने.
28 साल की उम्र में बनीं प्रिंसिपल
डिग्री लेने के बाद पिया ने बोस्टन में टीचर के तौर पर काम शुरू किया. वह 'टीच फॉर अमेरिका' इवेंट से जुड़ीं और मिडिल स्कूल के बच्चों को मैथ्स पढ़ाने लगीं. कुछ समय बाद उन्हें न्यूयॉर्क में शिक्षकों के ट्रेनिंग और डेवलेपमेंट से जुड़ी जिम्मेदारी मिली. पिया के करियर में बड़ा बदलाव तब आया, जब 28 साल की उम्र में उन्हें न्यूयॉर्क के हार्लेम में डेमोक्रेसी प्रेप एंड्योरेंस हाई स्कूल की पहली प्रिंसिपल बनने का मौका मिला. यह उनके लिए बड़ी जिम्मेदारी थी, क्योंकि उन्हें स्कूल की शुरुआत से लेकर पढ़ाई की व्यवस्था तक सब कुछ संभालना था. उन्होंने वहां बच्चों की शिक्षा को बेहतर बनाने पर काम किया.
ट्रंप और बाइडेन के दौर में किया काम
पिया के काम को देखते हुए उन्हें 2020-21 के व्हाइट हाउस फेलो कार्यक्रम में जगह मिली. इस कार्यक्रम के तहत उन्होंने अमेरिकी शिक्षा विभाग में काम किया. यहां उन्हें सरकारी नीतियों को करीब से समझने का मौका मिला. उन्होंने बच्चों के विकास, स्कूलों में मिलने वाले मील और शिक्षा की सुविधाओं को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने जैसे मुद्दों पर काम किया. उनका कार्यकाल ट्रंप प्रशासन के आखिरी दौर से शुरू होकर बाइडेन प्रशासन तक फैला रहा. इस दौरान उन्हें दोनों सरकारों के काम करने के तरीके को देखने और समझने का मौका मिला.
एप्पल में भी संभाली अहम जिम्मेदारी
जनवरी 2022 में पिया ने एप्पल कंपनी के साथ काम करना शुरू किया. यहां उनका काम सरकारी विभागों के साथ मिलकर योजनाएं तैयार करना और तकनीक के जरिए सुविधाओं को बेहतर बनाने से जुड़ा था. शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी सेवाओं में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाने पर उन्होंने काम किया. इस अनुभव ने उन्हें प्रशासन और निजी क्षेत्र, दोनों की कार्यशैली समझने में मदद की.
पिया डांडिया का राजनीतिक करियर
instagram-@piaforcongress
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पिया ने जून 2025 में फ्लोरिडा की 21वीं कांग्रेसनल सीट से चुनाव लड़ने का ऐलान किया था. शुरुआत में उनका मुकाबला रिपब्लिकन सांसद ब्रायन मास्ट से होना था. लेकिन 2026 में फ्लोरिडा के चुनावी क्षेत्रों की सीमाएं बदलने के बाद उन्होंने 22वीं सीट से अपनी दावेदारी पेश की. 18 अगस्त 2026 को हुए डेमोक्रेटिक प्राइमरी चुनाव में उन्होंने कायसिया अर्ली को हराया. इसके बाद 3 नवंबर को आम चुनाव में रिपब्लिकन उम्मीदवार केसी अस्कर से मुकाबला हुआ. पिया ने इस चुनाव में जीत हासिल की और अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के लिए निर्वाचित हुईं.
क्या हैं पिया के चुनावी एजेंडे?
चुनाव के दौरान पिया ने महंगाई, महंगे मकान, बच्चों की देखभाल और स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती लागत को प्रमुख मुद्दा बनाया. उनका कहना है कि आम परिवारों पर खर्च का बोझ कम होना चाहिए. वह सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने और छोटे बच्चों के लिए शुरुआती शिक्षा की सुविधाएं बढ़ाने की भी समर्थक हैं. इसके अलावा उन्होंने सोशल सिक्योरिटी और मेडिकेयर जैसी सरकारी योजनाओं को सुरक्षित रखने की बात कही. दवाइयों की कीमत कम करने और सांसदों के शेयर बाजार में निजी निवेश पर रोक लगाने जैसे सुझाव भी उनके एजेंडे में शामिल रहे.




