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कौन हैं बिलहारी कौसिकन, जिन्होंने पाकिस्तान का कराया सच से सामना? परमाणु हथियार से लेकर 'शांतिदूत' की छवि पर जमकर धोया

सिंगापुर के पूर्व राजदूत बिलाहारी कौसिकन ने कहा कि पाकिस्तान की मौजूदा बदहाली के लिए भारत या अफगानिस्तान नहीं, बल्कि उसकी अपनी सेना और राजनीतिक नेतृत्व जिम्मेदार हैं। उनका कहना है कि हालिया कूटनीतिक सफलता भी देश की आर्थिक और प्रशासनिक समस्याओं का समाधान नहीं कर सकती।

Bilahari Kausikan
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बिलहारी कौसिकन

( Image Source:  x.com/burhan_uddin_0/@salah_shoaib )

Pakistan Crisis: पाकिस्तान एक बार फिर अपनी आर्थिक और राजनीतिक चुनौतियों को लेकर वैश्विक चर्चा में है. इस बीच सिंगापुर के पूर्व राजदूत बिलाहारी कौसिकन (Bilahari Kausikan) ने पाकिस्तान की मौजूदा स्थिति पर बेहद तीखी टिप्पणी की है. उन्होंने साफ कहा कि पाकिस्तान की समस्याओं के लिए भारत या अफगानिस्तान जिम्मेदार नहीं हैं, बल्कि इसकी जड़ देश की खराब शासन व्यवस्था और सेना की राजनीति में दखल है.

एक वैश्विक सम्मेलन में बोलते हुए कौसिकन ने कहा कि पाकिस्तान लंबे समय से अपनी भौगोलिक स्थिति और पड़ोसी देशों को अपनी समस्याओं का कारण बताता रहा है, जबकि असल वजह उसके अपने राजनीतिक और प्रशासनिक फैसले हैं. उन्होंने कहा कि हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता में पाकिस्तान की भूमिका से उसे कुछ कूटनीतिक लाभ जरूर मिला है, लेकिन इससे देश के आम लोगों की समस्याएं खत्म नहीं होंगी.

कौसिकन ने क्या-क्या कहा?

  • चर्चा के दौरान एक पाकिस्तानी पत्रकार ने कहा कि पाकिस्तान की ज्यादातर मुश्किलें उसकी भौगोलिक स्थिति और भारत-अफगानिस्तान जैसे पड़ोसियों के कारण हैं. इस पर बिलाहारी कौसिकन ने असहमति जताते हुए कहा कि हर समस्या के लिए लोकेशन को दोष देना केवल एक बहाना है. उन्होंने कहा, "आप हर चीज के लिए अपनी भौगोलिक स्थिति को जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते। यह सिर्फ एक बहाना है."
  • पूर्व राजदूत ने पाकिस्तान के राजनीतिक नेतृत्व और सेना दोनों को देश की मौजूदा स्थिति के लिए जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की शुरुआत से ही गलत तरीके से शासन किया गया और सेना लगातार राजनीति व प्रशासन में प्रभावशाली भूमिका निभाती रही.
  • कौसिकन ने कहा, "पाकिस्तान की शुरुआत से ही बेहद खराब तरीके से व्यवस्था चलाई गई है. मुझे इसका कोई आसान समाधान नजर नहीं आता. वहां के नेता समय की बर्बादी हैं, चाहे वे किसी भी दल के हों, और सेना भी इस समस्या का बड़ा हिस्सा है."
  • कौसिकन ने माना कि अमेरिका-ईरान विवाद में मध्यस्थता कर पाकिस्तान ने कूटनीतिक स्तर पर अपनी छवि सुधारने की कोशिश की है और इससे अमेरिका की नजर में कुछ सकारात्मक संदेश गया है। लेकिन उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि देश की आर्थिक परेशानियां दूर नहीं कर सकती।
  • पूर्व राजदूत ने कहा, "पाकिस्तान ने एक कूटनीतिक अवसर का अच्छा फायदा उठाया और इससे उसकी अंतरराष्ट्रीय छवि कुछ बेहतर हुई है, लेकिन इससे पाकिस्तान के लोगों का पेट नहीं भरने वाला."
  • जब कौसिकन से पूछा गया कि अगले पांच वर्षों में पाकिस्तान की स्थिति कैसी हो सकती है, तो उन्होंने कहा कि पाकिस्तान एक ऐसे देश की तरह है जो 'विफल राष्ट्र बनने की कगार पर खड़ा है.'
  • पूर्व राजदूत ने कहा कि हालिया कूटनीतिक उपलब्धियां पाकिस्तान की मूल समस्याओं को नहीं बदल सकतीं. अमेरिका भी पाकिस्तान पर लगे सभी प्रतिबंध या सीमाएं पूरी तरह हटाने की संभावना नहीं रखता.

आर्थिक संकट अब भी बरकरार

हाल के महीनों में पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच अंतरिम शांति प्रयासों में भूमिका निभाकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुछ सकारात्मक पहचान जरूर बनाई है। इसके बावजूद देश गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है और अब भी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) तथा विश्व बैंक (World Bank) जैसी संस्थाओं की आर्थिक सहायता पर काफी हद तक निर्भर है। वहीं, पाकिस्तान के अखबार Dawn की एक रिपोर्ट में भी देश को गंभीर खाद्य संकट झेल रहे देशों की सूची में शामिल किया गया है।

कौन हैं बिलहारी कौसिकन?

  • बिलहारी कौसिकन सिंगापुर के एक बेहद प्रतिष्ठित और अनुभवी पूर्व राजनयिक हैं. उन्होंने अपने 37 वर्षों के करियर में सिंगापुर के विदेश मंत्रालय में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है.
  • वह 2001 से 2013 तक सिंगापुर के विदेश मंत्रालय में द्वितीय स्थायी सचिव और फिर स्थायी सचिव रहे. इसके बाद वे मई 2018 तक विदेश मंत्रालय में 'एम्बेसडर-एट-लार्ज' (Ambassador-at-Large) के पद पर तैनात रहे.
  • अपने करियर के दौरान उन्होंने संयुक्त राष्ट्र (न्यूयॉर्क) में सिंगापुर के स्थायी प्रतिनिधि और रूसी संघ (रूस) में सिंगापुर के राजदूत के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं.
  • सेवानिवृत्ति के बाद से वह सिंगापुर के नेशनल यूनिवर्सिटी (NUS) के मिडिल ईस्ट इंस्टीट्यूट के अध्यक्ष के रूप में भी सक्रिय रहे हैं.
  • अंतरराष्ट्रीय मामलों और भू-राजनीति पर उनकी गहरी पकड़ है. वह अक्सर चीन-अमेरिका संबंधों, एशिया-प्रशांत क्षेत्र और आसियान (ASEAN) पर अपनी बेबाक और स्पष्ट टिप्पणियों के लिए जाने जाते हैं. उन्हें कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर वैश्विक प्रवृत्तियों पर चर्चा करते हुए देखा जाता है.
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