Venezuela Attack: वेनेजुएला के पास ऐसा क्या है कि अमेरिका ने काराकास पर बरसा दिए बम?
वेनेजुएला की राजधानी काराकास पर अमेरिकी हमले के बाद दुनिया भर में हलचल तेज हो गई है. सवाल उठ रहा है कि आखिर वेनेजुएला के पास ऐसा क्या है, जिसे लेकर अमेरिका इतना आक्रामक हो गया. दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार, ड्रग्स के आरोप, मादुरो बनाम ट्रंप की जंग और भू-राजनीतिक हित इस पूरी कहानी में तेल सबसे बड़ी वजह बनकर सामने आ रहा है.
जिस आशंका की लंबे समय से चर्चा थी, वह आखिरकार हकीकत बन गई. शनिवार तड़के करीब 2 बजे वेनेजुएला की राजधानी काराकास में जोरदार धमाकों की आवाजें गूंजीं. कम से कम सात विस्फोटों की पुष्टि हुई, जिनमें सैन्य ठिकानों और रक्षा मंत्री के आवास को निशाना बनाए जाने की बात सामने आई. सरकार ने इसे देश की संप्रभुता पर सीधा हमला बताया और तुरंत आपातकाल लागू कर दिया.
वेनेजुएला सरकार का आरोप है कि यह हमला सिर्फ सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि देश की राजनीतिक आज़ादी को कुचलने की साजिश है. आधिकारिक बयान में कहा गया कि नागरिक और सैन्य ठिकानों पर हमला कर देश को अस्थिर करने की कोशिश की गई, ताकि उसके रणनीतिक संसाधनों पर कब्जा जमाया जा सके.
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देशव्यापी रक्षा अलर्ट
हमले के बाद राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने सभी राष्ट्रीय रक्षा योजनाओं को तुरंत लागू करने के आदेश दिए. सेना, स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया. मादुरो ने साफ कहा कि वेनेजुएला किसी भी बाहरी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है.
ड्रग्स के नाम पर बढ़ता टकराव
अमेरिका और वेनेजुएला के बीच तनाव अचानक नहीं बढ़ा. ड्रग तस्करी के आरोपों को लेकर पहले से ही दोनों देशों में खटास थी. अमेरिका का दावा है कि वेनेजुएला के कुछ शीर्ष नेता ड्रग कार्टेल से जुड़े हैं, जबकि कराकास इन आरोपों को राजनीतिक बहाना बताता है.
ट्रंप की सख्ती
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने मादुरो पर नशीले पदार्थों की तस्करी में संलिप्तता का आरोप लगाते हुए उनकी गिरफ्तारी पर इनाम को बढ़ाकर 5 करोड़ डॉलर कर दिया. इसी दौरान अमेरिकी युद्धपोतों की तैनाती और सैन्य गतिविधियों ने हालात को और विस्फोटक बना दिया.
असल वजह: वेनेजुएला की ‘काली दौलत’
सवाल उठता है कि अमेरिका की इतनी दिलचस्पी आखिर क्यों? जवाब छिपा है वेनेजुएला की जमीन के नीचे. यह देश दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार का मालिक है. अनुमान है कि यहां 300 अरब बैरल से ज्यादा कच्चा तेल मौजूद है, जो किसी भी महाशक्ति की रणनीतिक भूख बढ़ाने के लिए काफी है.
वेनेजुएला के पास क्या-क्या है?
- दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार: वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा प्रमाणित कच्चे तेल का भंडार है. ऑरिनोको बेल्ट में मौजूद यह तेल किसी भी महाशक्ति के लिए रणनीतिक खजाना माना जाता है.
- ऑरिनोको ऑयल बेल्ट (Orinoco Belt): यह इलाका वेनेजुएला की ऊर्जा ताकत की रीढ़ है. यहां भारी और अति-भारी कच्चा तेल मौजूद है, जिसकी वैश्विक मांग बेहद ज्यादा है.
- प्राकृतिक गैस के विशाल भंडार: तेल के साथ-साथ वेनेजुएला के पास दक्षिण अमेरिका के सबसे बड़े प्राकृतिक गैस भंडारों में से एक है, जो भविष्य की ऊर्जा राजनीति में अहम भूमिका निभा सकता है.
- सोने की खदानें: वेनेजुएला लैटिन अमेरिका के बड़े गोल्ड प्रोड्यूसर देशों में शामिल है. सोना उसकी विदेशी मुद्रा और रणनीतिक संपत्ति का बड़ा हिस्सा है.
- दुर्लभ खनिज और धातुएं: देश में बॉक्साइट, लोहा, कोयला और अन्य खनिज पाए जाते हैं, जो रक्षा और उद्योग दोनों के लिए महत्वपूर्ण हैं.
- भू-राजनीतिक स्थिति: वेनेजुएला कैरिबियन सागर के पास स्थित है, जिससे यह अमेरिका के बेहद करीब होने के बावजूद उसके प्रभाव से बाहर रहने वाला अहम देश बन जाता है.
- ऊर्जा निर्यात की क्षमता: अगर प्रतिबंध न हों, तो वेनेजुएला अमेरिका, यूरोप और एशिया को बड़े पैमाने पर तेल सप्लाई कर सकता है—यही बात उसे ग्लोबल एनर्जी गेम में ताकत देती है.
- कृषि संसाधन: कॉफी, गन्ना, मकई, चावल और कोको जैसी फसलें वेनेजुएला में होती हैं. हालांकि अर्थव्यवस्था में इनका योगदान तेल से कम रहा है.
तेल पर टिकी अर्थव्यवस्था
एक दौर में वेनेजुएला की कुल कमाई का करीब 90 फीसदी हिस्सा तेल से आता था. तेल के अलावा यहां प्राकृतिक गैस, सोना, बॉक्साइट और कोयले के भंडार भी हैं, लेकिन असली ताकत हमेशा पेट्रोलियम ही रहा. यही वजह है कि तेल की कीमतों में गिरावट ने देश की अर्थव्यवस्था को गहरे संकट में डाल दिया.
तेल गिरा तो हिली व्यवस्था
2013 के बाद तेल के दाम गिरे, राजनीतिक अस्थिरता बढ़ी और नतीजा यह हुआ कि महंगाई आसमान छूने लगी. बेरोजगारी बढ़ी, खाने-पीने का संकट खड़ा हुआ. हालात इतने बिगड़े कि वेनेजुएला दुनिया के सबसे बड़े आर्थिक संकटों में गिना जाने लगा.
अब बदलने की कोशिश
इस झटके के बाद सरकार ने सबक लिया. तेल पर निर्भरता कम करने के लिए कृषि और पर्यटन को बढ़ावा दिया गया. कॉफी, मकई, चावल और गन्ने की खेती को प्रोत्साहन मिला. बदलाव की प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन सच्चाई यह है कि आज भी वेनेजुएला की रीढ़ तेल ही है.
ट्रंप की नजरें क्यों टिकी हैं?
ह्यूगो शावेज से लेकर मादुरो तक, वेनेजुएला के नेताओं ने अमेरिकी दबाव के आगे झुकने से इनकार किया. यही बात वॉशिंगटन को सबसे ज्यादा चुभती रही. तेल जैसे रणनीतिक संसाधन और अमेरिका-विरोधी रुख—इन दोनों ने मिलकर वेनेजुएला को वैश्विक राजनीति का सबसे संवेदनशील मोर्चा बना दिया है. यही वजह है कि यहां हर धमाका सिर्फ बम का नहीं, बल्कि सत्ता और संसाधनों की जंग का संकेत है.





