110 दिन की जंग के बाद मिडिल ईस्ट में शांति की दस्तक! US-Iran शांति समझौते पर लगी मुहर, अब क्या-क्या बदलने वाला है? Detail
110 दिनों के संघर्ष के बाद अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर हस्ताक्षर हो गए हैं. जानिए इस डील के बाद मिडिल ईस्ट में क्या बदलेगा, नेवल ब्लॉकेड, अमेरिकी सेना की वापसी और होर्मुज को लेकर क्या हैं प्रावधान?
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और ईरानी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को समाप्त करने के उद्देश्य से तैयार किए गए समझौता ज्ञापन (Memorandum of Understanding) पर हस्ताक्षर हो गए हैं. इसे तीन महीने से अधिक समय से जारी युद्ध के बाद एक बड़ी कूटनीतिक सफलता माना जा रहा है. फ्रांस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के बाद वर्साय पैलेस से रवाना होते समय पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि समझौते पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर कर दिए गए हैं.
ट्रंप ने कहा, "इस पर हस्ताक्षर हो चुके हैं. मैंने वर्साय में इस पर हस्ताक्षर किए हैं." ईरान ने भी घोषणा की कि समझौता ज्ञापन को अंतिम रूप दे दिया गया है. ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baqaei ने बताया कि दोनों पक्षों द्वारा डिजिटल हस्ताक्षर प्रक्रिया पूरी करने के बाद यह समझौता आधिकारिक रूप से लागू हो गया है.
ईरान ने क्या कहा?
सरकारी प्रसारक IRIB से बातचीत में बकाई ने कहा, "यह तय हुआ था कि ईरान-अमेरिका समझौता ज्ञापन पर डिजिटल माध्यम से हस्ताक्षर किए जाएंगे. अब दोनों पक्षों के हस्ताक्षर होने के बाद यह समझौता आधिकारिक रूप से अंतिम रूप ले चुका है."
इस घोषणा के बाद शुक्रवार को स्विट्जरलैंड के जिनेवा में प्रस्तावित औपचारिक हस्ताक्षर समारोह की आवश्यकता नहीं रह गई है. हालांकि, ईरानी अधिकारियों के अनुसार स्विट्जरलैंड में होने वाली वार्ता तय कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेगी. ईरानी सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के अनुसार, बकाई ने कहा कि अब यह समझौता अपने क्रियान्वयन चरण में प्रवेश कर चुका है.
क्या है इस समझौते का नाम?
इस समझौते का आधिकारिक नाम "Islamabad Memorandum of Understanding between the United States of America and the Islamic Republic of Iran" है. इसकी घोषणा ट्रंप ने रविवार को की थी. इसका उद्देश्य लगभग 110 दिनों से जारी संघर्ष को समाप्त करना है, जो 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद शुरू हुआ था.
समझौते के बाद अब क्या होगा?
- अमेरिकी अधिकारियों द्वारा पहले जारी की गई जानकारी के अनुसार, इस समझौते में सभी मोर्चों पर मिलिट्री ऑपरेशन्स को तुरंत और स्थायी रूप से रोकने का प्रावधान किया गया है. इसमें लेबनान से जुड़े मिलिट्री ऑपरेशन्स को भी शामिल किया गया है.
- समझौते के तहत अमेरिका ने 30 दिनों के भीतर ईरान पर लगाए गए नेवल ब्लॉकेड को हटाने पर सहमति जताई है. इसके बाद कमर्शियल जहाजों की आवाजाही धीरे-धीरे युद्ध-पूर्व स्तर पर लौटने की उम्मीद है.
- दस्तावेज में यह भी कहा गया है कि अंतिम व्यापक समझौता होने के 30 दिनों के भीतर अमेरिकी सेना ईरान के आसपास के क्षेत्रों से अपनी मौजूदगी वापस लेगी.
- वहीं ईरान ने कमर्शियल जहाजों के सुरक्षित आवागमन को सुनिश्चित करने और 60 दिनों तक किसी भी प्रकार का ट्रांजिट शुल्क न लेने का वादा किया है.
- इस समझौता ज्ञापन में भविष्य की वार्ताओं के लिए एक रूपरेखा भी तय की गई है. इसके तहत दोनों देशों को व्यापक और आखिरी समझौते की शर्तों पर बातचीत के लिए 60 दिनों का समय दिया गया है.
ईरान बोले- अमेरिका की नाकामयाबी
ईरानी संसद के अध्यक्ष और मुख्य वार्ताकार Mohammad Bagher Ghalibaf ने इस समझौते को "अमेरिका की विफलता" का प्रमाण बताया और कहा कि वाशिंगटन के साथ बातचीत आगे भी जारी रहेगी. ईरानी सरकारी टेलीविजन को दिए गए एक साक्षात्कार में गालिबाफ ने कहा, "लोग इसे देखेंगे और स्वयं इसका आकलन करेंगे."
उन्होंने बताया कि वार्ताओं के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) एक प्रमुख मुद्दा रहा और इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से जुड़े प्रावधानों को समझौते में शामिल किया गया है. गालिबाफ ने कहा, "होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के लिए सेवा शुल्क के भुगतान को समझौता ज्ञापन में औपचारिक रूप से शामिल किया गया है."




