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UAE ने दिया धोखा, इजराइल की मोसाद से कहां हुई चूक? अब कैप्टन स्मित की जान को खतरा! Exclusive खुलासा

Flydubai FZ1073 में कथित हाईजैक कोशिश के दौरान भारतीय कैप्टन स्मित मछार पर कुल्हाड़ी से हमला हुआ. घायल होने के बावजूद उन्होंने विमान और यात्रियों को बचाने के लिए मुकाबला किया. आइए जानते हैं कि दुनिया में अपनी खुफिया का डंका पीटने वाला इजराइल कहा हो गया फेल?

UAE ने दिया धोखा, इजराइल की मोसाद से कहां हुई चूक? अब कैप्टन स्मित की जान को खतरा! Exclusive खुलासा
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जीतेंद्र चौहान
जीतेंद्र चौहान8 Mins Read

Updated on: 7 Oct 2026 5:34 PM IST

फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में हाईजैक की कोशिश ने इजरायल की एयरपोर्ट सिक्योरिटी और खुफिया तंत्र को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. दुबई से तेल अवीव जा रहे इस विमान में कथित तौर पर ओमान के को-पायलट ने कॉकपिट पर कब्जा करने की कोशिश की और भारतीय कैप्टन स्मित मछार पर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया. सिर पर वार के बावजूद कैप्टन ने हिम्मत नहीं हारी और हवा में ही हमलावर का मुकाबला करते रहे. उनकी सूझबूझ और बहादुरी ने विमान में सवार करीब 180 लोगों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई.

जिसमें सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस इजरायल की सुरक्षा व्यवस्था और खुफिया एजेंसी मोसाद की सतर्कता की दुनिया भर में मिसाल दी जाती है, वहां कथित तौर पर एक पायलट विमान के अंदर इतना बड़ा हमला करने की स्थिति तक कैसे पहुंच गया? अगर कॉकपिट पर कब्जे की कोशिश सफल हो जाती तो विमान और उसमें सवार यात्रियों के साथ क्या हो सकता था? क्या यह सिर्फ कॉकपिट सिक्योरिटी की चूक थी या इसके पीछे इजरायल की एविएशन सिक्योरिटी से जुड़ी कोई बड़ी खामी सामने आती है?

इन्हीं गंभीर सवालों को लेकर स्टेट मिरर हिंदी ने मेजर जनरल जीडी बख्शी से खास बातचीत की. उन्होंने इस घटना को बेहद गंभीर सुरक्षा चूक बताया और घायल होने के बावजूद विमान को बचाने के लिए संघर्ष करने वाले भारतीय कैप्टन स्मित मछार की बहादुरी को सलाम किया. साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि अगर उस वक्त कैप्टन ने मोर्चा नहीं संभाला होता तो यह घटना कितनी बड़ी तबाही में बदल सकती थी.

GD बक्शी ने क्या-क्या कहा? 10 पॉइंट में...

1. कैप्टन स्मित मछार ने जान पर खेलकर 180 लोगों की जान बचाई

GD बक्शी ने कहा कि यह बहुत बड़ी चूक थी, लेकिन कैप्टन स्मित मछार की बहादुरी ने हालात को संभाल लिया. सिर के पीछे कुल्हाड़ी से कई वार होने और खून बहने के बावजूद उन्होंने अपनी जिम्मेदारी निभाई. उन्होंने इमरजेंसी कोड दबाकर पूरी दुनिया और इजराइल को हाईजैक की जानकारी दी. बक्शी के मुताबिक, उस समय मछार ने अपनी जान से ज्यादा विमान में सवार लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी और अपनी ड्यूटी निभाई.

2. अगर विमान लक्ष्य तक पहुंच जाता तो 9/11 जैसा हमला हो सकता था

GD बक्शी ने आशंका जताई कि हाईजैक करने वाले का लक्ष्य तेल अवीव का कोई बड़ा टावर या एयरपोर्ट हो सकता था. उन्होंने कहा कि अगर विमान को किसी बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर से टकरा दिया जाता तो यात्रियों के साथ-साथ भारी नुकसान हो सकता था. उनके मुताबिक, अगर ऐसा होता तो यह विश्व स्तर पर 9/11 जैसी घटना की पुनरावृत्ति हो सकती थी. उन्होंने कहा कि स्मित मछार ने संघर्ष करके इस संभावित बड़े हादसे को रोकने में अहम भूमिका निभाई.

3. इजराइल की सुरक्षा व्यवस्था और मोसाद पर बड़ा सवाल

GD बक्शी ने सवाल उठाया कि इजराइल जैसी सुरक्षा और खुफिया व्यवस्था में एक संदिग्ध व्यक्ति पायलट बनकर कैसे पहुंच गया. उन्होंने कहा कि मोसाद को दुनिया की बेहतरीन खुफिया एजेंसियों में माना जाता है और इजराइल अपने देश के अंदर-बाहर आने वाले लोगों पर पैनी नजर रखता है. इसके बावजूद यह व्यक्ति विमान तक पहुंच गया और घटना हुई. बक्शी ने इसे बड़ी सुरक्षा चूक और नाकामी बताया तथा कहा कि इसकी जांच जरूरी है.

4. ओमान से निकाले गए पायलट की फ्लाईदुबई तक पहुंच कैसे हुई?

बक्शी ने ओमान के को-पायलट को लेकर भी कई सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि इजराइल के अनुसार ऐसे देश के पायलट को, जिसने इजराइल को मान्यता नहीं दी है, वहां नहीं आना चाहिए था. साथ ही चर्चा में यह बात सामने आई कि ओमान की एयरलाइन ने उसे रेडिकलाइजेशन के कारण निकाल दिया था. ऐसे में सवाल यह है कि फ्लाईदुबई ने उसे कैसे नियुक्त किया. बक्शी ने कहा कि अगर उसके बारे में पहले से संदेह था तो उसे विमान के आसपास तक नहीं आने देना चाहिए था.

5. भविष्य में पायलट ही सबसे बड़ा सुरक्षा खतरा बन सकता है

GD बक्शी ने कहा कि इस घटना से एविएशन सिक्योरिटी को लेकर नए सवाल खड़े होते हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कोई संदिग्ध या कट्टरपंथी सोच वाला पायलट कॉकपिट तक पहुंच जाए तो वह सुरक्षा व्यवस्था का सबसे बड़ा खतरा बन सकता है. उन्होंने भविष्य में जहाज के अंदर किसी जहरीली गैस या एयरोसोल जैसी चीज के इस्तेमाल की संभावना का भी जिक्र किया. उनके मुताबिक अब केवल पायलट की शारीरिक जांच पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि उसके मानसिक स्वास्थ्य और पृष्ठभूमि की भी जांच जरूरी है.

6. पायलटों की साइकोलॉजिकल जांच पर दिया जोर

बक्शी ने कहा कि पहले पायलटों की जांच में शारीरिक फिटनेस, ड्रग्स और शराब जैसी चीजों पर ध्यान दिया जाता था, लेकिन अब मानसिक स्वास्थ्य की जांच भी जरूरी हो गई है. उन्होंने कहा कि पहले भी पायलटों द्वारा आत्महत्या की कोशिश जैसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं. इसलिए एविएशन सेक्टर को पायलटों की साइकोलॉजिकल स्थिति को गंभीरता से देखना होगा. उन्होंने यहां तक कहा कि हर फ्लाइट से पहले साइकोलॉजिकल टेस्ट की जरूरत पड़ सकती है.

7. ईरान पर हमला करने को लेकर इजराइल के फैसले पर सवाल

GD बक्शी ने ईरान को लेकर इजराइल की रणनीति पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि घटना को अब तक की जांच के आधार पर लोन वुल्फ अटैक जैसा देखा जा रहा है, जबकि इजराइल सीधे ईरान का हाथ बता रहा है. बक्शी ने सवाल किया कि अगर सबूत स्पष्ट नहीं हैं तो ईरान और हूती पर हमला करने की बात क्यों की जा रही है. उन्होंने लगातार बमबारी को लेकर भी सवाल उठाया और कहा कि इससे क्या हासिल हुआ, यह सोचने की जरूरत है.

8. कैप्टन मछार को अशोक चक्र देने की जोरदार पैरवी

GD बक्शी ने कैप्टन स्मित मछार के लिए अशोक चक्र की मांग की. उन्होंने कहा कि यह सम्मान गैर-युद्ध परिस्थितियों में असाधारण बहादुरी के लिए उपयुक्त है. बक्शी ने कहा कि मछार ने जिस तरह अपनी जान पर खेलकर यात्रियों को बचाया, वह किसी सैनिक के युद्धक्षेत्र में लड़ने से कम नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि पहले कंधार हाईजैक में शहीद हुई एयर होस्टेस को अशोक चक्र दिया गया था और उन्हें उम्मीद है कि मछार को भी यह सम्मान दिया जाएगा.

9. मछार को भारत लाकर ग्राउंड जॉब देने की सलाह

बक्शी ने कहा कि सबसे पहले कैप्टन मछार की जान और स्वास्थ्य की चिंता है. उन्होंने आशंका जताई कि इतनी गंभीर घटना के बाद उनके लिए दोबारा सामान्य तरीके से उड़ान भरना आसान नहीं होगा. उनकी सलाह थी कि उन्हें भारत वापस बुलाकर एयर इंडिया या स्पाइसजेट जैसी जगह पर ग्राउंड जॉब दी जाए. उन्होंने कहा कि अगर मेडिकल जांच के बाद मछार खुद उड़ना चाहते हैं तो उन्हें मौका मिल सकता है, लेकिन उनकी व्यक्तिगत सलाह ग्राउंड जॉब की है.

10. भारत-इजराइल रिश्तों में दोस्ती के साथ राष्ट्रहित भी जरूरी

GD बक्शी ने कहा कि भारत और इजराइल के रिश्ते पहले से बेहद करीबी हैं, लेकिन भारत के ईरान से भी महत्वपूर्ण संबंध रहे हैं. उन्होंने चाबहार पोर्ट, सस्ते तेल-गैस और मध्य एशिया तक पहुंच जैसे मुद्दों का जिक्र किया. उनका कहना था कि भारत को अपने राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखना चाहिए. बक्शी ने साफ कहा कि भारत दोस्ती को महत्व देता है, लेकिन किसी का गुलाम नहीं है. उनके मुताबिक रिश्ते ऐसे होने चाहिए जिसमें दोनों पक्ष एक-दूसरे के हित और सीमाओं का सम्मान करें.

स्टेट मिरर स्पेशल
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