Trump on Iran Crisis: ईरान ने रोक दिए फास्ट ट्रायल और फांसी, 3400 मौतों के बीच तेहरान बोला- कंट्रोल में हालात
ईरान में जारी हिंसक प्रदर्शनों और संभावित अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि तेहरान ने फास्ट ट्रायल और फांसी की योजनाएं रोक दी हैं. मानवाधिकार संगठनों के अनुसार अब तक 3,400 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं ईरान ने हालात पर पूर्ण नियंत्रण का दावा किया है. खाड़ी देशों में अलर्ट, ब्रिटेन ने दूतावास बंद किया और वैश्विक तनाव बढ़ता जा रहा है.
ईरान को लेकर एक बार फिर दुनिया की नजरें अमेरिका पर टिकी हैं. संभावित अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की आशंका के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान ने हालात को और संवेदनशील बना दिया है. ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान ने फास्ट ट्रायल और फांसी की योजनाएं रोक दी हैं, जबकि देश में जारी हिंसक प्रदर्शनों में हजारों लोगों की मौत हो चुकी है. इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल और तेज हो गई है.
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्हें “विश्वसनीय सूत्रों” से जानकारी मिली है कि ईरान में अब हत्याएं और फांसी की कार्रवाई रोकी जा रही है. उन्होंने यह भी कहा कि अब न तो त्वरित सुनवाई होगी और न ही किसी तरह की फांसी. यह बयान ऐसे समय आया है, जब ट्रंप पहले प्रदर्शनकारियों से संस्थानों पर कब्जा करने की अपील कर चुके हैं और “मदद रास्ते में है” जैसे संकेत दे चुके हैं. इससे पश्चिमी देशों और ईरान के बीच टकराव की आशंका और गहरी हो गई है.
3400 से ज्यादा की मौत
मानवाधिकार संगठनों के आंकड़े हालात की गंभीरता को उजागर करते हैं. नॉर्वे स्थित ईरान ह्यूमन राइट्स के मुताबिक, अब तक 3,400 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है और 10,000 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है. वहीं, अमेरिका स्थित एक अन्य संस्था ने मृतकों की संख्या 2,500 से ज्यादा बताई है. दशकों में यह ईरान का सबसे खूनी जन आंदोलन माना जा रहा है.
तेहरान की सफाई: ‘कोई फांसी नहीं होगी’
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ट्रंप के बयान के बाद खुद सामने आकर कहा कि न आज और न ही कल किसी को फांसी दी जाएगी. उन्होंने स्पष्ट किया कि फास्ट-ट्रैक ट्रायल की बातों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया. हालांकि, इससे पहले तेहरान की ओर से सख्त कार्रवाई के संकेत दिए जा चुके थे, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता और गुस्सा दोनों था.
हम पूरी तरह नियंत्रण में हैं: ईरान का दावा
अमेरिकी दबाव और सैन्य खतरे के बीच ईरान ने यह दावा भी किया कि स्थिति अब काबू में है. अराघची ने कहा कि तीन दिन की हिंसक घटनाओं के बाद अब शांति है और सरकार हालात पर पूरी तरह नियंत्रण रखे हुए है. लेकिन इसी बीच अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र में अपने कुछ सैन्य ठिकानों से स्टाफ निकालना शुरू कर दिया है, जिसे सतर्कता कदम बताया जा रहा है.
अमेरिका-ईरान के बीच टकराव की आशंका
कतर, सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों में जारी अलर्ट ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है. कतर में अमेरिकी सैन्य अड्डे से कुछ कर्मियों को हटाया गया है, जबकि सऊदी अरब ने साफ कर दिया है कि वह अपने हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल ईरान पर हमले के लिए नहीं होने देगा. अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ईरान ने पड़ोसी देशों को चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने हमला किया तो अमेरिकी ठिकाने निशाने पर होंगे.
ब्रिटेन ने दूतावास और हवाई क्षेत्र किया बंद
तेहरान में सुरक्षा हालात को देखते हुए ब्रिटेन ने अपना दूतावास अस्थायी रूप से बंद कर दिया है और स्टाफ को वापस बुला लिया है. इसके अलावा, ईरान ने बिना वजह बताए कुछ घंटों के लिए अपना हवाई क्षेत्र भी बंद कर दिया, जिससे अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर असर पड़ा. जर्मनी समेत कई यूरोपीय देशों में ईरान के खिलाफ प्रदर्शन भी तेज हो गए हैं.
भारत, रूस और बाकी दुनिया की कूटनीतिक हलचल
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री के बीच फोन पर बातचीत हुई, जिसमें मौजूदा हालात पर चर्चा की गई. कई देशों ने अपने नागरिकों को ईरान छोड़ने की सलाह दी है. इस बीच रूस ने कहा कि ईरान के साथ उसके संबंध किसी तीसरे देश के दबाव से प्रभावित नहीं होंगे. कुल मिलाकर, ईरान संकट अब सिर्फ एक देश का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि वैश्विक राजनीति के संतुलन की बड़ी परीक्षा बन चुका है.





