औरत का चक्कर बाबू भाई! Alimony से भागने की चाल उल्टी पड़ी, नौकरी छोड़ी, देश बदला; कोर्ट ने वसूले ₹4 करोड़
Alimony से बचने के लिए हाई-पेइंग नौकरी और सिंगापुर छोड़कर कनाडा भागे सीनियर एग्जीक्यूटिव को कोर्ट ने बड़ा झटका दिया. अदालत ने पत्नी और चार बच्चों के लिए ₹4 करोड़ भुगतान का आदेश सुनाया.
गुज़ारा भत्ता (Alimony) से बचने के लिए महंगी नौकरी छोड़ना एक कनाडाई सीनियर एग्जीक्यूटिव को भारी पड़ गया. अदालत ने इस व्यक्ति को पत्नी और चार बच्चों के भरण-पोषण के लिए करीब ₹4 करोड़ (S$6.34 लाख) का बकाया भुगतान करने का आदेश दिया है. यह मामला न सिर्फ पारिवारिक कानून बल्कि नैतिक ज़िम्मेदारी पर भी एक बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है.
द स्ट्रेट्स टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यह व्यक्ति सिंगापुर स्थित एक मल्टीनेशनल कंपनी में सीनियर पद पर कार्यरत था और सालाना ₹6 करोड़ से ज्यादा की कमाई कर रहा था. अगस्त 2023 में उसने परिवार का घर छोड़ दिया और किसी अन्य महिला के साथ रहने लगा. इसके कुछ ही समय बाद उसकी पत्नी ने अपने और चार बच्चों के लिए आर्थिक सहायता की मांग करते हुए कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया.
नौकरी छोड़ी, देश बदला, लेकिन ज़िम्मेदारी नहीं छूटी
पत्नी की ओर से मेंटेनेंस की अर्जी दाखिल होते ही आरोपी ने न सिर्फ अपनी हाई-पेइंग नौकरी से इस्तीफा दे दिया, बल्कि सिंगापुर छोड़कर वापस कनाडा चला गया. अदालत ने इसे स्पष्ट तौर पर ज़िम्मेदारी से भागने की कोशिश माना. मामला तब और गंभीर हो गया जब वह व्यक्ति 2024 की शुरुआत में अदालत की सुनवाई में पेश नहीं हुआ. इसके चलते कोर्ट ने उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया. यह वारंट दिसंबर 2024 में तब रद्द किया गया, जब वह आखिरकार ज़ूम के जरिए सुनवाई में शामिल हुआ.
पहले ₹14 लाख, फिर ₹8 लाख - कम होती गई पेशकश
शुरुआत में आरोपी ने पत्नी को 20,000 सिंगापुर डॉलर (करीब ₹14 लाख) प्रति माह देने की पेशकश की थी. इसके साथ बच्चों की स्कूल फीस, स्कूल बस चार्ज और परिवार के घर का किराया देने की बात भी कही गई थी. लेकिन कुछ महीनों बाद उसने यह राशि घटाकर 11,000 सिंगापुर डॉलर (करीब ₹8 लाख) प्रति माह कर दी, जिसे पत्नी ने अस्वीकार कर दिया.
अदालत की सख़्त टिप्पणी
डिस्ट्रिक्ट जज फैंग सियाओ चुंग ने सुनवाई के दौरान कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि, “जिस समय पत्नी ने भरण-पोषण की मांग की, उसी समय नौकरी छोड़ देना बेहद गैर-जिम्मेदाराना कदम है. एक ज़िम्मेदार पिता पहले परिवार की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करता है, फिर नौकरी बदलता है.”
अदालत का अंतिम फैसला
अदालत ने आरोपी को निम्न आदेश दिए...
- बकाया भुगतान: सितंबर 2023 से सितंबर 2025 तक की अवधि के लिए S$6,34,000 (करीब ₹4 करोड़) का भुगतान
- मासिक गुज़ारा भत्ता: अक्टूबर 2024 से हर महीने S$23,500 (करीब ₹16 लाख) देना होगा
- संयुक्त ज़िम्मेदारी: कनाडा में नई नौकरी के बाद आरोपी की आय घटकर करीब ₹2 करोड़ सालाना रह गई है, इसलिए भविष्य में दोनों माता-पिता को बच्चों के खर्च में बराबर योगदान देना होगा
लग्ज़री लाइफस्टाइल भी बनी मुद्दा
सुनवाई के दौरान आरोपी के वकीलों ने पत्नी पर महंगी जीवनशैली अपनाने का आरोप लगाया. उन्होंने फॉर्मूला-1 रेस के टिकट, लग्ज़री छुट्टियां और कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट का हवाला देते हुए कहा कि परिवार को कनाडा शिफ्ट हो जाना चाहिए, जहां स्वास्थ्य सेवाएं और शिक्षा मुफ्त हैं. हालांकि पत्नी ने दलील दी कि बच्चे सिंगापुर में जिस उच्च जीवन स्तर के आदी हैं, उसे अचानक नहीं बदला जा सकता.
अदालत का संतुलित रुख
जज ने यह भी कहा कि पत्नी को भविष्य में काम करके अपनी जीवनशैली का बोझ खुद उठाना होगा, लेकिन पिता अपनी ज़िम्मेदारियों से भाग नहीं सकता. गौरतलब है कि यह दंपति 2013 में सिंगापुर शिफ्ट हुआ था और फिलहाल तलाक की प्रक्रिया से गुजर रहा है.





