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‘छल्लड़े छल्लड़े वाल’ गाना सोशल मीडिया पर काट रहा गदर, लेकिन क्या सिंगर को जानते हैं आप? सामने आया पाकिस्तान कनेक्शन

पाकिस्तान की शानज़े सियाल और मोहसिन लशारी का सराइकी गीत ‘छल्लड़े छल्लड़े वाल’ इंस्टाग्राम पर एक करोड़ से ज्यादा बार देखा जा चुका है. कभी नौकरी की तलाश कर रहीं शानज़े को गायकी को लेकर निराशा मिली थी, लेकिन वायरल गाने ने उन्हें नई पहचान दिलाई.ो

Pakistani Singer Shanzeh Sial Goes Viral as ‘Chhallray Chhallray Wal’ Crosses 10 Million Views
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( Image Source:  instagram.com/its_shanzy01 )

आप में से शायद ही कोई ऐसा होगा जो इंस्टाग्राम चलाता हो और छल्लड़े छल्लड़े वाल गाने पर बनी रील न देखी हो. यह गाना सोशल मीडिया पर जमकर गदर काट रहा है. लोग इसे खूब पसंद कर रहे हैं... लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसे शानजे सियाल ने गाया है, जो पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के मियां चन्नू शहर की रहने वाली हैं.


शानज़े सियाल ने एनेस्थिसियोलॉजी की पढ़ाई पूरी करने के बाद लाहौर में नौकरी तलाशना शुरू किया था. उस वक्त उन्होंने शायद ही सोचा होगा कि उनका गाया एक गाना उन्हें रातोंरात लोकप्रिय बना देगा. गायक मोहसिन लशारी के साथ गाया गया सराइकी गीत ‘छल्लड़े छल्लड़े वाल’ इंस्टाग्राम पर वायरल हो गया. इसे अब तक एक करोड़ से ज्यादा बार देखा जा चुका है और इस पर हजारों रील्स बन चुकी हैं.


भारत में खूब लोकप्रिय हुआ गाना

इस गाने की लोकप्रियता पाकिस्तान तक सीमित नहीं रही, बल्कि भारत में भी लोगों ने इसे खूब पसंद किया. सोशल मीडिया पर यूजर्स ने गाने को लेकर मीम्स बनाए और कई लोगों ने शानज़े व मोहसिन की आवाज की तारीफ की. दिलचस्प बात यह है कि शानज़े कभी गायकी को अपना करियर बनाने को लेकर आश्वस्त नहीं थीं. उन्हें कई बार कहा गया कि उनकी आवाज तो अच्छी है, लेकिन उन्हें लय और संगीत की समझ नहीं है. अब वही आवाज उन्हें नई पहचान दिला रही हैओ.


नौकरी की तलाश के बीच वायरल हुआ गाना

बीबीसी से बात करते हुए शानज़े ने बताया कि उन्हें बचपन से गाने का शौक था, लेकिन उन्होंने इसे कभी गंभीर करियर के तौर पर नहीं अपनाया. विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान गायकी से उनका जुड़ाव और कम हो गया. पढ़ाई पूरी करने के बाद वह लाहौर में अपने क्षेत्र से जुड़ी नौकरी तलाश रही थीं. परिवार भी उन्हें वापस घर लौटने के लिए कह रहा था, लेकिन शानज़े कुछ हासिल करने के बाद ही लौटना चाहती थीं. इसी दौरान ‘छल्लड़े छल्लड़े वाल’ वायरल हो गया और उनकी जिंदगी की दिशा बदल गई.


सराइकी भाषा की मिठास ने जीता दिल

शानज़े और मोहसिन लशारी का मानना है कि गाने की लोकप्रियता में सराइकी भाषा की मिठास का बड़ा योगदान है. यह गीत पहले भी कई गायकों की आवाज में आ चुका है, लेकिन दोनों की प्रस्तुति को सोशल मीडिया पर खास पसंद किया गया. मोहसिन का कहना है कि उन्हें शानज़े की आवाज सराइकी गीत के लिए बेहद उपयुक्त लगी. वहीं, शानज़े ने उनके साथ काम करते हुए सुर और लय के साथ गाना भी सीखा.


भारत से मिल रहा प्यार, हॉस्टल में भी बढ़ी पहचान

गाना वायरल होने के बाद दोनों गायकों को सोशल मीडिया पर मशहूर हस्तियों और प्रशंसकों के संदेश मिलने लगे. भारत में भी इस गीत पर कई मीम्स बनाए गए. एक यूजर ने मजाक में लिखा कि भारत पाकिस्तान को क्रिकेट में हरा सकता है, लेकिन संगीत और सुरीली आवाजों के सामने उसे पीछे करना मुश्किल है. शानज़े बताती हैं कि अब उनके हॉस्टल के कमरे का दरवाजा बार-बार खटखटाया जाता है और लोग उनसे मिलने तथा सेल्फी लेने आते हैं.

अब गायकी में ही आगे बढ़ना चाहती हैं शानज़े

शानज़े ने स्कूल और कॉलेज के दौरान नात गायन की तहसील और जिला स्तर की प्रतियोगिताएं भी जीती थीं. दूसरी ओर, मोहसिन लशारी ने संगीत की औपचारिक पारिवारिक पृष्ठभूमि न होने के बावजूद वरिष्ठ गायकों से सीखकर अपनी पहचान बनाई. अब कई रिकॉर्ड कंपनियां दोनों के साथ काम करने में रुचि दिखा रही हैं और उनके संगीत कार्यक्रम भी हो रहे हैं। दोनों का कहना है कि ‘छल्लड़े छल्लड़े वाल’ की सफलता ने उन्हें आगे बढ़ने की दिशा दे दी है.

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