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Pakistan Lockdown: रात 8 बजे बाजार और 10 बजे शादी घर बंद, Hormuz संकट के बीच पाकिस्तान की बत्ती गुल

पाकिस्तान सरकार ने 7 अप्रैल से ऊर्जा संकट और बढ़ती ईंधन कीमतों के चलते आंशिक लॉकडाउन लागू किया, बाजार 8 बजे और शादी हॉल 10 बजे बंद.

Pakistan Lockdown: रात 8 बजे बाजार और 10 बजे शादी घर बंद, Hormuz संकट के बीच पाकिस्तान की बत्ती गुल
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( Image Source:  @nabilajamal_- X )
सागर द्विवेदी
By: सागर द्विवेदी2 Mins Read

Updated on: 7 April 2026 4:28 PM IST

पाकिस्तान सरकार ने 7 अप्रैल से देश के ज्यादातर हिस्सों में रात 8 बजे से मार्केट और शॉपिंग मॉल जल्दी बंद करने का आदेश जारी किया है. यह कदम मिडिल ईस्ट में तनाव और दुनिया भर में बढ़ती ईंधन कीमतों के मद्देनजर ऊर्जा बचाने के उपायों के तहत लिया गया है.

जियो न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, पीएम ऑफिस से जारी आधिकारिक बयान में बताया गया कि यह निर्णय प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अध्यक्षता में पेट्रोलियम उत्पाद पर हुई बैठक के बाद लिया गया.

क्या खुले रहेंगे और क्या बंद होगा?

  • रात 8 बजे तक बंद: रोजमर्रा की दुकानों, शॉपिंग मॉल, डिपार्टमेंटल स्टोर और मार्केट (सिंध प्रांत को फिलहाल अलग रखा गया है).
  • रात 10 बजे तक बंद: बेकरी, रेस्टोरेंट, तंदूर, खाने की दुकानें और विवाह हॉल. निजी घरों में 10 बजे के बाद शादी समारोह पर भी रोक.
  • छूट: मेडिकल स्टोर और फार्मेसियां खुली रहेंगी.

प्रधानमंत्री ने राहत के कदम के रूप में गिलगित और मुजफ्फराबाद में एक महीने के लिए फ्री इंटरसिटी पब्लिक ट्रांसपोर्ट की घोषणा भी की.

आर्थिक और सामाजिक प्रभाव

पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में तेजी, जो पहले 55 रुपये प्रति लीटर बढ़ चुकी थीं, अब पेट्रोल 378 रुपये और डीज़ल में सब्सिडी के साथ कुछ राहत मिली है.

सरकारी खर्चों में 20% कटौती, सरकारी कार्यालयों में चार दिन का कार्य सप्ताह लागू.

छोटे व्यवसाय, दैनिक मजदूर और परिवारिक व्यवसाय आंशिक लॉकडाउन से सबसे अधिक प्रभावित होंगे.

पाकिस्तान में क्यों लग रहा लाकडाउन?

28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमले के बाद खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ा. इसके चलते होर्मुज स्ट्रेट के जरिए वैश्विक ऊर्जा सप्लाई प्रभावित हुई, जिससे पाकिस्तान को भी तेल और ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ा.

विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम आर्थिक संकट के समय आवश्यक है, लेकिन छोटे व्यवसाय और आम जनता पर दबाव बढ़ सकता है. सरकार को व्यापारिक हितधारकों और जनता के लिए राहत योजनाओं पर तेजी से काम करना होगा.

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