Operation Hard Ball: अमेरिका ने कैसे चलाया अंडरकवर ऑपरेशन, जिसके दम पर बना लॉरेंस बिश्नोई गैंग के खिलाफ केस, 24 को किया अरेस्ट
अमेरिका ने Bishnoi, Bhagwanpuria और Dhandra गैंग के आरोपियों को दबोचने के लिए ऑपरेशन हार्ड बॉल को अंजाम दिया. इसके लिए खुफिया एजेंट्स और मुखबिरों का सहारा लिया गया. जानें ऑपरेशन से जुड़ी पूरी डिटेल.
अमेरिका के न्याय विभाग (US Department of Justice) की ओर से दायर तीन अलग-अलग आरोपपत्रों (Indictments) से खुलासा हुआ है कि साल 2023 से शुरू हुई जांच में गोपनीय मुखबिरों (Confidential Informants) और अंडरकवर अधिकारियों (Undercover Operatives) ने बेहद अहम भूमिका निभाई. इन्हीं जांचों के आधार पर मंगलवार को बिश्नोई, भगवानपुरिया और धांधरा संगठित अपराध गिरोहों (Organised Crime Groups) से जुड़े 24 लोगों की गिरफ्तारी की घोषणा की गई.
आरोपपत्रों के मुताबिक, अमेरिकी कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने "ऑपरेशन हार्ड बॉल" (Operation Hard Ball) के तहत लंबे समय तक गुप्त जांच चलाई. इस दौरान मुखबिरों और अंडरकवर अधिकारियों के जरिए गिरोहों के बीच घुसपैठ की गई और उनके खिलाफ सबूत जुटाए गए.
आरोपपत्र के अनुसार, सबसे पहले जांच कनाडा में रहने वाले ड्रग तस्कर रविंदर सिंह धांधरा से शुरू हुई. उस पर अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको में सक्रिय अन्य ड्रग तस्करी संगठनों तक बड़ी मात्रा में कोकीन और मेथामफेटामाइन पहुंचाने का आरोप है.
कैसे हुआ खुलासा?
10 जुलाई 2023 को धांधरा ने ऐसे व्यक्ति से संपर्क किया, जिसे वह ड्रग ट्रांसपोर्ट कोऑर्डिनेटर समझ रहा था. उसने लॉस एंजिलिस में एक व्यक्ति तक कोकीन पहुंचाने के लिए ड्रग ट्रांसपोर्टर का नंबर और अन्य जानकारी मांगी. लेकिन जिस व्यक्ति से धांधरा संपर्क कर रहा था, वह वास्तव में अमेरिकी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए काम करने वाला एक खुफिया मुखबिर था, जिसे आरोपपत्र में CI-1 नाम दिया गया है. धांधरा ने CI-1 से मिली जानकारी अपने ड्रग तस्करी नेटवर्क के एक अन्य प्रतिनिधि तक पहुंचाई.
कैसे हुई खुफिया एजेंट्स से मुलाकात?
सिर्फ एक हफ्ते के बाद CI-1 ने वॉशिंगटन के ब्लेन शहर के एक पार्क में धांधरा और उसके एक सहयोगी से मुलाकात की. बैठक में अमेरिका-कनाडा सीमा के पार कोकीन और मेथामफेटामाइन की तस्करी पर चर्चा हुई. इसके बाद CI-1 धांधरा के नेटवर्क के नियमित संपर्क में आ गया. उसने अगस्त और अक्टूबर 2023 में कोकीन और मेथ की कई खेपों की डिलीवरी कराने में मदद की. धांधरा ने CI-1 से अपनी संस्था तक पहुंची ड्रग्स की खेपों का वेरिफिकेशन भी करवाया. यह संपर्क नवंबर 2024 और जनवरी 2025 तक जारी रहा. बाद में धांधरा को कनाडाई पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया.
कैसे भगवानपुरिया गैंग तक पहुंचे एजेंट्स?
जब धांधरा गिरोह के खिलाफ जांच चल रही थी, उसी दौरान अमेरिकी एजेंसियों ने पंजाब के भगवानपुरिया गैंग तक पहुंचने के लिए भी इसी तरह की रणनीति अपनाई. दूसरे आरोपपत्र के मुताबिक, 17 जून 2024 को भगवानपुरिया गैंग के सदस्यों ने पांच किलोग्राम कोकीन ऐसे व्यक्ति को बेची, जिसे वे अपना आपराधिक सहयोगी समझ रहे थे. हालांकि, वह व्यक्ति भी अमेरिकी एजेंसियों का गोपनीय मुखबिर CI-1 था. आरोपपत्र में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि क्या यह वही CI-1 था, जिसने धांधरा गिरोह के साथ संपर्क बनाया था. इस सौदे के बदले गैंग ने CI-1 से 45,000 डॉलर लिए.
हथियारों तक कैसे पहुंचा मामला?
आरोपपत्र के अनुसार, जुलाई 2025 में भगवानपुरिया गैंग के सदस्यों ने CI-1 को AK-47 राइफल और ग्रेनेड जैसे हथियार बेचने की पेशकश की. 4 सितंबर 2025 को कैलिफोर्निया के एक पार्किंग स्थल पर सौदा हुआ, जहां CI-1 ने गैंग से पिस्तौल और गोला-बारूद 2,000 डॉलर में खरीदे. कुछ महीनों बाद सितंबर 2025 में CI-1 ने गैंग से सेमी-ऑटोमैटिक राइफल और गोला-बारूद भी खरीदा. इसके बाद अक्टूबर और दिसंबर 2025 में भी उसने गैंग से हजारों डॉलर के हथियार खरीदकर उनके साथ अपना संपर्क बनाए रखा.
फरवरी 2026 में भगवानपुरिया गैंग ने अमेरिका से कनाडा 20 किलोग्राम कोकीन भेजने का प्लान बनाया. गैंग को लगा कि यह असली कोकीन की खेप है, जो उन्हें CI-1 से मिली है. लेकिन, आरोपपत्र के मुताबिक यह पूरी खेप नकली थी. 23 फरवरी को अमेरिकी एजेंसियों ने इसे जब्त कर लिया. जांच के दौरान भगवानपुरिया गैंग के सदस्यों ने CI-1 को संदेश भेजकर आरोप लगाया कि उसने ड्रग्स की खेप में ट्रैकर लगा दिए थे. आरोपपत्र में यह भी कहा गया है कि भगवानपुरिया गैंग का सरगना फिलहाल भारत की एक जेल में बंद है.
कैसे अंडरकवर अधिकारी का किया गया इस्तेमाल?
तीसरे आरोपपत्र के अनुसार, अमेरिकी सरकार ने लॉरेंस बिश्नोई गिरोह के खिलाफ सबूत जुटाने के लिए एक अंडरकवर अधिकारी का इस्तेमाल किया, जिसे UC-1 नाम दिया गया है. 11 जनवरी 2025 को बिश्नोई गैंग के सदस्य सुकराज सिंह कंग ने ऐसे व्यक्ति से संपर्क किया, जिसके बारे में गैंग का मानना था कि उस पर 1 लाख से 2 लाख डॉलर का कर्ज बकाया है. लेकिन वह व्यक्ति भी अमेरिकी एजेंसियों का गोपनीय मुखबिर CI-1 था. आरोपपत्र के मुताबिक, सुकराज सिंह कंग ने 16,000 डॉलर की फीस के बदले उस कथित कर्जदार से पैसे वसूलने पर सहमति जताई.
अंडरकवर अधिकारी को जान से मारने की धमकी
इसके बाद बिश्नोई गैंग के सदस्यों ने ऐसे व्यक्ति से संपर्क किया, जिसे वे CI-1 का कर्जदार समझ रहे थे. असल में वह अमेरिकी कानून प्रवर्तन एजेंसियों का अंडरकवर अधिकारी UC-1 था. आरोपपत्र के अनुसार, 2025 के दौरान हुई कई बातचीत में बिश्नोई गैंग के सदस्यों ने UC-1 को धमकी दी कि यदि उसने 2 लाख डॉलर नहीं चुकाए तो उसे जान से मार दिया जाएगा.
इसी दौरान CI-1 का परिचय भी बिश्नोई गैंग के उन सदस्यों से कराया गया, जो इस कथित उगाही मामले में शामिल थे.जांच में कहा गया है कि UC-1 के जरिए तय रकम से कम भुगतान किए जाने के बाद भी 2025 के दौरान गैंग के सदस्य उसे लगातार धमकियां देते रहे, जिससे एजेंसियों को उनके खिलाफ और सबूत मिले.
सबूत जुटने के बाद एजेंसी ने क्या किया?
इन सभी जांचों के दौरान जुटाए गए सबूतों के आधार पर अमेरिकी कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने मामले को ग्रैंड जूरी के सामने पेश किया. 23 जून को धांधरा गिरोह के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया. इसके बाद 25 जून को भगवानपुरिया गैंग के खिलाफ आरोपपत्र दायर हुआ. अंत में 1 जुलाई को बिश्नोई गैंग के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया. इसके बाद अमेरिकी एजेंसियों ने "ऑपरेशन हार्ड बॉल" के तहत कार्रवाई करते हुए इन संगठित अपराध गिरोहों से जुड़े आरोपियों की गिरफ्तारी की घोषणा की.




