नेपाल में तबाही के बाद खौफ बरकरार! 800 मौतों के बीच फिर जारी हुआ बाढ़ का अलर्ट, जानें क्यों बढ़ा खतरा
नेपाल में 26 अगस्त की विनाशकारी बाढ़ के बाद एक बार फिर खतरा बढ़ गया है. भोतेकोशी नदी का जलस्तर बढ़ने पर बाढ़ का अलर्ट जारी किया गया। जानें पूरी घटना और ताजा हालात.
नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई हैं. रविवार को भोतेकोशी नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद अधिकारियों ने एक बार फिर बाढ़ की चेतावनी जारी की. बाढ़ प्रभावित जिलों के लोगों को हाई अलर्ट पर रहने को कहा गया है. सुबह लोगों के मोबाइल फोन पर भी बाढ़ के अलर्ट भेजे गए, जिससे पहले से तबाही झेल रहे इलाकों में डर और चिंता बढ़ गई. इस बीच राहत और बचाव दल बाढ़ के बाद की स्थिति से निपटने में जुटे हुए हैं.
बाढ़ की इस आपदा में नेपाल और तिब्बत में अब तक कम से कम 800 लोगों की मौत हो चुकी है. नेपाल की आपदा एजेंसी के अनुसार, देश में मृतकों की संख्या 788 पहुंच गई है, जबकि 2,502 लोग अभी भी लापता हैं. चीन की सीमा वाले हिस्से में 16 लोगों की मौत और 546 लोगों के लापता होने की जानकारी दी गई है. वहीं, काठमांडू को बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में से एक से जोड़ने वाले प्रमुख हाईवे को साफ करने का काम भी जारी है. आइए जानते हैं बाढ़ के बाद नेपाल में कैसे हैं हालात...
नेपाल में फिर क्यों बढ़ा बाढ़ का खतरा?
रविवार को भोतेकोशी नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद नेपाल के अधिकारियों ने नए सिरे से बाढ़ की चेतावनी जारी की. बाढ़ प्रभावित जिलों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और हाई अलर्ट पर रहने को कहा गया. लोगों के मोबाइल फोन पर सुबह-सुबह बाढ़ की चेतावनी के संदेश भेजे गए. लगातार मिल रही चेतावनियों ने उन लोगों की चिंता और बढ़ा दी है, जो कुछ दिन पहले ही भीषण बाढ़ की तबाही से गुजर चुके हैं.
नेपाल की नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी धरम राज उप्रेती के अनुसार, ताजा चेतावनी चीन के अधिकारियों से मिली जानकारी के बाद जारी की गई. चीन की तरफ से ऊपर की ओर पानी का बहाव बढ़ने की जानकारी दी गई थी.
चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने देश के जल संसाधन मंत्रालय के हवाले से बताया कि बुधवार की बाढ़ के बाद पहाड़ों में बना एक नया झील जैसा जलाशय काफी हद तक खाली हो चुका है. हालांकि, खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है.
5.6 किलोमीटर ऊपर मौजूद गड्ढे में अब भी पानी
शिन्हुआ के मुताबिक, बाढ़ प्रभावित क्षेत्र से करीब 5.6 किलोमीटर यानी 3.5 मील ऊपर एक गड्ढा अब भी खतरा पैदा कर रहा है. अनुमान है कि इसमें करीब 14 लाख घन मीटर यानी 37 करोड़ गैलन पानी मौजूद है. अधिकारियों ने इस जगह पर लगातार निगरानी रखने की जरूरत बताई है.
क्या वापस लौट रहे लोग?
नेपाल के सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में शामिल धादिंग में रविवार को लोग अपने घरों की हालत देखने के लिए वापस लौटे. कई घरों की दीवारें बाढ़ के पानी में बह चुकी हैं. बालकनी और खिड़कियों के फ्रेम गाद और मलबे से ढके हुए हैं. लोग मलबे में अपने सामान तलाश रहे हैं और जो चीजें मिल रही हैं, उन्हें निकालकर धो रहे हैं.
धादिंग की रहने वाली शर्मिला तमांग भी अपने घर से सामान बचाने की कोशिश कर रही थीं. उन्होंने द एसोसिएटेड प्रेस से कहा, “सब कुछ खत्म हो गया. कुछ भी नहीं बचा. हमारा घर भी नहीं.”
क्षतिग्रस्त पावर प्लांट का निरीक्षण शुरू
बाढ़ से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए एक बड़े पावर प्लांट का रविवार को निरीक्षण शुरू किया गया. कर्मचारियों ने प्लांट को हुए नुकसान का आकलन करना शुरू किया. यह पावर प्लांट चार जिलों में 20 हजार से ज्यादा लोगों को बिजली उपलब्ध कराता है.
गाल्छी में नदी का तेज बहाव, लोग ऊंचाई पर पहुंचे
गाल्छी में नदी का पानी तेज बहने के बाद स्थानीय लोग पास के एक पुल पर ऊंची जगह की ओर चले गए. पिछली बाढ़ के दौरान पहाड़ों से बहकर आए बड़े-बड़े पत्थर अब भी दिखाई दे रहे हैं. सस्पेंशन ब्रिज पर मौजूद लोगों को सीटी बजाकर वहां से दूर रहने की चेतावनी दी जा रही थी.
इलाके में बाढ़ की तबाही साफ दिखाई दे रही है. पूरे गांवों पर भूरे-ग्रे रंग की मोटी गाद और मलबा जमा है. इसी मलबे के बीच घर, वाहन और खेती में इस्तेमाल होने वाले ट्रैक्टर तक दिखाई दे रहे हैं. भूस्खलन के कारण नदी किनारे बनी धान की सीढ़ीनुमा खेती की जमीन के कुछ हिस्से भी नदी में समा गए हैं.
बार-बार चेतावनी से लोग परेशान
बाढ़ प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए लगातार आने वाले अलर्ट एक नई परेशानी बन गए हैं. लोगों को बार-बार अपना सामान छोड़कर ऊंचाई वाले इलाकों में जाने के लिए तैयार रहना पड़ रहा है. स्थानीय निवासी गोविंद श्रेष्ठ ने AP से कहा कि कभी-कभी बताया जाता है कि बाढ़ आने वाली है और फिर उन्हें दोबारा ऊंची जगह पर भागना पड़ता है, यहां तक कि रात में भी. उन्होंने बताया कि बारिश भी हो रही है.
श्रेष्ठ ने कहा कि वह अपने बुजुर्ग माता-पिता को सुरक्षित स्थान पर ले जाते-ले जाते थक चुके हैं. उनके 72 साल के पिता और 70 साल की मां हैं. उन्होंने कहा कि उन्हें अपने माता-पिता को उठाकर ले जाना पड़ता है और वह पूरी तरह थक चुके हैं. उनके मुताबिक, जो लोग इस आपदा में जिंदा बचे हैं, उनके लिए भी यह सिलसिला जारी है.
टूटे पुलों ने गांवों का संपर्क काटा
बाढ़ में बड़े कंक्रीट के पुलों के साथ-साथ छोटे सस्पेंशन ब्रिज भी नष्ट हो गए हैं. इसके कारण कई समुदाय एक-दूसरे से कट गए हैं. 47 वर्षीय सत्तान सिंह तमांग बुधवार को बाढ़ आने के समय एक पुल के पास काम कर रहे थे. उन्होंने कहा कि जो लोग उस तरफ हैं, वे वहीं फंसे हैं और जो लोग इस तरफ हैं, वे यहां फंसे हुए हैं. उनके मुताबिक, आगे की स्थिति बेहद मुश्किल होने वाली है.
सैकड़ों विदेशी नागरिक भी लापता
बाढ़ के बाद लापता लोगों में एक दर्जन से ज्यादा देशों के सैकड़ों विदेशी नागरिक भी शामिल हैं. इनमें ऐसे लोग हैं, जो काम के लिए इस क्षेत्र में आए थे, पहाड़ों की यात्रा कर रहे थे या किसी पवित्र पर्वत पर तीर्थयात्रा के लिए पहुंचे थे.
चीनी सरकारी मीडिया ने रविवार को बताया कि तिब्बत में 261 विदेशी नागरिक लापता हैं. इनमें 100 से ज्यादा नेपाली नागरिक शामिल हैं. इसके अलावा कई अन्य देशों के लोग भी लापता बताए गए हैं.
क्यों आई थी फ्लैश फ्लड?
बुधवार को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड की शुरुआत हिमालयी क्षेत्र में ऊंचाई पर ग्लेशियर के ढहने के बाद हुई थी. सैटेलाइट तस्वीरों का अध्ययन करने वाले वैज्ञानिकों ने बताया कि ग्लेशियर के नीचे मौजूद चट्टानी आधार का एक हिस्सा ढह गया और अपने साथ ग्लेशियर का एक हिस्सा भी नीचे ले गया.
चट्टानों के गिरने की यह घटना इतनी शक्तिशाली थी कि इसे 5.2 तीव्रता के भूकंप के रूप में दर्ज किया गया. इसके बाद चट्टानों और पिघले हुए पानी ने नीचे की घाटियों में नदियों का बहाव अचानक बढ़ा दिया. पानी और चट्टानों की तेज धारा तिब्बत और नेपाल की ओर नीचे आई और रास्ते में आने वाली इमारतों, पुलों और जमीन को बहा ले गई.




